Latest Updates
-
Harela Wishes In Pahadi Or Hindi: 'जी रया, जागि रया' कहकर अपनों को दें हरेला पर्व की शुभकामनाएं -
रथ यात्रा में सबसे पहले राजा ही क्यों लगाते हैं झाड़ू? जानिए छेरा पहरा की परंपरा -
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: रथ यात्रा पर शेयर करें भक्तिमय शुभकामना संदेश, मिलेगा प्रभु का आशीर्वाद -
अमरनाथ गुफा में पिघला तो फ्रिज में दिखा 'बाबा बर्फानी' का शिवलिंग? वायरल वीडियो देख लोग रह गए हैरान -
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान?
जानिए , क्यों जापान में सूमो नवजात बच्चों को डराते है और रुलाते है ?
आइए जानते है जापान के एक और अजीबो गरीब रिवाज क्राइंग सूमो फेस्टिवल के बारे में, जहां बच्चों को डराकर और रुलाकर यह फेस्टिवल मनाया जाता है।
अगर हम जापान को अजीबो गरीब रिवाजों का देश कहें तो शायद यह अतिश्योक्ति नहीं होगी। क्योंकि इस देश में हर चीज से जुड़ी एक अलग ही पराम्परा देखने को मिलती है। जैसे कि पेनिस फेस्टिवल और ब्रेस्ट टेम्पल जहां बूब्स की पूजा होती है।
अब जानते है यहां के एक और नए फेस्टिवल और पराम्परा के बारे में जिसे क्राइंग सूमो कहते है। बच्चें के जन्म सी जुड़ी बहुत इस दुनिया में बहुत सारे रीति रिवाज है।
आज इस आर्टिकल में हम आपको जापान में होने वाले Crying Sumo ( क्राइंग सूमो ) रिवाज मनाया जाता है।
एक रिपोर्ट के अनुसार 400 साल पुराने जापानी पराम्परा को नाकीजुमो फेस्टिवल में मनाया जाता है और इसे नवजात शिशुओं की सेहत के साथ जोड़ के देखा जाता है।
आइए पढ़ते है इस बारे में

नवजात बच्चों के साथ मनाते है
करीबन 100 बच्चों के साथ मनाया जाने वाले इस फेस्टिवल में सुमो पहलवान नवजात शिशु को को हर तरीके से रूलाने की कोशिश करते हैं।

जो सबसे पहले रोएगां वो विजेता बनेगा
बच्चों के रोने के इस कॉम्पिटिशन के पीछे कारण यह है कि बच्चें जितना रोते है, उतना अच्छा उनका लक होता है और वह सुरक्षित रहते है। इतना ही नहीं विश्वास यह भी है कि इनके रोने की आवाज सुनकर बुरी आत्माएं इन बच्चों से दूर रहती है।

हर जगह के है अलग नियम
हालांकि जापान में यह नियम हर जगह एक से नहीं है जगह बदलते ही इस खेल के नियम भी बदल जाते है। जैसे कि जापान में ही कुछ जगह ऐसा माना जाता है कि जो बच्चा सबसे पहले रोता है वह विनर नहीं लूजर कहलाता है।

रुलाने की हर तरकीब अजमाते है।
इस अजीबों गरीब, त्यौहार में सुमो पहलवान बच्चों को रुलाने की हर मुमकिन कोशिश करते है। इसके लिए डरावाने मास्क पहने जाते है, डिफरेंट फेस बनाए जाते है। फिर भी बच्चा नहीं रोता तो, वह उस पर चिखते और चिलाते है।

रेफरी भी रखा जाता है।
जापान में यह त्यौहार इतना बड़ा है कि बच्चों के इस रोने के कॉम्पिटिशन के लिए बाकायदा रेफरी भी रखा जाता है, जो यह तय करता है कि कौन सा बच्चा पहले रोया और कौन विनर है। पहले रोने वाला बच्चा ही विनर कहलाता है।

अगर बच्चा नहीं रोए तो .. ?
इस फेस्टिवल में बच्चें को रुलाना जरुरी होता है। अगर इस फेस्टिवल के दौरान लाख कोशिश करने के बाद भी बेबी डरता नहीं है तो रेफरी बच्चें को ट्रेशिनल मास्क पहनकर ऊंची आवाज निकालकर डराने की कोशिश करते है। ताकि बच्चा रो जाएं।



Click it and Unblock the Notifications