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युवाओं के लिये स्वामी विवेकानंद ने कहीं हैं ये बातें
आज पूरे विश्व में 12 जनवरी, एक विश्व युवा दिवस के रूप में मानाया जाता है। इसका आयोजन सबसे पहले सन 2000 में आरम्भ किया गया था। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई. को अंतरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया था।
हम सभी जानते हैं कि हमारे देश की सफलता हमारे आज के युवाओं के हाथों में हैं। आज के दिन से अच्छा क्या हो सकता है कि हम अपने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों पर चलने के लिये प्रोत्साहित कर सकें।
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हर युवा को पता होना चाहिये कि स्वामी जी को युवाओं से बड़ी उम्मीदें थीं। उन्होंने युवाओं को धैर्य, व्यवहारों में शुद्धता रखने, आपस में न लड़ने, पक्षपात न करने और हमेशा संघर्ष करने का संदेश दिया। तो दोस्तों अगर आपको जीवन में आगे बढ़ना है और इस देश का नाम रौशन करना है तो, स्ंद की के इन विचारो को सदा के लिये दिल में बसा लें।

किसी बात से मत डरो
किसी बात से मत डरो। तुम अद्भुत कार्य करोगे। जिस क्षण तुम डर जाओगे, उसी क्षण मुम बिल्कुल शक्तिहीन हो जाओगे।

न टालो, न ढूँढों
न टालो, न ढूँढों - भगवान अपनी इच्छानुसार जो कुछ भेजें, उसके लिए प्रतिक्षा करते रहो, यही मेरा मूलमंत्र है।

शक्ति और विश्वास
शक्ति और विश्वास के साथ लगे रहो। सत्यनिष्ठा, पवित्र और निर्मल रहो, तथा आपस में न लडो। हमारी जाति का रोग ईर्ष्या ही है।

दूसरों से अलग सोचोगे तो उपहार उडेगा पर डरो नहीं
हर काम को तीन अवस्थाओं में से गुज़रना होता है - उपहास, विरोध और स्वीकृति। जो मनुष्य अपने समय से आगे विचार करता है, लोग उसे निश्चय ही ग़लत समझते हैं। इसलिए विरोध और अत्याचार हम सहर्ष स्वीकार करते हैं; परन्तु मुझे दृढ और पवित्र होना चाहिए और भगवान में अपरिमित विश्वास रखना चाहिए, तब ये सब लुप्त हो जायेंगे।

अकेले रहो, अकेले रहो
जो अकेला रहता है, उसका किसी से विरोध नहीं होता, वह किसी की शान्ति भंग नहीं करता, न दूसरा कोई उसकी शान्ति भंग करता है।

उठो जागो, रुको नहीं...
उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये।

दुनिया का सबसे बड़ा धर्म
दुनिया का सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव अपने आम के प्रति सच्चे रहना, अपने आप पे विश्वास रखो हमेशा।



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