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डिएगो मेराडोना से जुड़ी ये बातें शायद ही होंगी मालूम, जानें क्या था 'हैंड ऑफ गॉड' किस्सा
कई मायनों में साल 2020 अच्छा नहीं रहा। एक तरह कोरोना का कहर पूरी दुनिया में बरकरार है, वहीं दूसरी तरफ फुटबॉल जगत से निराशाभरी खबर आयी है। अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी डिएगो मेराडोना अब नहीं रहे। खबरों के मुताबिक उनका निधन हार्टअटैक से हुआ। मेराडोना लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कुछ समय पहले ब्रेन में क्लॉट की वजह से उन्हें सर्जरी भी करवानी पड़ी थी। दुनियाभर के फुटबॉल प्रेमियों के लिए मेराडोना के जाने की खबर किसी झटके से कम नहीं है।

अर्जेंटीना के पूर्व फुटबॉलर डिएगो मेराडोना को फुटबॉल के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। खेल के प्रति उनका समर्पण कई युवाओं को प्रेरित करने में कामयाब रहा। आज इस लेख के माध्यम से जानते हैं डिएगो मेराडोना से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

गरीब परिवार से चमकती दुनिया का सफर
डिएगो मेराडोना का पूरा नाम डिएगो आर्मैन्ड़ो मेराडोना था और उनका जन्म 30 अक्टूबर 1960 को अर्जेंटीना के लानुस में एक गरीब परिवार में हुआ था। तीन बेटियों के बाद वे पहले पुत्र थे और उनके दो छोटे भाई भी हैं।

बचपन में फुटबॉल को बनाया सच्चा दोस्त
मेराडोना बचपन से ही फुटबॉल खेलने के शौकीन रहे। मेराडोना जब 10 साल के थे तब उनका चयन प्रतिभा स्काउट द्वारा किया गया। उसके बाद से उन्होंने फुटबॉल को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। कहावत है न कि 'पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं', ये बात मेराडोना के लिए बिल्कुल सटीक है। उन्होंने हर अवसर को भुनाया और कम समय में ही लोकप्रियता कमाई।

1986 में मेराडोना की कप्तानी में अर्जेंटीना बनी विश्व विजेता
1986 में कप्तान डिएगो मेराडोना के पूरे टूर्नामेंट के दौरान शानदार प्रदर्शन से अर्जेंटीना ने विश्व खिताब जीता था। इस खिताबी जंग में 24 टीमों ने हिस्सा लिया था। टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबले में अर्जेटीना की टीम वेस्ट जर्मनी को 3-2 से हराकर विश्व विजेता बनी थी। मेराडोना के अचंभित कर देने वाले खेल ने सभी पर अपना जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। मारेडोना ने इस टूर्नामेंट में पांच गोल दागे। इतना ही नहीं, उन्होंने पांच गोल में मदद भी की। अर्जेंटीना की टीम को ख़िताब तक पहुंचाने के लिए मेराडोना ने एक मजबूत पुल की तरह काम किया। इसके बाद से ही मेराडोना की लोकप्रियता दुनियाभर में हो गयी।

'हैंड ऑफ गॉड' किस्सा
साल 1986 के वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ मेराडोना का गोल चर्चित और विवादित रहा। गेंद उनके कंधे के नीचे बाजू से लगकर गोल पोस्ट में गई थी। रेफरी उसे देख नहीं सके थे और इसे गोल करार दे दिया गया था। मेराडोना ने इस गोल को ईश्वर की मर्जी बताते हुए 'हैंड ऑफ गॉड' करार दिया था।

मिले कई अवार्ड्स
मेराडोना ने पूरे करियर में कई अवार्ड्स अपने नाम किये। उन्होंने फीफा अंडर 20 वर्ल्ड कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिऐ गोल्डन बॉल पुरस्कार जीता। मेराडोना ने साल 1979, 1980 और 1981 में अर्जेंटाइन लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड भी जीता।

नशे से जुड़ा रिश्ता
मेराडोना को 1980 से 2004 तक माराडोना को कोकीन की लत लगी जिससे उनके फुटबॉल खेलने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ा। पकड़े जाने पर 15 महीने के लिए बैन भी हुए थे। मेराडोना ने 1991 में प्रतिबंधित दवा ली और उन पर डोप का आरोप लगा। साल 1994 में वर्ल्ड कप में एफेड्रिन लेने पर उन्हें निलंबित किया गया।

आत्मकथा भी हुई मशहूर
साल 2000 में मेराडोना ने "आई एम दी डिएगो" नाम से अपनी आत्मकथा लिखी थी। दुनिया में जिस तरह से मेराडोना की लोकप्रियता है उसी तरह यह किताब भी फेमस हुई। यह किताब मार्केट में तुरंत ही बेस्ट सेलर में शामिल हो गई थी।

सदी के महान फुटबॉलर
मेराडोना फीफा के पोल में पेले को पीछे छोड़ते हुए 20वीं सदी के महानतम फुटबॉलर चुने गए। सन् 2000 में फीफा ने इंटरनेट पर "प्लेयर ऑफ द सेंचुरी" के लिए ऑनलाइन वोटिंग कराई थी और इसमें मेराडोना को 53.6 % फीसदी वोट के साथ शीर्ष स्थान हासिल हुआ था।
1986 का वो मुकाबला जिसमें चर्चित हुआ था मेराडोना का 'हैंड ऑफ गॉड' गोल
आप भी देखें 1986 फुटबॉल विश्व कप का वीडियो.



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