आयुर्वेदिक इलाज से कैसे बनें जल्‍द प्रेगनेंट

By: Gauri Shankar sharma
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आयुर्वेद के अनुसार गर्भधारण करना शुक्राणु, अंडाणु और गर्भाशय के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। पुरुष और महिला दोनों के लिए बच्चे पैदा करने का स्वास्थ्य शुक्र धातु और शरीर के उत्तकों पर निर्भर करता है।

सही चयापचय क्रिया होने पर और पाचन के सही काम करने पर पोषक पदार्थों द्वारा शरीर में तरल पदार्थ, रक्त, मसल्स, फैट, बोन मैरो और शुक्र टिश्यूज़ बनते हैं।

गर्भावस्था के पहले महीने के दौरान रखें कुछ सावधानियां : क्या करें और क्या नहीं करें

महिलाओं में, मासिक स्त्राव के दौरान शुक्र टिश्यूज़ अंडाणुओं का निर्माण करते हैं और पुरुषों में यौन उत्तेजना से वीर्य का निर्माण होता है। शुक्र धातु का स्वास्थ्य अन्य टिश्यूज़ और शरीर की पाचन क्रियाओं पर निर्भर करता है। अपनी चयापचय यानि मैटाबोलिज़्म को बढ़ाने के तीन तरीके हैं।

 गर्भधारण में परेशानियाँ

गर्भधारण में परेशानियाँ

कई शारीरिक, मानसिक और वातावरणीय कारक होते हैं जो पुरुष और महिलाओं में प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं। हम आपको बताते हैं प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक...

1. यौन अंगों का स्वास्थ्य:

1. यौन अंगों का स्वास्थ्य:

महिलाओं में गर्भाशय और पुरुषों में वीर्य का स्वस्थ होना गर्भधारण के लिए बेहद ज़रूरी है। पोषण की कमी, पाचन सही नहीं होना और शरीर में जहरीले पदार्थों का ना निकालना गर्भाशय और वीर्य के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

2. भावनात्मक जुड़ाव की कमी:

2. भावनात्मक जुड़ाव की कमी:

ऐसी व्यक्ति से सेक्स करना जिसे आप कम चाहते हैं या भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं करते, ऐसे में गर्भधारण प्रभावित होता है। इसके विपरीत ज़्यादा सेक्स करने से भी शुक्र का नुकसान होता है और नपुसंगता बढ़ती है।

3. अनियमित आहार:

3. अनियमित आहार:

ज़्यादा मसालेदार, नमक वाला और प्रिजर्वेटिव वाला खाना खाने से पित्त बढ़ता है और वीर्य का नाश होता है। 8 खादय पदार्थ जिनसे गर्भधारण के अवसर बढ़ते हैं।

4. सेक्स की इच्छा को नियमित करना:

4. सेक्स की इच्छा को नियमित करना:

लंबे समय तक सेक्स की इच्छा को रोकने से वीर्य अवरोध होता है जिससे वीर्य का सामान्य प्रवाह रुकता है और कामेच्छा में कमी होती है। 7 चीजें जो बढ़ाती हैं कामेच्छा

5. इन्फ़ैक्शन या ट्रौमा:

5. इन्फ़ैक्शन या ट्रौमा:

यदि प्रजनन के उत्तक इन्फ़ैक्शन या ट्रौमा से खराब होते हैं तो भी नपुसंगता बढ़ती है।आदते जो बना सकती हैं आपको नपुंसक

क्‍या है इलाज

क्‍या है इलाज

आयुर्वेद के इलाज से शरीर से जहरीले पदार्थ बाहर निकलते हैं और हर कोशिका को पूरा पोषण मिलता है जिससे गर्भधारण के अवसर बढ़ जाते हैं। गर्भधारण में पंचकर्म पद्धति सबसे असरकारक है।

पंचकर्म:

पंचकर्म:

इस क्रिया में जहरीले पदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं। जब शरीर डिटोक्सिफ़ाई होता है तो पाचन क्रिया बड़े स्तर पर सुधरती है और हर कोशिका को पोषण मिलता है। जब विटामिन्स, मिनरल्स, विभिन्न हार्मोन्स, एंजाइम्स और ऑक्सीज़न की पर्याप्त मात्रा के साथ इन डिटोक्सिफ़ाईड कोशिकाओं में जाते हैं तो हर कोशिका सही काम करती है, शरीर की स्व-इलाज क्रिया बढ़ती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और गर्भधारण के अवसर बढ़ जाते हैं।

अभ्यंगा:

अभ्यंगा:

यह एक चिकित्सकीय तेल की मसाज है जिससे विभिन्न दोषों का संतुलन होता है, इस तेल में कई औषधियाँ होती हैं और इलाज के चिकित्सकीय गुण होते हैं।

स्नेहपन्नम:

स्नेहपन्नम:

इस इलाज में चिकित्सकीय घी पिलाया जाता जिससे पेट की बीमारियाँ दूर होती हैं और पाचन क्रिया व शरीर का स्वास्थ्य ठीक होता है।

पोडिक्किज़ी:

पोडिक्किज़ी:

यह इलाज पावरफुल औषधियों से किया जाता है और इससे गहरा तनाव दूर होता है, रक्त संचार बढ़ता है, जहरीले पदार्थ निकलते हैं, मांसपेशियों के उत्तक मजबूत होते हैं और कफ शरीर से बाहर निकलता है। इस तरीके से शरीर से जहरीले पदार्थ पसीने के रूप में निकलते हैं और दोष दूर होते हैं।

एलाकिजी:

एलाकिजी:

यह मसाज चिकित्सकीय औषधियों और पत्तियों की होती है। एंटी-वात पौधों, जैसे एरांडा (रिकसस कम्यिस), अर्का (कैलोट्रोपीस प्रोसीरा), निरगुंडी (विटेक्स नीगुंडो), रसना (प्लुचिया लैनकोलटा), नारियल के पत्ते, नींबू और कर्कुमिन को हर्बल सामग्री के साथ फ्राई किया जाता है और कपड़े के पिंड में बांधा जाता है। इसे गरम औषधीय तेल में डुबोया जाता है और फिर शरीर पर मसाज की जाती है। यह विभिन्न प्रकार के गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस, पीठ दर्द और नरम ऊतकों की सूजन को कम करने में असरकारक है। जिस जगह इसकी मालिश की जाती है वहाँ रक्त का संचार सही होता है और पसीना आता है जिससे बेकार पदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं।

नजावरा:

नजावरा:

गर्म "नजावरा" चाँवल या पके हुये लाल चाँवल को हर्बल काढ़े या दूध के साथ रुई में निचोड़कर शरीर पर मालिश की जाती है। यह क्रिया 30 से 40 मिनट तक के जाती है जब तक की पसीना ना निकल जाये। जब चाँवल की गर्मी कम हो जाती है, तो इसे हटा दिया जाता है और गर्म तेल लगाया जाता है।

English summary

Try Ayurveda to get pregnant faster

According to Ayurveda, conception depends upon the health of the sperm, ovum, and that of the uterus.
Story first published: Monday, April 17, 2017, 12:00 [IST]
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