Latest Updates
-
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
Maha Kumbh 2025: नागा साधु कहां से आते हैं और कुंभ मेले के बाद कहां चले जाते हैं?
Naga Sadhus Interesting Fact : महाकुंभ में नागा साधु विशेष आकर्षण होते हैं, जो अपने निर्वस्त्र अवतार, भस्म से ढके शरीर और लंबी जटाओं से पहचाने जाते हैं। ये साधु अखाड़ों से जुड़े होते हैं और कठोर तपस्या करते हैं। जितनी भारी तादाद में ये साधु कुंभ में नजर आते हैं, उसके बाद ये साधु गायब हो जाते हैं।
नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया उनके अनुशासन, तप और आध्यात्मिक जीवन पर आधारित है, जो उन्हें साधारण मानवों से अलग बनाती है। आइए जानते हैं आखिर कुंभ खत्म होने के बाद ये नागा साधु अचानक से कहां गायब हो जाते हैं?

कुंभ के बाद कहां चले जाते हैं नागा साधु?
कुंभ के बाद नागा साधु अपनी विशिष्ट दिनचर्या में लौट जाते हैं। ये साधु मुख्यतः दो प्रमुख अखाड़ों, वाराणसी के महापरिनिर्वाण अखाड़ा और पंच दशनाम जूना अखाड़ा, से जुड़े होते हैं। कुंभ में ये दिगंबर स्वरूप में दिखाई देते हैं, जहां त्रिशूल, रुद्राक्ष की माला, भस्म और कभी-कभी जानवरों की खाल से सुसज्जित रहते हैं। कुंभ का पहला शाही स्नान इन्हीं साधुओं द्वारा किया जाता है, इसके बाद ही अन्य श्रद्धालु स्नान करते हैं।
कुंभ समाप्ति के बाद नागा साधु दिगंबर स्वरूप छोड़कर गमछा पहनते हैं और अपने आश्रमों में लौट जाते हैं। उनका मानना है कि धरती बिछौना और अम्बर ओढ़ना है, जो उनके वैराग्यपूर्ण जीवन का प्रतीक है। आश्रमों में वे साधना, योग और तपस्या करते हैं, समाज से दूर रहकर आध्यात्मिक साधना में लीन रहते हैं।
कैसे बिताते हैं जीवन?
कुंभ समाप्ति के बाद नागा साधु अपने अखाड़ों में लौटकर ध्यान, साधना और धार्मिक शिक्षा में जुट जाते हैं। इनकी तपस्वी जीवनशैली में कठोर तप और साधना प्रमुख हैं। कई नागा साधु हिमालय, जंगलों और एकांत स्थानों में जाकर तपस्या करते हैं, जहां वे भभूत से ढके शरीर के साथ कठोर साधना करते हैं और फल-फूल खाकर जीवन व्यतीत करते हैं।
तीर्थ स्थल ही होता है इनका ठिकाना
कुछ नागा साधु तीर्थ स्थलों जैसे प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में निवास करते हैं। ये दीक्षा मांगकर जीवन निर्वाह करते हैं और धार्मिक यात्राओं पर भी जाते हैं। नागा साधुओं का जीवन समाज से अलग, पूर्ण वैराग्य और आध्यात्मिकता से भरा होता है, जो उन्हें विशिष्ट बनाता है।



Click it and Unblock the Notifications
