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गर्भवस्था के समय चाय या कॉफ़ी पीना सही है या नहीं?
आज इस आर्टिकल के जरिये हम आपको इसी सवाल का जवाब देने जा रहें हैं। गर्भवती महिलाएं जो कुछ भी खाती या पीती हैं वह गर्भनाल के जरिये उनके अजन्मे बच्चे तक भी पहुचता है। गर्भनाल बच्चे तक भोजन और पोषक तत्व पहुचता है, साथ ही यह बच्चे के खून में किसी भी तरह के विषयले पदार्थ को पहुँचने से भी रोकता है।
हालांकि यह विषयले पदार्थों से इतना भी बचाव नहीं कर पाता है कि माँ कुछ खाए और बच्चे तक ना पहुंचे। अब बात करते हैं चाय या कॉफ़ी की। जी हाँ चाय और कॉफ़ी दोनों ही गर्भवस्था के वक़्त ली जाएँ तो यह बच्चे के लिए हनिकारक साबित हो सकती है। चलिए जानते हैं कॉफ़ी पीने से होने वाले नुकसानों के बारे में।

कितनी कॉफ़ी पीनी चाहिए
आपको एक दिन में 200 मिलीग्राम से अधिक कॉफ़ी नहीं पीनी चाहिए। इसका मतलब है दो मग इन्स्टन्ट कॉफ़ी के और एक मग ब्रू कॉफी का नहीं पीना चाहिए। अगर आपको कॉफ़ी पीनी है तो आप बहुत हल्की कॉफ़ी पीयें। और सबसे अच्छा है अगर आप गर्भवस्था के समय कॉफी से दूर ही रहें।
कितने मिली लीटर कॉफी
जितना हो सके पाउडर कॉफी, फिल्टर कॉफी, एस्प्रेसो, से बचे क्योंकि इसमें बहुत ज्यादा कैफीन होता है। हलकी कॉफी पीयें जैसे 200 मिलीलीटर कप में। बड़ा कप कॉफ़ी पीने से आप कैफीन ज्यादा लेंगे जिससे खतरा भी ज्यादा हो सकता है।

गर्भपात और जन्म के समय शिशु का कम वजन
रोज़ाना 200 मिलीग्राम से अधिक कॉफी पीने से गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसके आलावा बच्चे के वजन कम होने की परेशानी भी हो सकती है। इसका मतलब है कि जन्म के समय बच्चे का वजन अगर कम था तो वह जब बड़ा होगा तो उसके बहुत सारी बिमारियों का सामना करना पड़ सकता है।
कॉफी में मौजूत कैफीन भ्रूण पर असर डालता है
भ्रूण पर कॉफी के कई हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं, क्योंकि कैफीन प्लासेंटल मेम्ब्रेन के जरिये बच्चे के ब्लड में जा सकता है। इसलिए आपको गर्भवस्था के समय कॉफ़ी से दूर रहना चाहिए।

आप हलकी चाय पी सकती हैं
गर्भावस्था के दौरान आप कॉफ़ी के बदले चाय पी सकती हैं क्योंकि यह कॉफ़ी से ज्यादा सुरक्षित है। हलकी चाय में दूध डाल कर पी सकते हैं और हाँ ब्लैक टी ना पीयें। साथ ही ग्रीन टी भी ना पीयें इससे गर्भपात हो सकता है।



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