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कौन हैं महात्मा गांधी की परपोती, जिन्हें करोड़ों की ठगी के मामले में हुई 7 साल की जेल?
Who Is Gandhi's Great-Granddaughter Ashish Lata Ramgobin: महात्मा गांधी का नाम आज भी सत्य और अहिंसा की मिसाल माना जाता है, लेकिन हाल ही में उनके परिवार से जुड़ा एक ऐसा माला सामला आया है, जिसे जान हर कोई दंग रह गया। उनकी परपोती आशीष लता रामगोबिन पर लगे धोखाधड़ी के आरोपों ने इस महान विरासत को धूमिल कर दिया है।
दक्षिण अफ्रीका की एक अदालत ने उन्हें करीब 3.22 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में 7 साल की सजा सुनाई है। यह मामला साल 2015 का है, जब लता पर दो व्यापारियों से जालसाजी कर बड़ी रकम हड़पने का आरोप लगा था। आइए जानते हैं कि कौन हैं आशीष लता और गांधी जी से उनका नाता-

कौन हैं आशीष लता रामगोबिन?
आशीष लता दक्षिण अफ्रीका स्थित एक एनजीओ "पार्टिसिपेटिव डेवलपमेंट इनिशिएटिव" की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक रही हैं। यह संगठन सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक सुधारों के लिए काम करता है। खुद को एक एक्टिविस्ट बताने वाली लता गांधीवादी सिद्धांतों, खासकर अहिंसा को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती रही हैं।
गांधी परिवार में कई सदस्य सामाजिक कार्यों से जुड़े हैं। लता के चचेरे भाई-बहन, कृति मेनन, स्वर्गीय सतीश धुपेलिया, उमा धुपेलिया-मेस्त्री और उनकी मां इला गांधी सभी मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में काम कर चुके हैं।
गांधी से लता का पारिवारिक रिश्ता
महात्मा गांधी के चार पुत्र थे: हरिलाल, मणिलाल, देवदास और रामदास। मणिलाल गांधी 1897 में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे और उन्होंने वहीं लंबे समय तक "इंडियन ओपिनियन" नामक अख़बार के संपादन का कार्य किया। उन्होंने 1927 में सुशीला मशरुवाला से विवाह किया और उनके तीन बच्चे, सीता, इला और अरुण हुए।
इन्हीं में से इला गांधी, लता की मां हैं। इला का जन्म 1940 में क्वाज़ुलु नटाल में हुआ था और वह रंगभेद के खिलाफ आंदोलन की एक प्रमुख चेहरा बनीं।
आशीष लता की मां इला गांधी रह चुकी है 4 बार सांसद
इला गांधी दक्षिण अफ्रीका की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता रही हैं। रंगभेद के खिलाफ आवाज उठाने पर 1973 में उन पर प्रतिबंध लगाया गया और उन्हें 9 वर्षों तक हाउस अरेस्ट में रखा गया।
1994 में रंगभेद की समाप्ति के बाद वे अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (ANC) से सांसद बनीं और 2003 तक इस पद पर रहीं। इसके बाद उन्होंने 'गांधी डेवलपमेंट ट्रस्ट' और 'महात्मा गांधी नमक मार्च कमेटी' जैसी संस्थाओं के जरिए अहिंसा को बढ़ावा देना शुरू किया। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
किस मामले में दोषी पाईं गईं लता?
2015 में आशीष लता रामगोबिन पर दो व्यवसायियों से 8.3 लाख डॉलर (लगभग 6 करोड़ रुपए) की धोखाधड़ी का आरोप लगा। उन्होंने कथित रूप से भारत से मेडिकल उत्पाद आयात करने और प्रॉफिट शेयरिंग के नाम पर झूठे दस्तावेज तैयार किए थे।
दक्षिण अफ्रीका के बड़े उद्योगपति एसआर महाराज से उन्होंने करीब 60 लाख रैंड (3.22 करोड़ रुपये) और एक अन्य बिजनेसमैन से 50 लाख रैंड (2.7 करोड़ रुपये) की धोखाधड़ी की।
इन्हीं में से एक मामले में कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और 7 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। गांधी के विचारों से जुड़ी विरासत की प्रतिनिधि समझी जाने वाली लता की यह सजा न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि उनके सामाजिक कामों की विश्वसनीयता के लिए भी एक बड़ा झटका है।



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