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Budget 2026: आप जानते हैं कहां से आया 'बजट' शब्द? जानें फ्रांस के 'चमड़े के थैले' से 'डिजिटल टैबलेट' तक जर्नी
Do You Know Budget Word History: 1 फरवरी 2026, दिन रविवार यानी आज निर्मला सीतारमण अपना नौंवा बजट पेश करने जा रही हैं जो अपने आप में खास है। हर किसी की नजरें इस बार के बजट पर टिकी हुई है। वहीं जैसे ही फरवरी का महीना करीब आता है, हर भारतीय की जुबान पर बस एक ही शब्द होता है 'बजट'। कोई इसे टैक्स में छूट से जोड़ता है, तो कोई महंगाई के चश्मे से देखता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस शब्द पर पूरे देश की किस्मत टिकी होती है, उसका जन्म कहां हुआ?
आपको जानकर हैरानी होगी कि 'बजट' का संबंध किसी भारी-भरकम तिजोरी या बैंक लॉकर से नहीं, बल्कि एक साधारण से 'चमड़े के थैले' से है। हमें पता है आपको भी ये सुनकर हैरानी हुई होगी लेकिन ये सच है। आइए, बजट 2026 के इस माहौल में इतिहास के पन्ने पलटते हैं और जानते हैं कि कैसे एक विदेशी शब्द भारत की आर्थिक पहचान बन गया।

फ्रांसीसी शब्द 'बोजेट' (Bougette) की पैदाइश
'बजट' शब्द का इतिहास काफी पुराना और विदेशी है। यह मूल रूप से फ्रांसीसी शब्द 'बोजेट' (Bougette) से निकला है। प्राचीन फ्रांसीसी भाषा में 'बोजेट' का अर्थ होता था 'चमड़े का एक छोटा थैला'। दरअसल, मध्यकालीन इंग्लैंड में जब खजांची (Treasurer) सरकार के खर्चों और आमदनी का विवरण लेकर संसद पहुंचते थे, तो वे कागजात इसी तरह के चमड़े के बैग में रखे होते थे। यहीं से 'बोजेट' धीरे-धीरे बदलकर अंग्रेजी का 'बजट' बन गया।
जब पहली बार उड़ाया गया 'बजट' का मजाक
इतिहासकारों के अनुसार, इस शब्द का आधिकारिक इस्तेमाल एक मजाक या तंज के रूप में शुरू हुआ था। साल 1733 में ब्रिटेन के वित्त मंत्री रॉबर्ट वॉलपोल संसद में देश का आर्थिक लेखा-जोखा पेश करने पहुंचे। जब उन्होंने अपने चमड़े के बैग से दस्तावेज निकाले, तो विपक्षी सदस्यों ने उन पर कटाक्ष करते हुए कहा- "द बजट ओपन्ड" (यानी थैला खुल गया है)। अब उन्हें क्या पता था कि उनका यह व्यंग्य एक दिन दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं का सबसे महत्वपूर्ण शब्द बन जाएगा। हुआ भी वही और आज के समय में बजट एक ऐसा नाम बन गया है जो हर किसी की जुबान पर होता है।
भारत में ब्रिटिश विरासत: वो 'लाल सूटकेस' की कहानी
भारत में बजट की शुरुआत 7 अप्रैल 1860 को हुई, जब स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने ब्रिटिश राज के दौरान पहला बजट पेश किया। विल्सन ने भी ब्रिटिश परंपरा का पालन करते हुए चमड़े के एक लाल ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया। आजादी के बाद भी कई दशकों तक भारतीय वित्त मंत्रियों ने इस 'सूटकेस कल्चर' को बरकरार रखा। आर.के. शनमुखम चेट्टी से लेकर मनमोहन सिंह तक, हर वित्त मंत्री के हाथ में बजट के दिन एक लेदर बैग जरूर दिखता था।
2019 में जब सूटकेस की जगह 'बही-खाता' ने ली
दशकों पुरानी इस औपनिवेशिक (Colonial) पहचान को साल 2019 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने ब्रिटिश काल के ब्रीफकेस को त्याग कर लाल कपड़े में लिपटा भारतीय 'बही-खाता' पेश किया। इसके पीछे का तर्क यह था कि भारत अब पश्चिमी दासता की मानसिकता से बाहर निकलकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है।
'पेपरलेस' हुआ देश का बही-खाता
समय बदला और तकनीक ने बजट को भी नया रूप दे दिया। साल 2021 में भारत के बजटीय इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव आया जब बजट पूरी तरह डिजिटल (Paperless) हो गया। अब बजट के पन्नों की भारी-भरकम फाइलें नहीं होतीं, बल्कि वित्त मंत्री के हाथ में एक 'मेड इन इंडिया' टैबलेट होता है। हालांकि, भारतीय परंपरा को बनाए रखने के लिए इस टैबलेट को अभी भी उसी लाल रंग के कवर में रखा जाता है, जो 'बही-खाते' का अहसास दिलाता है।



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