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H3N2 Influenza: वे उपाय जो बच्चों को बचा सकते है इन्फ्लूएंजा के कहर से
देशभर में एच3एन2 (H3N2) वायरस का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि अस्पताल मरीजों से भरे पड़े है। ये वायरस सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को अपनी चपेट में ले रहा है। यानि पहले जहां बच्चों को चार से पांच दिनों तक सर्दी-जुकाम बुखार होता था। अब वह बढ़कर करीब दो हफ्ते तक होता जा रहा है। दरअसल बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, ऐसे में ये वायरस बच्चों को ज्यादा इफेक्ट कर रहा है। हालात ये है कि गंभीर स्थिति में बच्चों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ रहा है। हालांकि, एच3एन2 से बचाव के लिए केन्द्र सरकार की ओर से गाइडलाईन जारी की जा रही हैं। लेकिन बच्चों की ऐसी हालत देखकर पेरेंटस की टेंशन बढ़ गई है। हालांकि, बच्चों में H3N2 इन्फ्लूएंजा के लक्षण भी ठीक वैसे ही है जैसे कोरोना में नजर आते है। ऐसे में ये जरूरी है कि इस वायरस की सही समय पर पहचान कर बच्चों को इससे बचाने के लिए आवश्यक सावधानी बरती जाए। यहां हम आपको बच्चों में H3N2 इन्फ्लूएंजा के लक्षण और उससे बचाव के उपयोगी टिप्स बताने जा रहे है।

कैसे फैलता है इन्फ्लूएंजा
इन्फ्लूएंजा से इंफेक्टेड व्यक्ति जब खांसता या छींकता है तो उसके ड्रॉपलेट हवा में एक मीटर तक फैल सकते हैं और जब कोई दूसरा व्यक्ति सांस लेता है तो ये ड्रॉपलेट दूसरे व्यक्ति की बॉडी में चले जाते हैं और उसे इंफेक्टेड कर देते हैं। ये प्रक्रिया कोरोना की तरह ही है। यानि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि H3N2 इन्फ्लूएंजा हवा के जरिए भी फैल सकता है। खतरा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि बच्चों में इसके अलग लक्षण है और बड़ों में अलग। और चूंकि बच्चों की इम्यूनिटी पॉवर वीक होती है ऐसे में ये वायरस उनके लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
बच्चों में H3N2 इन्फ्लूएंजा के लक्षण
-सांस लेने में दिक्कत
- नाक से पानी बहना
- 100 डिग्री से ज्यादा बुखार आना
- होंठ और चेहरा नीला पड़ना
- सीने में दर्द
- मसल्स में दर्द
- डिहाइड्रेशन की समस्या
- रिकवर होने के बाद दोबारा बुखार और खांसी होना
- कोई पुरानी बीमारी फिर से उबरना
बच्चों को इन्फ्लूएंजा से बचाने के लिए क्या करें:-
- इन्फ्लूएंजा से बचाने के लिए बच्चे को घर से बाहर निकलने पर फेस मास्क पहनाए।
- बच्चे को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें।
- बच्चों के हाथों को नियमित रूप से पानी और साबुन से धुलाते रहें।
- बच्चे को बार बार नाक और मुंह छूने के लिए मना करें।
- खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को अच्छी तरह से कवर करें।
- बच्चे में वायरस के लक्षण नजर आए तो उसे स्कूल ना भेजें।
- बच्चे को हाइड्रेट रखने के लिए उसे भरपूर पानी के अलावा फ्रूट जूस या अन्य पेय पदार्थ देते रहें।
- ऐसे बच्चों से दूर रखें जिन्हें पहले से जुखाम और खांसी हो।
- बच्चे को ठंडा पानी ना पिलाए, इसकी बजाय उसे गुनगुना पानी दें।
- बच्चे को प्रदूषण वाली जगहों पर ना जाने दें।
- बच्चे को इम्यूनिटी बढ़ाने वाली डाइट दें।
- बच्चे को बाहर का नहीं, बल्कि घर का बना फ्रेश खाना खिलाए।
- गंभीर स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
H3N2 वायरस H1N1 वायरस का म्यूटेशन है। जो इसी समय पर हर साल फैलता है। डॉक्टर को कहना हैं कि इसको लेकर डरने की कोई जरूरत नहीं है। बस सावधान रहने की आवश्यकता है। इससे बचाव के लिए फ्लू का जो टीका लगाया जाता है, वही इसमें कारगर है।



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