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मिसकैरेज के दुख से उबरने में काम आएंगे ये टिप्स
बच्चे के जन्म लेने की खुशी हर खुशी से बढ़कर होती है। लेकिन जब इस खुशी से मिसकैरेज के कारण हम वंचित रह जाते हैं, तो परिवार व मां के मन को बहुत बड़ा आघात पहुंचता है। वैसे देखा जाए तो 10 से 20 प्रतिशत प्रेगनेंसी का अंत किसी न किसी वजह से मिसकैरेज के रूप में होता है। इन मिसकैरेज या गर्भपात के तमाम कारण होते हैं जैसे इंफेक्शन, हार्मोनल समस्या, अनुवांशिकता या फिर किसी और तरह की मेडिकल परेशानी।

एक मां के लिए गर्भपात की वजह से बच्चे के खोने के दुख से उबरना आसान नहीं होता। मां ने उस अजन्मे बच्चे को महसूस किया होता है और उससे एक खास लगावा होता है। इसी वजह से मां के दिमाग और मन पर गहरा असर पड़ता है और कई बार मां सदमे में भी चली जाती है। आइए जानें कि आखिर कैसे बच्चे को खोने के इस भावनात्मक समय में मां की मदद कर, उसे आगे बढ़ने का विश्वास दिलाया जा सकता है।
बात करना है जरूरी
गर्भपात के बाद, अकसर यही देखने व सुनने में आता है कि मां को दुखी न करने के लिए उसके सामने बच्चे की बात तक नहीं करते हैं। कुछ वक्त बीत जाने के बाद हम फिर से दूसरे बच्चे की चाह इस उम्मीद में करते हैं कि मां पिछले बच्चे का गम भूल जाएगी। जबकि विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा करना ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसा करने में हम मां को वक्त ही नहीं दे रहे हैं कि वह अपने इस दुख से उबर पाए। इसलिए जितना हो सके उनसे बात करें और उनके साथ समय बिताएं। बच्चे के चले जाने के गम से उबरने के लिए जरूरी है कि मां अपने मन की भावनाओं को दबाने के बजाय, उसे जाहिर करे। ऐसा न होने पर अजन्मे बच्चे के चले जाने का दुख मां की दिमागी सेहत पर नकारात्मक असर डालता है जिसका असर आने वाले नए बच्चे के दौरान भी दिखता है।
मिसकैरेज से ऐसे करें डील

स्वीकारे: मां होने के नाते सत्य जान लेना चाहिए कि आप अजन्मे बच्चे को खो चुकी हैं और इसके बारे में बात करना बिल्कुल भी गलत नही है। किसी भी तरह की परिस्थिति में बातचीत करना ही बेहतर विकल्प होता है।
दुख जताए: बच्चे के चले जाने के बाद दुखी होना स्वाभाविक है। मां होने के नाते आपका दुख जताना भी बहुत जरूरी है। शुरू में जब आप दुख नहीं जता पाती हैं तो, यह भावना ताउम्र आपको परेशान कर सकती है।
बातचीत करें: बच्चे के चले जाने के दुख को आप अपने करीबी या फिर अपने डॉक्टर के साथ साझा कर सकती हैं। बच्चे को खोने के बाद बहुत जरूरी है कि आप अपनों से मन की भावनाओं को जाहिर करें।
रिति रिवाज: किसी के चले जाने से जिंदगी नहीं रूकती। ऐसे में अपनी दिनचर्या को फिर से पटरी पर लाने के लिए आप चाहें तो अपने बच्चे की याद में कपड़े बांट सकती हैं, छोटे बच्चों को खाना खिला सकती हैं ताकि आपके मन में संतोष हो सके कि आपने अपने बच्चे के लिए कुछ किया।



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