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ऐश्वर्या राय को मिला ओवरप्रोटेक्टिव मां होने का टैग, पब्लिक प्लेस में बच्चों के साथ ऐसे करें बिहेव

बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन अक्सर पब्लिक प्लेस पर अपनी लाडली का हाथ पकड़ते हुए स्पॉट की जाती है। जिसके लिए वो कई बार ट्रोल भी हुई हैं। हाल ही में, ऐश्वर्या राय अपनी बेटी आराध्या और पति अभिषेक बच्चन के साथ चेन्नई से फिल्म "पोन्नियिन सेलवन: 1" की सफलता का जश्न मनाकर मुंबई पहुंची तो एक बार फिर एयरपोर्ट पर आराध्या का हाथ पकड़े नजर आई। जिसके बाद लोगों ने उन्हें "ओवरप्रोटेक्टिव" होने का टैग दिया। और सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल भी किया।
ऐश्वर्या राय बच्चन के वीडियो पर कई यूजर्स ने अपनी टिप्पणी दी है। एक ने कमेंट करते हुए लिखा कि, "अपनी बेटी को फिर से पकड़ है, अब वो छोटी बच्ची नहीं हैं।" एक और ने अपनी टिप्पणी दी और लिखा, "क्या आपकी बेटी इतनी बड़ी नहीं है कि वह अकेले चल सके?"
ऐश्वर्या राय बच्चन के ऊपर ओवरप्रोटेक्टिव पेरेट्स का टैग लगने के बाद कई पैरेट्स के मन में ये सवाल आ रहा होगा कि बिना ओवर प्रोटेक्टिव रहकर भी वो अपने बच्चे का ध्यान पब्लिक प्लेस पर कैसे रख सकते हैं। इन सवालों का जवाब जानने के लिए आखिरी तक ये आर्टिक जरूर पढ़े।

क्या पब्लिक प्लेस में बड़े बच्चे का हाथ पकड़ना सही है?
पिछले कुछ सालों में बच्चों के पालन-पोषण की शैली में काफी बदल आ गया है। जिसके बाद यह तय करना मुश्किल होता जा रहा है कि कब अपने बच्चे की मदद करनी चाहिए, और कब अपने कदम पीछे हटाकर उन्हें अपना अनुभव करने देना चाहिए। हर माता-पिता अपने बच्चों की लाइफ को आसान बनाना चाहते हैं और उन्हें हर मुश्किल से बचाना चाहते हैं, लेकिन सही समय पर उनके स्वतंत्र होने के लिए संघर्ष या असफलता का खतरा होना भी जरूरी है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि दो साल से कम उम्र का बच्चा आजादी के लिए तरसता है, उसकी पसंद और नापसंद और राय होती है, और उसके लिए उसे महत्व दिया जाना चाहिए और उसका सम्मान भी करना चाहिए।

ओवरप्रोटेक्टिव पैरेंट्स कैसे करें व्यवहार?
अध्ययनों से पता चलता है कि बच्चों के मुद्दों और बातों में ज्यादा शामिल और ओवर प्रोटैक्टिव माता-पिता वाले बच्चों में ज्यादा आत्मविश्वास, बेहतर ग्रेड और अच्छा व्यवहार होता है। रिसर्च के मुताबिक जिन बच्चों के माता-पिता उनके हर काम में इन्वॉल्व होते हैं, उन बच्चों के स्कूल में ग्रेड काफी अच्छा आते हैं।

ओवरप्रोटेक्टिव पैरेंट्स के लक्षण
- बच्चों के हर चीज पर रखते हैं अपना नियंत्रण
- बच्चें की असफल होने का डर
- बच्चे के किसी चीज में फेल होने पर ओवर रिएक्ट करना
- बच्चे को हर वक्त चोट लगने का डर
- बच्चों का उपलब्धियों के बारे में ज्यादा सोचना
- अपने बच्चों को घर का पता और फोन नंबर जरूर याद करवाएं
- अपने बच्चे को अजनबियों से बात न करने की सलाह जरूर दें।
- अपने बच्चों को हमेशा अपनी आंखों के सामने रखें।
- हमेशा किसी बड़े की मौजूदगी में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
- कोशिश करें की आप ज्यादातर अपने बच्चे के साथ ट्रेवल करें।

कैसे करें बच्चों की सुरक्षा?
बच्चों की सुरक्षा माता-पिता की पहली प्राथमिकता है, बच्चों को सुरक्षित करने की जरुरत होती है। चइल्ड स्पेशलिस्ट के मुताबिक अगर बच्चे की सुरक्षा और भलाई खतरे में है तो माता-पिता के लिए उस मुद्दे में हस्तक्षेप करना जरूरी होता है। बच्चों को यह बताना भी अच्छी बात है कि आप अपने बच्चे के साथ बिना किसी शर्त उनकी मदद के लिए हमेशा उनके साथ मौजूद है। आपकी सिर्फ ये बात आपके बच्चों को एक सुरक्षा की भावना देता है। और बच्चे में निर्णय लेने की शक्ति को भी बढ़ावा देता है।




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