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बच्चों के लिए हर 'हेल्दी' स्नैक नहीं होता सेहतमंद, खरीदते समय इन बातों पर जरूर दें ध्यान
आजकल बाजार में बच्चों के लिए तरह-तरह के पैकेज्ड स्नैक्स मिलते हैं। इनके पैकेट पर अक्सर 'मल्टीग्रेन', 'नेचुरल', 'ऑर्गेनिक', 'नो ऐडेड शुगर', 'बेक्ड', 'हाई प्रोटीन' या 'रियल फ्रूट' जैसे शब्द लिखे होते हैं। इन्हें देखकर लगता है कि यह स्नैक बच्चे की सेहत के लिए अच्छा होगा। लेकिन सिर्फ पैकेट के सामने लिखी बातों पर भरोसा करना सही नहीं है। कई बार ऐसे प्रोडक्ट्स में चीनी, नमक और रिफाइंड ऑयल काफी ज्यादा होता है। इसलिए बच्चों के लिए कोई भी पैकेज्ड स्नैक खरीदने से पहले उसका फूड लेबल और इंग्रीडिएंट्स जरूर पढ़ें। आइए, बैंगलोर स्थित एस्टर विमेन एंड चिल्ड्रेन के सीनियर कंसल्टेंट - जनरल पीडियाट्रिक्स, डॉ. राजीव एम आर से जानते हैं कि बच्चों के लिए स्नैलस खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए -

सबसे पहले सर्विंग साइज देखें
फूड लेबल पढ़ते समय सबसे पहले सर्विंग साइज पर ध्यान दें। कई बार पैकेट पर दी गई कैलोरी, चीनी, फैट और सोडियम की मात्रा पूरे पैकेट की नहीं, बल्कि सिर्फ एक सर्विंग की होती है। जबकि एक पैकेट में दो या तीन सर्विंग हो सकती हैं। अगर बच्चा पूरा पैकेट खा लेता है, तो उसके शरीर में लेबल पर लिखी मात्रा से दो या तीन गुना ज्यादा कैलोरी और चीनी पहुंच सकती है। इसलिए यह जरूर देखें कि एक पैकेट में कुल कितनी सर्विंग हैं।
इंग्रीडिएंट्स लिस्ट पढ़ना न भूलें
पैकेट के पीछे दी गई सामग्री (इंग्रीडिएंट्स) आमतौर पर ज्यादा से कम मात्रा के क्रम में लिखी जाती है। अगर सबसे पहले चीनी, रिफाइंड मैदा या ऐसी कोई चीज लिखी है, जिसे बच्चे की डाइट में कम रखना चाहिए, तो उस प्रोडक्ट को खरीदने से पहले दोबारा सोचें। इसके साथ ही, ध्यान रखें कि चीनी सिर्फ 'शुगर' नाम से ही नहीं लिखी जाती। इसे केन जूस, ब्राउन राइस सिरप, फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट और एगेव नेक्टर जैसे नामों से भी लिखा जा सकता है। कई कंपनियां अलग-अलग तरह के स्वीटनर्स मिलाती हैं, जिससे चीनी की असली मात्रा समझना मुश्किल हो जाता है।
'रियल फ्रूट' लिखा है तो भी सावधान रहें
अगर किसी स्नैक पर 'Made with Real Fruit' या 'Fruit Flavoured' लिखा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह ताजे फल जितना पौष्टिक है। ऐसे कई स्नैक्स में फ्रूट जूस कॉन्संट्रेट और कॉर्न सिरप ज्यादा होता है, जबकि फाइबर और विटामिन बहुत कम होते हैं। इसी तरह वेजिटेबल चिप्स या वेजिटेबल स्ट्रॉ स्नैक्स में भी कई बार मुख्य सामग्री आलू का स्टार्च या कॉर्न मील होती है। सब्जियों का इस्तेमाल बहुत कम मात्रा में किया जाता है। इसलिए इन्हें ताजी सब्जियों का विकल्प नहीं माना जा सकता।
सिर्फ हाई प्रोटीन देखकर न खरीदें
अगर किसी स्नैक में ओट्स, नट्स या प्रोटीन है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह पूरी तरह हेल्दी है। स्नैक खरीदते समय यह भी देखें कि उसमें चीनी, सैचुरेटेड फैट और सोडियम कितना है। कोशिश करें कि ऐसे विकल्प चुनें जिनमें फाइबर ज्यादा और चीनी कम हो।
मात्रा भी है जरूरी
सिर्फ अच्छा स्नैक चुनना ही काफी नहीं है, उसकी मात्रा भी मायने रखती है। अगर बच्चा हेल्दी माना जाने वाला पैकेज्ड स्नैक भी जरूरत से ज्यादा खा ले, तो उसकी कुल कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए बच्चे को पूरा पैकेट देने के बजाय एक छोटी कटोरी या तय मात्रा में स्नैक देना बेहतर रहता है।
समझदारी से करें चुनाव
हर प्रोसेस्ड फूड नुकसानदायक नहीं होता। जरूरी यह है कि माता-पिता पैकेट पर लिखे दावों के बजाय उसकी पूरी न्यूट्रिशन जानकारी पढ़कर फैसला लें। अलग-अलग प्रोडक्ट्स की तुलना करें और ऐसे विकल्प चुनें जिनमें कम चीनी, कम नमक और कम प्रोसेस्ड सामग्री हो। साथ ही, बच्चों की रोज की डाइट में फल, हरी सब्जियां, दही, अंडे, दालें और सही मात्रा में नट्स जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ जरूर शामिल करें। सही जानकारी के साथ चुना गया स्नैक ही बच्चे की सेहत के लिए बेहतर साबित हो सकता है।



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