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सावित्रीबाई फुले जयंती: भारत की पहली महिला जिन्होंने 1848 में शुरू किया लड़कियों का स्कूल

सावित्रीबाई फुले का विवाह महज नौ साल की उम्र में हो गया था। उनको पढ़ना लिखना नहीं आता था, तब उनके पति ज्योतिराव फुले ने उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी ली और घ पर ही उनको शिक्षित किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दो शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भाग लिया।
सावित्रीबाई फुले के पति बहुत ही विचारशील व्यक्ति थी। ज्योतिराव फुले आगे चलकर एक प्रमुख लेखक और जाति-विरोधी समाज सुधारक रहे।
सावित्रीबाई फुले ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, अपने पति की गुरु सगुनाबाई, जो एक क्रांतिकारी नारीवादी भी थीं, उनके साथ पुणे के महारवाड़ा में लड़कियों की शिक्षित करना शुरू कर दिया।
सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिराव फुले ने 1848 में ब्रिटिश शासन के दौरान भिडे वाडा में लड़कियों के लिए पहला भारतीय स्कूल खोला और पढ़ाना शुरू किया। शुरूआत में उके स्कूल में सिर्फ नौ लड़कियां थीं। धीरे-धीरे संख्या बढ़कर 25 हो गई। उसके स्कूल में वेद और शास्त्र जैसे ब्राह्मणवादी ग्रंथों के बजाय गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन शामिल किया गया।

सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिराव फुले ने 1851 तक शहर में तीन और स्कूल शुरू किए। सावित्रीबाई थीं अपने छात्रों की शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहीं। लड़कियों की शिक्षा देने के लिए उन्होंने उनके माता पिता से भी बातचीत करती थीं, उनके साथ मीटिंग्स करती थीं। उन्होंने लड़कियों के लिए शिक्षा का महत्व को समझाया।
उन्होंने 'सत्यशोधक समाज' (सत्य-साधकों का समाज) की स्थापना की, जो प्रगतिशील विचारों का समर्थन करने वाला रहा। दहेज प्रथा का विरोध और निंदा की। बिना विनिमय के रिवाज और प्रोत्साहित किया।
10 मार्च, 1897 को सावित्रीबाई का निधन हो गया।



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