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जानलेवा हो सकता है नवजात शिशुओं में ब्लडप्रेशर कम होना, जानें क्या करें?
जन्म के बाद शिशुओं में लो ब्लडप्रेशर बहुत सारे कारणों के वजह से हो सकता है। ये खासकर जन्म के बाद प्रीमैच्योर शिशुओं में ज्यादा देखा जाता है। कई बार होता है कि जन्म के कुछ समय के अंतराल में शिशुओं का ब्लड प्रेशर लो हो सकता है लेकिन इसे पहचानना भी आसान नहीं हैं। लो ब्लड प्रेशर शिशुओं के लिए खतरनाक हो सकता है और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए इसके कारणों और लक्षणों को जानना बहुत जरूरी है। आइए आपको बताते हैं क्या हैं इनके लक्षण और कारण।

शिशु में लो ब्लड प्रेशर के लक्षण
अगर जन्म के बाद शिशु का ब्लड प्रेशर कम है तो डॉक्टर तुरंत शिशु का इलाज शुरु कर देता हैं, लेकिन आप भी इन लक्षणों को देख शिशु में लो ब्लडप्रेशर को भांप सकते हैं।
- शिशु का बहुत तेजी-तेजी सांस लेना।
- शिशु के हाथ, पांव, बाहों और तलवों का ठंडा होना।
- शिशु के दिल की धड़कन का बहुत तेज होना।
- शिशु के त्वचा का रंग पीला या सामान्य से अलग होना।
- शिशु को बहुत कम या बिल्कुल पेशाब नहीं होना होता है।

शिशुओं में लो ब्लड प्रेशर का कारण
- यदि प्रसव के पहले ओर बाद में अधिक खून बहता है, तो इसके कारण भी बच्चे में निम्न रक्तचाप की समस्या हो जाती है।
- जन्म के समय शिशु में कोई इंफेक्शन होने पर भी ऐसा होता है।
- मां को प्रसव से पहले दी गई दवाइयों के कारण भी ऐसा बच्चे में हो जाता है।
- प्रसव के बाद तरल पदार्थ का हद से ज्यादा बहना।
- बच्चे के लिए गर्भ के अंदर और जन्म लेने के बाद की स्थिति, वातावरण और माहौल में काफी परिवर्तन होता है, जिससे कारण भी शिशु का ब्लड प्रेशर गिर सकतता है।
- कई बार कुछ बच्चे काफी कमजोर और अंडर वेट पैदा होते हैं।
- जन्म के बाद लो ब्लड प्रेशर की समस्या उन शिशुओं में ज्यादा देखने को मिली है, जिन्हें रेस्प्रिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (Respiratory Distress Syndrome) यानी सांस लेने में दिक्कत होती है।

इलाज
- इस तरह के लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें। ऐसी स्थिति में नवजात को वैक्सीन या इंजेक्शन के जरिए अतिरिक्त तरल पदार्थ दिए जाते हैं।
- शिशु में ब्लड प्रेशर को बढ़ाने के लिए खास तरह के मशीन में रखा जाता है। इससे नवजात का रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
- खून की कमी के चलते अगर शिशु का ब्लड प्रेशर कम हुआ है तो शिशु को रक्त चढ़ाया जाता है ताकि बच्चा जल्दी सामान्य हो सके।
- डॉक्टर्स की देखरेख में रखें, ताकि अन्य संक्रमण और बीमारी से शिशु का बचाव किया जा सकें।

प्रेग्नेंसी में मां का ब्लड प्रेशर होना चाहिए सामान्य
प्रेग्नेंसी में गर्भवती को यह ध्यान रखना चाहिए कि उसका ब्लड प्रेशर सामान्य रहे। क्योंकि इस चीज का काफी असर आपके शिशु पर भी पड़ता है। अगर प्रेग्नेंसी में मां का ब्लड प्रेशर लो है तो ये बच्चे में भी जेनेटिक होने की सम्भावना बढ़ जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान लो बीपी से कई समस्याएं हो सकती हैं। यह समस्या अक्सर प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में होती है। कई बार जानकारी की कमी से महिलाएं इससे घबरा जाती हैं। इस समस्या से बचने के लिए इसके लक्षणों और बचाव को जानना जरूरी है।

SIDS से जुड़ा है शिशुओं में लो बीपी
SIDS, जिसे अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम (sudden infant death syndrome) के रूप में जाना जाता है। ये सिंड्रोम, जन्म से पूर्व जन्में बच्चों के ब्लड प्रेशर और सोने की स्थितयों से भी जुड़ा हुआ होता है। एक रिसर्च में के अनुसार मैच्योर शिशु की तुलना में प्रीमैच्योर शिशुओं के शुरुआती छह महीनों के दौरान सोते समय लो ब्लड प्रेशर की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
इसके अलावा जो प्रीमैच्योर शिशु नीचे की तरफ मुंह झुकाकर सोते है उनमें भी ब्लड प्रेशर की समस्या देखी गई हैं।
SIDS के 20 प्रतिशत मामलें प्रीमैच्योर शिशुओं में देखने को मिलें है। शोधकर्ताओं के रिपोर्ट के अनुसार सोते समय लो ब्लड प्रेशर इस घातक सिंड्रोम से जुड़ा हुआ है।



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