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Cyber Bullying: भारत में 85 फीसदी बच्चे साइबरबुलिंग का शिकार, कहीं आपका बच्चा भी तो विक्टिम नहीं !
भारत में साइबरबुलिंग की पीड़ा का अनुभव करने वाले बच्चों का अनुपात लगभग 85 फीसदी है और यही अनुपात उन पर भी लागू होता है जो इसे करते हैं। ये रेशों जो ग्लोबल औसत से लगभग दोगुना है। ये रिपोर्ट भारत में साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee द्वारा किये गये नए अध्ययन पर तैयार की गई है।
साइबरबुलिंग को कभी-कभी "कुछ ऑनलाइन कमेंट को बोल कर छोड़ दिया जाता है। यही दृष्टिकोण समस्या को पैदा करने के लिए काफी होता है। साइबरबुलिंग के शिकार लोगों के लिए, ये एक भयावह, हानिकारक, दखल देने वाला और बहुत ही रियल हो सकता है।

साइबरबुलिंग क्या है?
ऑनलाइन होने वाली बदमाशी, आपके कंप्यूटर, टैबलेट और मोबाइल फोन के द्वारा होने वाली छेड़छाड़ साइबरबुलिंग कहलाती है। साइबरबुलिंग सोशल मीडिया, फ़ोरम या गेमिंग के जरीये ऑनलाइन की जा सकती है जहां पर यूजर कंटेंट पढ़ सकते हैं, उसके साथ बातचीत कर सकते हैं या उसका कंटेंट को एक दूसरे को दे सकते हैं। यह एसएमएस, टेक्स्ट और एप्लिकेशन के जरिए भी किया जा सकता है। इसके साथ ही निगेटिव, आहत करने वाली या दुर्भावनापूर्ण कंटेंट भेजना, पोस्ट करना या ब्रॉडकास्ट करना साइबर धमकी ही माना जाता है। इसमें किसी व्यक्ति के बारे में उसकी पर्सनल जानकारी को दूसरे के साथ शेयर करना या ऑनलाइन अपलोड करना भी शामिल हो सकता है जो शर्मिंदगी या उसके अपमान का कारण बनता है। साइबरबुलिंग कभी-कभी अवैध या आपराधिक कार्रवाई में बदल जाती है।

इन जगहों से होती है बार-बार साइबरबुलिंग
- गेमिंग कम्युनिटी ऑलाइन
- सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि )
- टेबलेट और मोबाइल फ़ोन के जरीये मैसेज भेजने वाले ऐप्स
- ऑनलाइन कम्युनिकेशन बोर्ड, चैट रूम
- ऑनलाइन चैटिंग, डायरेक्ट मैसेजिंग व इंस्टेंट मैसेजिंग
- ईमेल के जरीये

आइये जानते हैं साइबर बुलिंग कितनी तरह की होती है-
इंटरनेट पर हर वक्त सर्फिंग करते हैं और बहुत से लोग ये जानते भी हैं साइबर बुलिंग क्या होती है या कम से कम, इसके बारे में सुना होता लेकिन हर कोई इसे समझ नहीं पाता है कि ये किस तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। कभी-कभी, ये इतनी चालाकी से हो सकता है कि हमें इसका एहसास भी नहीं हो सकता है। साइबरबुलिंग के कुछ प्रकार यहां दिए गए हैं:
ट्रोलिंग
‘ट्विटर पर ट्रोलिंग' ये आम शब्द लगता है लेकिन ऑनलाइन आपत्तिजनक कमेंट कर दूसरों को परेशान करने की चाहत रखने वाला ट्रोलिंग में शामिल हो रहा होता है। हालांकि ट्रोलिंग को साइबर धमकी का एक रूप नहीं माना जा सकता है, ये दुर्भावनापूर्ण और और नफरत के इरादे से किया जा सकता है। इन धमकियों का आमतौर पर अपने पीड़ितों से बहुत कम व्यक्तिगत संबंध होता है।
साइबर हरासमेंट
हरासमेंट या त्पीड़न एक बड़ी कड़ी के रूप में है जिसके अंतर्गत कई प्रकार की साइबर धमकी आती है, लेकिन ये आम तौर पर किसी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से ऑनलाइन भेजी गई संदेश के रूम में धमकी होती है जो पुख्ता इरादे से आहत करने के लिए भेज जाता है।
आउटिंग/डॉक्सिंग
किसी शख्स को शर्मिंदा करने या उसका अपमान करने के इरादे से उस व्यक्ति की बिना परमीशन के उसकी निजी जानकारी या सेंसेटिव बात को सार्वजनिक करने के काम को आउटिंग कहा जाता है, जिसे डॉक्सिंग भी कहते हैं। इसमें ऑनलाइन समूह में फेमस लोगों की पर्सनल फोटोज या कागजात को शेयर करना और उनको ऑनलाइन अपलोड करना शामिल हो सकता है।
ट्रिकरी
धोखे के साथ ट्रिकरी, आउटिंग के समान है। ऐसी परिस्थिति में धमकाने वाला अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है। एक बार जब धमकाने वाले को टार्गेट का विश्वास हो जाता है, तो वे पीड़ित के रहस्यों और व्यक्तिगत जानकारी के बारे में कई लोगो से उसकी जानकारी शेयर करता जाता है।
फ्लैमिंग
जब कोई इस तरह की ऑनलाइनबुलिंग का निशाना बनता है, तो बुलिंग करने वाले इसके बारे में पोस्ट करते हैं या सीधे मैसेज उन्हें भेजते हैं। ट्रोलिंग के समान, फ्लेमिंग में आमतौर पर एक ऑनलाइन विवाद को भड़काने के प्रयास में लक्ष्य को पूरा किया जाता है, जिसमें किसी विवाद को खड़ा किया जाता है।

