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बच्चे और स्मार्टफोन: क्या कहते हैं हैल्थ एक्स्पर्ट्स?
हाल ही में किए गए अध्ययन के अनुसार आज स्मार्टफोन बहुत से बच्चों के जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुका है। छोटी उम्र में ही बच्चे तकनीकी गैजेट्स का इस्तेमाल करने लगे हैं। इस अध्ययन में बहुत पेरेंट्स से कुछ प्रश्न पूछे गए।
उनमें से अधिकतर ने बताया कि बच्चे टेबलेट का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। और चौकाने वाली बात है कि आज 1 साल का बच्चा भी ऐसे गैजेट्स इस्तेमाल कर रहा है। इन गैजेट्स पर बिताया जाने वाला औसत समय 20 मिनट है।
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इस ट्रेंड से जहां आने वाले समय में डिजिटल साक्षरता की संभावना को बल मिलता है वहीं दूसरी ओर हैल्थ एक्स्पर्ट्स इसको लेकर चिंतित हैं क्यों कि इससे बच्चे पेरेंट्स के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाते हैं।

वे इस बात से भी चिंतित हैं कि आजकल के पेरेंट्स इन्हें बेबीसिटर्स यानि बच्चों के मन लगाने की चीज के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। जब उन्हें लगता है कि बच्चा उनके काम में बाधा करेगा तो वे बच्चों के हाथ में गैजेट्स थमा देते हैं।
इसके साथ ही कुछ पेरेंट्स सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों को चुप कराने के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। चूंकि इन गैजेट्स से बच्चों का मनोरंजन होता है इसलिए उन्हें बच्चों को गोद में लेने से छुटकारा मिलता है।
बच्चों के स्वास्थ्य विकास और ग्रोथ के लिए उनका माता-पिता के साथ बातचीत करना बेहद जरूरी है, इसलिए हैल्थ एक्स्पर्ट्स इस ट्रेंड को स्वास्थ्य के लिए सही नहीं मानते हैं। इस अध्ययन में लगभग 300 पेरेंट्स से बच्चों के स्मार्टफोन, गैजेट्स, टीवी आदि के इस्तेमाल के बारे में सवाल पूछे गए।
इस अध्ययन का निष्कर्ष निकला कि आजकल की पीढ़ी के लगभग हर बच्चे का टीवी के प्रति रुझान बढ़ता जा रहा है। और जहां तक स्मार्टफोन के इस्तेमाल का सवाल है इस अध्ययन का हिस्सा रहे 80 प्रतिशत बच्चे स्मार्टफोन और टेबलेट काम में ले रहे हैं।
और जब ये थोड़ा बड़े होते हैं तो ये विडियो गेम्स और लैपटॉप इस्तेमाल करने लग जाते हैं। आजकल के बच्चे इंटरनेट भी ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि हैल्थ एक्स्पर्ट्स के लिए एक चिंता का विषय है।



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