Latest Updates
-
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके -
Pitru Paksha 2026: गया जी के इस मंदिर में जिंदा लोग खुद करते हैं अपना पिंडदान, बेहद अनोखी है मान्यता -
दिल को हेल्दी रखते हैं ये 5 योगासन, हार्ट अटैक से बचने के लिए आज से ही बना लें रूटीन का हिस्सा -
World Heart Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व हृदय दिवस? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की थीम -
रात में लाइट जलाकर सोते हैं? आपकी ये आदत दिल पर पड़ सकती है भारी, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा -
Bank Holidays October 2026: अक्टूबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें छुट्टियों की पूरी लिस्ट -
Pitru Paksha 2026 Food Rules: पितृपक्ष में क्या खाएं और क्या न खाएं? जानें खानपान से जुड़े जरूरी नियम -
Tanya Mishra: कौन हैं तान्या मिश्रा? अचानक कैसे बनीं देश की नई 'नेशनल क्रश', इंटरनेट पर तस्वीरें हो रहीं वायरल
Shaheed Diwas 2026: क्यों 23 मार्च को मनाया जाता है शहीद दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व
Shaheed Diwas 2026: हर साल 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत के तीन महान क्रांतिकारियों भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर की शहादत की याद में समर्पित है। साल 1931 में इसी दिन अंग्रेजी हुकूमत ने इन तीनों वीरों को फांसी दे दी थी। इन क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण हंसते-हंसते न्यौछावर कर दिए और इतिहास में अमर हो गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। यही वजह है कि हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाकर उनके साहस और देशभक्ति को याद किया जाता है। आइए, जानते हैं शहीद दिवस के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से -

शहीद दिवस क्या है?
हर वर्ष 23 मार्च को शहीद दिवस मनाया जाता है क्योंकि साल 1931 में इसी दिन भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजी शासन ने फांसी दी थी। शहीद दिवस हमें उनके बलिदान और देशभक्ति की याद दिलाता है। इस मौके पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा लेने की कोशिश करते हैं, ताकि देश के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना मजबूत हो सके।
शहीद दिवस का महत्व
शहीद दिवस सिर्फ वीरों को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें उनके साहस और सोच से सीख लेने का मौका भी देता है। भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर ने जिस निडरता के साथ देश के लिए अपना जीवन समर्पित किया, वह आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। यह दिन हमें यह एहसास कराता है कि आजादी आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके लिए अनगिनत बलिदान दिए गए। इसलिए हमें अपने देश की आजादी का सम्मान करना चाहिए और उनके दिखाए रास्ते पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।
शहीद दिवस का इतिहास
शहीद दिवस का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। यह दिन उन महान क्रांतिकारियों की शहादत की याद दिलाता है, जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर उस दौर के प्रमुख क्रांतिकारी थे और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े हुए थे, ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनके संघर्ष और गतिविधियों के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और मुकदमा चलाया गया। इसके बाद 23 मार्च 1931 को इन तीनों वीरों को फांसी दे दी गई, तभी से हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उनके साहस, बलिदान और देशभक्ति को याद रखा जा सके।
23 मार्च और 30 जनवरी का शहीद दिवस क्या है?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब 30 जनवरी को भी शहीद दिवस मनाया जाता है, तो फिर 23 मार्च का महत्व क्या है। दरअसल, इन दोनों तारीखों का अपना अलग-अलग ऐतिहासिक महत्व है। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या हुई थी। इसलिए इस दिन को राष्ट्रपिता की याद में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है, 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी दी थी। इन तीनों क्रांतिकारियों के बलिदान को सम्मान देने के लिए हर साल 23 मार्च को भी शहीद दिवस मनाया जाता है।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का योगदान
भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। इन तीनों ने न सिर्फ अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि अपने विचारों और साहस से युवाओं में आजादी की भावना भी जगाई। भगत सिंह ने कम उम्र में ही देश की आजादी को अपना लक्ष्य बना लिया था। साल 1929 में उन्होंने असेंबली में बम फेंककर अंग्रेजी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। उनका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि देशवासियों को जगाना और अत्याचार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था। इसके अलावा, लाला लाजपत राय की मौत के बाद इन क्रांतिकारियों ने इसका विरोध किया, जिसके चलते उन्हें सॉन्डर्स हत्या कांड में दोषी ठहराया गया। अंततः 23 मार्च 1931 को इन तीनों वीरों को लाहौर जेल में फांसी दे दी गई। उनका बलिदान आज भी देशभक्ति और साहस की मिसाल बना हुआ है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।



Click it and Unblock the Notifications