अपने बच्चे के लिए साइबरबुलिंग को कैसे रोकें
ऐसे कई तरीके हैं जिससे आप और आपका बच्चा साइबरबुलिंग से अपने आप को टार्गेट बनने की संभावना को रोक सकता है। इस बात पर जोर दें कि आपका बच्चा ऑनलाइन कभी किसी को अपने घर के बारें में, फैमली, अपना पासवर्ड बताने से पहरेज करें, यहां तक कि अपने सबसे अच्छे दोस्त को भी घर से जुड़ी जरूरी और अहम बातें ना शेयर करें। ये याद रखना जरूरी है कि दोस्ती हमेशा नहीं रह सकती।
उन्हें ये समझएं ऑनलाइन हर कोई वैसा नहीं है जो वह सामने से दिखता है। हो सकता है कि अकाउंटे के पीछे का व्यक्ति किशोर लड़की न हो, भले ही प्रोफ़ाइल फ़ोटो में एक फोटो लड़की की लगा रखी हो। कोई युवा लड़की बनकर कोई और यंगस्टर्स का डेटा जमा कर रहा हो।
अपने बच्चे के साथ, प्रत्येक अकाउंट को चेक करें और प्राइवेसी सेटिंंग को हाई लेवल पर ही रखने में उनकी हेल्प करें साथ ही उनको सामझाते भी रहें। ऑनलाइन सोशल साइट पर वो क्या करते हैं, किसके साथ बातचीत होती है इसका पूरी जानकारी रखना आपकी जिम्मेदारी है।
आपको अपने बच्चे को ये भी बताना चाहिए कि ऑनलाइन कैसे बिहेव करें। अगर वे सोशल मीडिया और अन्य इंटरनेट डिवाइस का सही से यूज नहीं कर पाते है तो उनको सिखाएं इसके साथ ही उनको अपना डर भी बनाकर रखे, जिससे वो चीजे शेयर करते रहें।
यदि आपके बच्चे साइबरबुलिंग के शिकार हैं तो उनको इस बारें मे बताएं कि अगर आपके साथ कुछ ऐसा हो रहा है तो वो तुरंत आपसे शेयर करें।

अगर आपका बच्चा साइबरबुलिंग का शिकार है तो क्या करें?
आपके बच्चे को हर समय साइबरबुलिंग की रिपोर्ट करने के बारें में पता होना चाहिए। ये न केवल आपको स्थिति के बारे में बताता है बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इंटरनेट सेवा प्रदाता और अन्य पार्टियों को भी जरूरत के हिसाब से इन्फॉर्मेंशन देता है।
हर पुलिस स्टेशन में अब एक साइबर क्राइम यूनिट है जो पूरी तरह से इंटरनेट क्रिमिनल को पकड़ने और उन पर मुकदमा चलाने पर केंद्रित है। अपमानजनक, या अपमानजनक बयान ऑनलाइन प्रकाशित करते हैं या आपके खाते में हैक करते हैं और आपकी पहचान चुराते हैं वो भी साइबर क्रिमिनल होते हैं। अगर आप भी साइबर बुलिंग का शिकार हो रहे है तो साइबर क्राइम यूनिट में जाकर इसकी रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं।

अपनी शिकायत यहां दर्ज करवा सकते हैं
साइबरबुलिंग के शिकार अपनी शिकायत वेबसाइट www.cybercrime.gov.in या हेल्पलाइन नंबर 155260 . के माध्यम से कर सकते है। जहा पर आपको सरकार के द्वारा पूरी मदद की जाती है।



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