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डिनर और रात में लेने वाले स्नैक्स से हो सकती है बेडवेटिंग
अगर आप के बच्चे हैं, जो बेडवेटिंग, यानी रात को बिस्तर गीला करते हैं, तो फिर आपने भोजन के जरिए इससे छुटकारा पाने की अफवाहें खूब सुनी होगी। जैसे शाम 6 बजे के बाद तरल पदार्थ कम दें, ऑरेंज जूस न दें, मसालेदार भोजन से दूर रखें वगैरह-वगैरह। आपने भी अपने बच्चे के बेडवेटिंग की परेशानी को दूर करने के लिए ये सारी कोशिशें की होंगी।
पर ऐसा करते समय ध्यान रखें कि भोजन में अनावश्यक परिवर्तन से बिस्तर गीला करने की समस्या दूर नहीं होती है। इसके उलट यह आप और आपके बच्चे को पहले से अधिक नाखुश और उदास कर सकता है।
बेडवेटिंग को नाक्टर्नल एन्युरेसिस भी कहते हैं। जब भी इसके लिए किसी विशेष भोजन को जिम्मेदार ठहराया जाता है, तो डॉक्टर भी चौंक जाते हैं। क्योंकि इसके पक्ष में ज्यादा प्रमाण उपलब्ध नहीं है और ज्यादातर बातें सिर्फ काल्पनिक हैं।

मसालेदार भोजन और बेडवेटिंग: मिथक
क्या जब से आप ने सुना है कि मसालेदार भोजन से बेडवेटिंग की समस्या होती है, तब से आपके यहां मसालेदार भोजन बनना गुजरे समय की बात हो गई है? अगर वाकई ऐसा है तो फिर आप इस मिथक से बाहर आइए। जानकार मानतें हैं कि मसालेदार भोजन से बेडवेटिंग होने का कोई प्रमाण नहीं है। यह मिथक इस अवधारणा पर आधारित है कि मसालेदार भोजन से ब्लैडर में जलन पैदा होती है। डॉक्टर भी ऐसे लोगों को मसालेदार भोजन से दूर रहने की सलाह देते हैं, जिनके यूरीनरी में समस्या होती है। लेकिन शोध से पता चलता है कि मसालेदार भोजन और बेडवेटिंग में कोई संबंध नहीं है।

सिट्रस और बेडवेटिंग: मिथक
ऐसा कहा जाता है कि मसालेदार भोजन की तरह ही सिट्रस फ्रूट जैसे संतरा और नींबू भी अपने खट्टेपन के कारण ब्लैडर में जलन पैदा करते हैं। ऐसे में आप सोचते हैं कि बच्चों को संतरे के जूस और नींबू पानी से दूर रख कर उन्हें बेडवेटिंग से छुटकारा दिलाया जा सकता है। लेकिन गर्म और मसालेदार भोजन की तरह ही मेडिकल रिचर्स द्वारा सिट्रस फ्रूट और बेडवेटिंग में कोई संबंध नहीं दर्शाया गया है। हां, जिन बच्चों में सिट्रस से एलर्जी होती है, उनमें यह बेडवेटिंग का कारण बन सकता है।

कैफीन और बेडवेटिंग: तथ्य
कैफीन डाइयूरेटिक की तरह काम करता है। यानी यह ब्लैडर को ज्यादा यूरीन उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करता है। इसलिए बेडवेटिंग की समस्या से निजात दिलाने के लिए बहुत सारे जानकार दोपहर बाद और शाम को कैफीन से बचने की सलाह देते हैं।

सोने से पहले पानी पीना और बेडवेटिंग: तथ्य
अगर आपका बच्चा रात को बिस्तर गीला करता है, तो ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं कि ब्लैडर में बहुत ज्यादा पानी है। भले ही एक व्यस्क सोने से पहले कितना भी पानी क्यों न पी ले, वह ब्लैडर को खाली करने के लिए जग जाता है, न कि बिस्तर गीला करता है। फिर भी, अगर बच्चे सोने से पहले कम पानी पीएंगे तो ब्लैडर को भरने में समय लगेगा। ऐसे में बेडवेटिंग होने से पहले आपके बच्चे को अतिरिक्त समय मिल जाएगा। इससे आपके बच्चे बेडवेटिंग से पहले ही जग जाएंगे।
बेडवेटिंग के लिए जिम्मेदार भोजन का पता लगाने के लिए टिप्स
- आखिर किस तरह के खाने से बेडवेटिंग की समस्या होती है? अगर इस बारे में जानकारी जुटा ली जाए तो बहुत हद तक बेडवेटिंग की समस्या से निजात पाया जा सकता है।
- जानकार बेडवेटिंग जर्नल रखने की सलाह देते हैं। इसमें बेडवेटिंग की घटना को दर्ज कर एक पैटर्न को पहचाना जाता है।
- कुछ बच्चे खुद यह जानने में रुचि दिखाते हैं कि किसी खास गतिविधि या भोजन का बेडवेटिंग से क्या संबंध है? बच्चों द्वारा अपने बेडवेटिंग के कारणों का खुद पता लगाने के दो फायदे हैं-
- इससे उनमें बेडवेटिंग पर नियंत्रण पाने की समझ विकसित होती है। साथ ही इससे छुटकारा पाने के लिए उन्हें जिम्मेदार भी बनाता है।
- अगर वह किसी ऐसे भोजन की पहचान करता है, जो बेडवेटिंग को रोकता है, तो उसे खाने से फायदा पहुंचेगा। वहीं जिस भोजन से बेडवेटिंग होती है, उससे दूरी बनाना भी कारगर साबित होता है।



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