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गर्भधारण करने का सबसे खराब महीना है मई
आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में हम हर एक छोटी से छोटी चीजों की प्लानिंग करते हैं। ऐसे में जब बात हो बच्चे की तो हम और सचेत हो जाते हैं क्योंकि यह जीवन की सबसे बड़ी और मुश्किल प्लानिंग होती है। बच्चे को प्लान करने से पहले हम सभी फाइनेंशियल, साइकोलॉजिकल और फिजिकल हेल्थ जैसे तमाम मुद्दों पर विचार करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरे साल में मई के महीने में गर्भधारण करना बहुत बुरा माना जाता है। अध्ययनों में सामने आया है कि इस माह में कंसीव हुए बच्चों की प्री मैच्योर डिलीवरी के चांस और बढ़ जाते हैं। आइए जानें इस महीने में गर्भधारण से जुड़ी समस्याओं के बारे में।

क्या कहता है अध्ययन
नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में छपे एक जर्नल के मुताबिक मई माह में कंसीव हुए बच्चों में प्री मैच्योर डिलीवरी के चांस ज्यादा रहते हैं। इस अध्ययन के लिए 6,57,050 माओं के 1.4 मिलियन बच्चों को शामिल किया गया था जिसमें सामने आया कि मई माह में कंसीव किए हुए बच्चों की डिलीवरी में 10 प्रतिशत ज्यादा चांस प्री मैच्योर डिलीवरी के बढ़े हैं।

क्यों होता है ऐसा?
साल के शुरूआती महीने जनवरी और फरवरी के दौरान फ्लू और जलन के कैसेज ज्यादा देखने को मिलते हैं। ऐसे में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट रिसर्चर का कहना है कि इसी कारण प्री मैच्योर प्रेगनेंसी जैसे कैसेज देखने को मिलते हैं। साथ ही प्री मैच्योर होने वाले बच्चों में भी पांचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास सही रूप से नहीं हो पाता। इसी वजह से इन बच्चों को जन्म के बाद भी हफ्तों तक अस्पताल में ही रखा जाता है।

क्या कर सकते हैं आप?
सबसे पहले तो अपने डॉक्टर से चर्चा करें और उनके परामर्श के बाद ही फ्लू का वैक्सीन लगवाएं। सेंटर ऑफ डिजिज कंट्रोल CDC भी प्रेगनेंट महिला को बीमार लोगों से दूर, बराबर हाथों की सफाई और हाथों को आंख, नाक और मुंह से दूर रखने की सलाह देता है। ऐसा इसलिए ताकि गर्भवती महिला आसानी से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके।



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