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Shab-e-Barat 2026 Date: 4 या 5 फरवरी कब है 'इबादत की रात'? जानें सही तारीख और गुनाहों से तौबा का तरीका
Shab-e-Barat 2026 Date: इस्लाम में शब-ए-बारात वह मुकद्दस रात है जब खुदा की रहमतों के दरवाजे हर किसी के लिए खुल जाते हैं। 'शब' का अर्थ है रात और 'बारात' का अर्थ है बरी होना या नजात मिलना-यानी वह रात जब इंसान अपने गुनाहों से तौबा कर जहन्नुम की आग से आजादी पाता है। साल 2026 में शब-ए-बारात की तारीख को लेकर चांद के दीदार के कारण असमंजस बना हुआ है।
मुस्लिम समाज इस रात इबादत में मशगूल रहता है और अपने पूर्वजों (मरहूमों) की मगफिरत के लिए दुआएं मांगता है। आइए जानते हैं, भारत में इस साल यह रूहानी रात कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है।

4 या 5 फरवरी कब है शब-ए-बारात?
इस्लामी कैलेंडर चांद पर आधारित होता है, इसलिए तारीखें हर साल 10-11 दिन पीछे खिसकती हैं। यदि शाबान का चांद 20 जनवरी को नजर आता है, तो शब-ए-बारात 4 फरवरी 2026 (बुधवार) की शाम को शुरू होगी। यदि चांद एक दिन देरी से नजर आता है, तो यह इबादत की रात 5 फरवरी 2026 (गुरुवार) को होगी। बता दें कि इसकी अंतिम पुष्टि रूहियत-ए-हिलाल कमेटी (चांद कमेटी) के ऐलान के बाद ही होगी।
'माफी की रात' का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शब-ए-बारात को 'फैसलों की रात' भी कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अगले एक साल के लिए बंदों का रिज्क रोजी, जीवन-मृत्यु और भाग्य तय करते हैं। हदीस के मुताबिक, इस रात अल्लाह दुनिया के आसमान पर अवतरित होते हैं और पुकारते हैं कि है कोई माफी मांगने वाला जिसे मैं माफ कर दूं? ऐसा माना जाता है कि यह रात इबादत, नमाज, और कुरान की तिलावत के लिए समर्पित है।
कैसे मनाई जाती है शब-ए-बारात? (Rituals)
इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग विशेष इंतजाम करते हैं। मुस्लिम लोग शब-बेदारी करते हैं जिसमें रात भर जागना होता है। लोग मस्जिदों और घरों में रात भर जागकर नफ़्ल नमाजें पढ़ते हैं और अल्लाह का जिक्र करते हैं। लोग अपने बुजुर्गों की कब्रों पर जाकर उनके लिए फातिहा पढ़ते हैं और उनकी रूह की शांति के लिए दुआ मांगते हैं। इसके अलावा गरीबों को खाना खिलाना और दान करना इस रात का अहम हिस्सा है। जान लें कि शब-ए-बारात के अगले दिन यानी 15वें शाबान को रोजा रखना बेहद अफजल (पुण्यकारी) माना जाता है।

घरों में बनते हैं पकवान
शब-ए-बारात के मौके पर घरों में हलवा, बिरयानी और अन्य लजीज पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें पड़ोसियों और गरीबों में बांटा जाता है। यह रात भाईचारे और क्षमा का संदेश देती है।



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