तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे... मोहमद रफ़ी के वो सदाबहार नगमें जो आज भी लोगों की जुबां पर हैं

अपनी मखमली आवाज से दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले गायक मोहम्मद रफी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी गायिकी आसमां को छू ले ऐसी थी। कला के नौ रसों में उनकी महारत बेमिसाल थी।

जितनी शिद्दत से वो भाव के सभी रसों को अपने सुरों में पिरोते थे वो शायद ही कोई और गायक कर पाए। प्रेम रस हो या रौद्र रस, धीमी तान से से लेकर ऊंची तान तक, सभी पर बराबर योग्यता रखने वाले इस महान गायक को आधुनिक भारत का तानसेन भी कहते हैं।

Mohammed rafi death anniversary: list of top 10 evergreen songs of md rafi

सिर्फ गायिकी ही नहीं अपनी उम्दा शख्सियत से भी यश प्राप्त करने वाले गायक मोहम्मद रफ़ी की श्रद्धांजलि में आइये हम बात करते हैं उनके कुछ सदाबहार और जबरदस्त लोकप्रिय गानों के बारे में।

देशभक्ति से लबरेज गाने हों या फिर डांस फ्लोर पर पैर थिरकाने को मजबूर कर देने वाले रोमांटिक गाने, मोहम्मद रफ़ी ने चार दशकों तक समां बांधे रखा। जब भारत चीन युद्ध में मुल्क जख्मी हुआ तो रफ़ी ने अपनी आवाज की मरहम से ना सिर्फ लोगों के गम दूर किये बल्कि अपने आप को मजबूत कर मुल्क की हिफाजत के लिए फिर से उठ जाने के लिए भी ललकार लगाई। उनके सबसे मशहूर देशभक्ति गानों में पहला गाना है 'कर चले हम फिदा, जान-ओ तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों फिल्म' 'हकीकत'( 1964)। इस गाने में रफ़ी साहब ने जो भाव दिए हैं वो आज भी आंखों में आंसू ला देते हैं।

फिल्म 'लीडर' का गाना 'अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं...सर कटा सकते हैं, लेकिन सर झुका सकते नहीं', एक कालजयी रचना बन गयी।

फिल्म 'शहीद' (1965) का गीत 'मेरा रंग दे बसंती चोला' और 'सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं', आज भी हर स्वतंत्रता दिवस पर बजाया जाता है।

1975 में आई थी फिल्म आंधी। इस फिल्म में आरडी बर्मन द्वारा रचित और गुलज़ार द्वारा लिखित एक बहुत ही मधुर गाना था "तेरे बिना जिंदगी से कोई"।

गाना रफ़ी साहब और लता मंगेशकर ने मिलकर गाया था। आज भी दिल टूटे हुए प्रेमियों के लिए ये गाना धूप में छांव जैसा है। अन्दर तक झकझोर देने वाले इस गाने की लोकप्रियता आज भी कम नहीं हुई।

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ये रेशमी जुल्फें... इस गाने के बोल सुनते ही मन रोमांटिक होने लगता है। अन्दर का गायक जाग उठता है। बेहद रोमांटिक इस गीत को लिखा था आनंद बख्शी ने और संगीत दिया था लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने। 1969 में आई फिल्म दो रास्ते के इस गाने को सुनते ही श्रोता अलग ही दुनिया में खो जाते हैं। रफ़ी की मखमली आवाज के लिए प्रेम के उपासक हमेशा उनके आभारी रहेंगे।

दिल में प्रेम और दर्द दोनों की बानगी बिखेरता एक और मशहूर गाना है फिल्म "ब्रह्मचारी" (1968) से "दिल के झरोखे में"। इस गाने को लिखा है हसरत जयपुरी ने और संगीत दिया शंकर-जयकिशन ने। गीत को फिल्माया गया है शम्मी कपूर और राजश्री के ऊपर। दिल के तार को स्पंदित करने वाला ये गाना रफ़ी के सबसे बेहतरीन गानों में शुमार है। एक ऐसी धुन और एक ऐसी आवाज जिसके चाहने वालो की संख्या बढ़ती ही जा रही है, कम नहीं होती।

1961 में रफ़ी की कालजयी आवाज में सबसे लोकप्रिय गाना आया बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है, ये ऐसा गाना है जिसके बिना उत्तर भारत में आज भी कोई शादी संपन्न नहीं होती। हर शादी विवाह में ये गाना बजना तय है।

मोहम्मद रफ़ी के इन गानों को सुनना भी एक तरह से उस महान गायक को श्रद्धांजलि देना ही है। एक बहुमुखी प्रतिभा का स्वामी, एक बेहद उम्दा शख्सियत के मालिक और हिंदी सिनेमा के महानतम गायक मोहम्मद रफ़ी को शत शत नमन।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Monday, July 31, 2023, 16:00 [IST]
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