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झारखंड में एक पति ने पत्नी की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए बनवा दी मस्जिद
वैसे जब कभी मोहब्बत की मिसाल दी जाती है तो ताजमहल का जिक्र जरुर होता है जहां एक पति ने अपनी पत्नी की याद में दुनिया को एक नायाब कला का नमूना दिया था। लेकिन इन दिनों झारखंड के जमशेदपुर के कपाली में स्थित फातिमा मस्जिद भी एक खास कारण के वजह से सुर्खियों में है। ये एक ऐसा मस्जिद है जहां सिर्फ महिलाएं नमाज अदा करने आती है। इस मस्जिद को बनाने के पीछे मकसद भी बहुत अहम है। आइए जानते है इस मस्जिद से जुड़ी दिलचस्प काहानी।

सिर्फ महिलाएं ही कर सकती है प्रवेश
झारखंड के जमशेदपुर में एक रिटायर टीचर ने अपनी बीवी की याद में मस्जिद का निर्माण करवाया है। कपाली में स्थित यह फातिमा मस्जिद में सिर्फ महिलाएं ही नमाज पढ़ सकती हैं।
मर्दों को आने की इजाजत नहीं
मस्जिद में मर्दों को आने की इजाजत नहीं है। फातिमा मस्जिद का निर्माण रिटायर टीचर नूर मोहम्मद ने अपनी बीवी फातिमा बेगम की मौत के बाद करवाया। दरअसल, फातिमा बेगम की ख्वाहिश थी कि महिलाओं के लिए एक अलग मस्जिद होनी चाहिए। जहां महिलाएं ही जाएं और धर्म से संबंधित तालीम हासिल कर सकें। और उन्हें एक अलग माहौल मिले जहां वो धर्म की तालीम के साथ-साथ कलात्मक हुनर सीखें और आत्मनिर्भर बन सकें।
झेलना पड़ा था विरोध
नूर ने महिलाओं का लिए मस्जिद बनाने का निर्णय तो कर लिया पर उन्हें काफी विरोध भी झेलना पड़ा। कई धर्मावलंबियों ने महिलाओं के लिए मस्जिद बनाने पर ऐतराज भी जताया। मगर नूर अपनी बीवी की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए डटे रहे। कुछ वक्त बाद लोग उनके समर्थन में आगे आए। नूर ने 22 जनवरी 2017 को इस मस्जिद का निर्माण कराया। झारखंड में कई मस्जिदें हैं जहां इमारत एक ही है पर पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था है।
कोई इमाम नहीं, सिर्फ एक अध्यापिका
फातिमा मस्जिद झारखंड में महिलाओं के लिए पहली मस्जिद है। यहां नमाज पढ़ाने के लिए कोई इमाम नहीं है। एक अध्यापिका सकीना बेगम हैं जो महिलाओं को सिलाई और कढ़ाई सिखती हैं और उन्हें कुरान भी पढ़ाती हैं।



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