जहां नक्‍सल‍ियों का पसरा रहता है आतंक, वहीं की बेटी बनेगी पहली डॉक्‍टर

छत्‍तीसगढ़ का सुकमा ज‍िला हमेशा नक्‍सल‍ियों के आतंक की वजह से चर्चा में रहता है। लेकिन इस बार यह क्षेत्र अपनी होनहार बेटी माया कश्‍यप की वजह से चर्चा में है। सुकमा जिले में रहने वाली आदिवासी लड़की माया कश्यप ने मेडिकल कॉलेज पहुंचने वाली पहली लड़की बनी हैं। सुकमा जिले के दोरनापाल की रहने वाली माया कश्‍यप को एमबीबीएस में प्रवेश मिल गया है।

दाखिला मिलने के बाद वह दोरनापाल से पहली डॉक्‍टर बनने वाली हैं। बिना किसी कोचिंग और सहायता के मेडिकल एंट्रेंस पास करने वाली माया कश्यप का कहना है कि उनका बचपन से सपना था कि वह डॉक्टर बनें। हालांकि माया के ल‍िए ये सफर आसान नहीं था लेकिन ढे़रों चुनोतियों के बाद भी माया ने हार नहीं मानी।

गांव के स्कूल में पढ़ाई की पूरी

गांव के स्कूल में पढ़ाई की पूरी

माया का कहना हैं कि, 'मैं मेडिकल की परीक्षा पास करके काफी खुश और आगे पढ़ने के लिए उत्साहित हूं।' बता दें कि माया जिस क्षेत्र से आती हैं वहां पर प्राथामिक विद्यालय में सिर्फ 3,000 बच्चे ही नामांकित है। माया ने कहा कि उन्होंने गांव के जिस स्कूल से पढ़ाई की वहां पर शिक्षक भी कभी कभार ही देखने को मिलते हैं। ऐसे में मेडिकल पास करना बहुत बड़ी बात है मेरे ल‍िए।

हार नहीं मानी

हार नहीं मानी

माया ने बताया कि पांचवी के बाद छिंदगढ़ स्थित नवोदय विद्यालय में चयन हुआ था। 11वीं व 12वीं की पढ़ाई ओडिशा के नवोदय विद्यालय से पूरी की है। भिलाई में एक साल रहकर नीट की कोचिंग ली, इसके बाद उनका डेंटल में चयन हो गया। डेंटल में चयन होने के बाद माया ने हार नहीं मानी और फिर से एमबीबीएस की तैयारी की और सेलेक्शन करवा कर ही अपनी जिद्द पूरी की। माया का एमबीबीएस साल 2023 में अंब‍िकापुर मेड‍िकल कॉलेज से पूरा होगा।

9 साल पहले हुई पिता की मौत

9 साल पहले हुई पिता की मौत

आदिवासी परिवार से आने वाली माया के पिता का 9 साल पहले देहांत हो गया था और ऐसे समय में हाई स्कूल या कॉलेज जाने का सपना देखना भी मुश्किल था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और उनकी मां घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपने सपने को साकार किया।

मां ने उठाया घर की जिम्‍मेदारी

मां ने उठाया घर की जिम्‍मेदारी

माया की बहन ने बताया कि पिता की मौत के बाद हमारा परिवार आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो गया था लेकिन माया ने हिम्मत नहीं हारी। उनकी मां ने तीन भाई बहन का भरण पोषण करने के साथ पूरे घर की जिम्‍मेदारी उठाई और माया ने अपने लक्ष्‍य को साधकर चलती रही है। इसी वजह से आज परिवार उनकी सफलता पर गर्व कर रहा है।

सुकमा में ही रहकर देना चाहती है सेवा

सुकमा में ही रहकर देना चाहती है सेवा

माया ने कहा कि वह डॉक्टर बनने के बाद किसी अन्य राज्य या शहर का रुख नहीं करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह पढ़ाई पूरी होने के बाद सुकमा में ही रहकर यहां के लोगों की सेवा करना चाहती है।

मुख्‍यमंत्री ने बढ़ाए हाथ

मुख्‍यमंत्री ने बढ़ाए हाथ

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने माया से मुलाकात कर उसे शुभकामना दी साथ ही यह भी घोषणा की है कि अब माया कश्यप की पढ़ाई का ख़र्च सरकार उठाएगी साथ ही उस बच्ची को एक लाख रूप प्रोत्साहन राशी देने का भी ऐलान किया।

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