Latest Updates
-
5 साल से तालाब में रह रहे इकबाल की मदद के लिए आगे आए अनंत अंबानी, इलाज के लिए मुंबई एयरलिफ्ट कराया -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए मशरूम का सेवन, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
Special Marriage Act क्या है? सोनाक्षी-जहीर इकबाल समेत इन बॉलीवुड कपल्स ने बिना धर्म बदले की शादी -
किन्नौर कैलाश के दर्शन के बाद बदल गई हिमांशी खुराना की जिंदगी, एक्ट्रेस ने बताया क्यों इतनी खास है यह जगह -
Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन? जानें तिथि, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, भद्रा का समय और महत्व -
कभी 75 रुपये में साफ करते थे गाड़ियां, आज कहलाते हैं दिल्ली के खान सर; पढ़ें मनोज गर्ग की सक्सेस स्टोरी -
Sawan 2026: सावन में दाढ़ी और बाल कटवाना चाहिए या नहीं? जानें ज्योतिष और धार्मिक नियम -
कौन थीं अनन्या राज? 27 साल की उम्र में हुई मौत, एक महीने बाद सामने आई निधन की खबर -
Rudrabhishek Vidhi: घर पर शिव जी का रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें सरल पूजा विधि, सामग्री, मंत्र और जरूरी नियम -
Nag Panchami 2026: नाग पंचमी पर करें ये 5 सरल उपाय, कालसर्प दोष से मिलेगी राहत
Republic Day 2026: क्या है 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी? जानें सदियों पुरानी इस सैन्य परंपरा का रोचक इतिहास
Beating Retreat Ceremony History: हर साल 26 जनवरी को राजपथ जो अब कर्तव्य पथ है पर निकलने वाली परेड भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की झांकी पेश करती है। लेकिन, इस राष्ट्रीय उत्सव का औपचारिक समापन तीन दिन बाद, यानी 29 जनवरी को होता है। दिल्ली के ऐतिहासिक विजय चौक पर आयोजित होने वाली 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी वह पल है, जब सूर्यास्त की सुनहरी किरणों के बीच भारतीय सेना की तीनों टुकड़ियां थल, नभ और जल अपने बैंड के साथ मार्च करती हैं।
यह समारोह न केवल गणतंत्र दिवस के समापन का प्रतीक है, बल्कि यह सदियों पुरानी उस सैन्य परंपरा की याद दिलाता है जब युद्ध के मैदान में सेनाएं शांति से वापस लौटती थीं। आइए जानते हैं इस खास परंपरा का इतिहास...

क्या है 'बीटिंग रिट्रीट' का अर्थ? (Meaning of Beating Retreat)
'बीटिंग रिट्रीट' का शाब्दिक अर्थ है "पीछे हटना"। प्राचीन काल में, जब युद्ध सूर्यास्त के समय रुक जाता था, तब नगाड़े बजाकर और बिगुल फूंककर सैनिकों को युद्ध का मैदान छोड़कर अपने कैंपों और बैरकों में लौटने का संकेत दिया जाता था। इस दौरान सैनिक अपने हथियार नीचे रख देते थे और झंडा उतार लिया जाता था।
भारत में बीटिंग रिट्रीट का इतिहास (Historical Background)
भारत में इस समारोह की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट्स ने इस समारोह को स्वदेशी रूप में विकसित किया था। शुरुआत में इसे दिल्ली के तत्कालीन किंग्सवे पर आयोजित किया गया था, जिसे अब कर्तव्य पथ कहा जाता है। तब से लेकर आज तक, हर साल 29 जनवरी को यह भव्य आयोजन विजय चौक पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में होता है।
कैसे होता है समारोह का आयोजन? (The Ceremony Sequence)
यह समारोह शाम के समय विजय चौक पर होता है, जहां रायसीना हिल्स के दोनों ओर 'नॉर्थ ब्लॉक' और 'साउथ ब्लॉक' की इमारतें रोशनी से जगमगा उठती हैं। भारत के राष्ट्रपति (सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर) समारोह के मुख्य अतिथि होते हैं। इस सेरेमनी की खासियत होती है कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के बैंड पारंपरिक और आधुनिक धुनों पर मार्च करते हैं। जैसे ही सूरज ढलता है, राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान के साथ उतारा जाता है और बैंड 'सारे जहां से अच्छा' की धुन बजाता है।
संगीत और धुन: 'अबाइड विद मी' से 'स्वदेशी' तक
सालों तक इस समारोह का मुख्य आकर्षण महात्मा गांधी की पसंदीदा धुन 'अबाइड विद मी' (Abide With Me) हुआ करती थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में भारतीयता को बढ़ावा देने के लिए इसमें कई भारतीय धुनों को शामिल किया गया है, जैसे ऐ मेरे वतन के लोगों, कदम-कदम बढ़ाए जा और वीर गोर्खा।
ड्रोन शो और आधुनिकता (Modern Elements)
2026 में बीटिंग रिट्रीट न केवल परंपराओं का संगम होगी, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक की झलक भी दिखेगी। पिछले कुछ सालों से 1,000 से अधिक स्वदेशी ड्रोन द्वारा आसमान में सैन्य शौर्य की आकृतियां बनाई जाती हैं, जो दुनिया भर में चर्चा का विषय रहती हैं।



Click it and Unblock the Notifications