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जानिए, डिलिवरी के बाद भी क्यों सुरक्षित रखी जाती है, शिशु का गर्भनाल
इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे कि कैसे प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भनाल के माध्यम से मां अपने बच्चों से जुड़ी होती है
मां बनना किसी भी महिला के लिए काफी सुखद और रोमांचक एहसास होता है। एक मां अपने बच्चे को अपनी जान से ज्यादा प्यार करती है। अपने बच्चे की हर तकलीफ को सिर्फ एक मां ही समझ सकती है। लेकिन क्या आपको पता है कि जब आपका बच्चा गर्भ में था तो 9 महीने तक उसके जीवन की रक्षा करने में आपके साथ-साथ गर्भनाल का क्या महत्व था और क्या आप अपने बच्चे की गर्भनाल के बारे में जानती है। अगर नहीं तो चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल के जरिए बताते हैं कि किस तरह आप गर्भनाल कटने के बाद शुरू के दिनों में इसकी देखभाल तबतक करें जबतक ये खुद सूख कर न गिर जाएँ !

1- क्या है गर्भनाल
गर्भनाल महिला के ही शरीर का ही अभिन्न अंग होता है, जो गर्भावस्था के दौरान बच्चे को सुरक्षा और पोषण देने का काम करता है। और बच्चा इसी के सहारे मां के गर्भ में जीवित रहता है। गर्भवती महिला इसी नाल के माध्यम से ही अपने बच्चे से जुड़ी होती है.

2- गर्भनाल क्यों है महत्वपूर्ण
गर्भनाल कई तरीकों से बच्चे के लिए महत्वपूर्ण होती है। बच्चे के कुल वजन का छठा हिस्सा इसी गर्भनाल का होता है। गर्भनाल ही बच्चे के विकास को प्रेरित करती है। सुरक्षा के साथ-साथ पोषण देने का भी काम गर्भनाल का ही होता है। गर्भनाल बच्चे को कई तरह के संक्रमण से भी सुरक्षित रखने का काम करती है । इसके साथ ही गर्भनाल शरीर में लैक्टोजन के बनने में मदद करती है, जो मां के शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया को प्रेरित करता है। इसलिए गर्भनाल मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

3- क्यों सुरक्षित रखी जाती है गर्भनाल
अब तो बच्चे की गर्भनाल को सहेजकर रखा जाने लगा है । क्योंकि इससे बच्चे की अनुवांशिक बीमारियों या फिर किसी भी मेडिकल केस हिस्ट्री को समझने में मदद मिलती है जिससे बच्चे को बेहतर और सटीक इलाज मिल पाता है.

4- कटने के बाद कैसे रखे गर्भनाल का ख्याल
गर्भावस्था के अंत में इस गर्भनाल को दोनों माँ और शिशु के छोरों से काट दिया जाता है। जब इसे शिशु के छोर से काटा जाता है, तो 2 से 3 सेंटीमीटर तक की छोटी सी खूंटी यानि गर्भनाल के स्टंप को बच्चे के पेट पर छोड़ दिया जाता है। जिसके बाद इस गर्भनाल के स्टंप का ध्यान इसके सूखने तक रखना होता है क्योंकि इस गर्भनाल के स्टंप में कोई भी नस नहीं होती इसलिए यह आपके शिशु को पीड़ा नहीं पहुँचाती है

5- सूखने तक स्टंप यानि खूंटी को ऐसे बचाएँ
सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि, स्टंप के आसपास की जगह साफ और सूखी होनी चाहिए। ऐसा ना करने से संक्रमण हो सकता हैं। डाईपर को सही तरह से पहनाएं जिससे कि वह स्टंप से दूर रहे। गर्भ नाल के स्टंप को हवा के साथ संपर्क में रखें। गर्भनाल के गिरने तक शिशु को टब में नहलाने से परहेज रखें।

6- गर्भनाल के स्टंप के साथ ना करें छेड़खानी
गर्भनाल के स्टंप के साथ आपको छेड़खानी करने से बचना चाहिए जैसे खुद खींचकर गर्भ नाल के स्टंप को उतारने की कोशिश ना करें। उसे प्राकृतिक रूप से गिरने दे। खूंटी के गिरने से हो सकता है कि थोड़ा खून या पस निकले लेकिन आर घबराएँ नहीं क्योंकि ऐसा होना आम बात है इसलिए उसे साफ कपड़े से उसे पोंछ दे।

7- कब तक निकलती है गर्भनाल की खूंटी ?
पहले दिन गर्भनाल सफेद और लसदार दिखाई देती हैं। यह समय के साथ सूखकर नीले रंग की हो जाती हैं और फिर काले रंग में बदल जाती हैं। ज्यादातर इसे झड़ने में कम से कम 2 हफ्ते लगते हैं, लेकिन तीन हफ्तों के बाद गर्भनाल स्टंप पूरी तरह से गिर जाती हैं। लेकिन आप उस भाग को पूरी तरह से ठीक करने के लिए उसे हमेशा साफ रखें।

8- गर्भनाल स्टंप में परेशानी होने पर क्या करें।
अगर गर्भनाल के स्टंप में किसी तरह की परेशानी आ रही है । जैसे गर्भ नाल स्टंप के तल पर आये पस से बदबू आ रहीं हो, या फिर गर्भ नाल स्टंप के पास से खून की बूँदें लगातार बह रही हो, गर्भ नाल स्टंप का तल लाल और सूजा हुआ लगे, आपका शिशु गर्भ नाल स्टंप पर हाथ लगाने से रोने लगता है, तो आप अपने बच्चे को तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।



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