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प्रेग्नेंसी में मां से बच्चे को हो सकते हैं ये इंफेक्शन, अजन्में बच्चें के लिए है कितने खतरनाक?
प्रेग्नेंसी हर महिला के लिए नाजुक दौर होता है चूंकि इस दौरान महिला का इम्यून सिस्टम अधिक सेंसेटिव हो जाता है तो ऐसे में कई तरह के इंफेक्शन होने का डर रहता है। प्रेग्नेंसी में गर्भवती को इंफेक्शन से इसलिए भी बचना चाहिए क्योंकि क्योंकि अधिकतर संक्रमण मां से गर्भस्थ शिशु को भी प्रभावित करते हैं। जिसकी वजह से न सिर्फ मां बल्कि शिशु की सेहत पर भी खतरा मंडराता रहता है।
ये संक्रमण कई तरह से अजन्में बच्चें को नुकसान पहुंचा सकता है जैसे कि प्लेसेंटा के ज़रिए शिशु के जन्म के बाद स्तनपान के ज़रिए भी मां से होते हुए शिशु तक संक्रमण पहुंच सकता है। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको ऐसे ही कुछ संक्रमणों के बारे में बता रहे हैं, जो प्रेग्नेंसी पीरियड में महिला से गर्भस्थ शिशु को हो सकते हैं-

रूबेला (Rubella)
रूबेला जिसे जर्मन खसरा भी कहा जाता है, मां से बच्च को प्रभावित कर सकता है। अगर प्रेग्नेंसी पीरियड में महिला रूबेला से संक्रमित होती है, खासकर पहली तिमाही में, तो यह जन्मजात रूबेला सिंड्रोम का कारण बन सकता है। इससे बच्चे को हार्ट डिफेक्ट, विकास संबंधी देरी और बहरापन आदि हो सकता है। रूबेला एक इंफेक्शन है, जो श्वसन मार्ग से फैलता है और नाक, गले और स्थानीय लिम्फ नोड्स में बढ़ता है। इसलिए, रूबेला को रोकने टीकाकरण करवाना बेहद ही आवश्यक है।
टोक्सोप्लाज़मोसिस (Toxoplasmosis)
टोक्सोप्लाज़मोसिस एक ऐसा इंफेक्शन है, जो टोक्सोप्लाज़मा गोंडी नामक परजीवी के कारण होता है। यह इंफेक्शन आमतौर पर अधपके मीट, दूषित भोजन या बिल्ली के मल के माध्यम से हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान यह परजीवी मां से उसके गर्भस्थ शिशु में जा सकता है। इससे बच्चे में न्यूरोलॉजिकल और आंखों को नुकसान हो सकता है। इस संक्रमण को रोकने के लिए आपको मीट को अच्छी तरह से पकाना चाहिए। इसके अलावा, फलों और सब्जियों को धोने, मिट्टी या बिल्ली के मल को संभालने के दौरान दस्ताने पहनने की सलाह दी जाती है। प्रेग्नेंसी में ऐसे काम करने से बचें और परिवार के किसी अन्य सदस्य की मदद लें।
सिफलिस (Syphilis)
सिफलिस यौन संचारित संक्रमण है, जो ट्रेपोनेमा पैलिडम नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह आमतौर पर यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है, लेकिन अन्य व्यक्ति का ब्लड चढ़ाने या गर्भवती महिला से उसके भ्रूण में भी हो सकता है। यह प्लेसेंटा के माध्यम से बच्चे को हो सकता है, जिससे विकृति, विकास में देरी, समय से पहले जन्म, कम वजन का जन्म या यहां तक कि नवजात मृत्यु भी हो सकता है।
हेपेटाइटिस बी और सी (Hepatitis B and C)
जन्म के दौरान हेपेटाइटिस बी मां से बच्चे का संक्रमण हो सकता है। हेपेटाइटिस बी-पॉजिटिव माताओं से पैदा होने वाले शिशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए जन्म के समय हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन की पहली खुराक दी जाती है। जन्म के दौरान हेपेटाइटिस सी भी संक्रमित हो सकता है, हालांकि इसका जोखिम कम होता है। लेकिन हेपेटाइटिस सी के लिए वर्तमान में कोई टीका नहीं है।
लिस्टेरियोसिस (Listeriosis)
लिस्टेरियोसिस संदूषित भोजन में पाए जाने वाले बैक्टीरिया लिस्टेरिया मोनोसाइटोजेन्स के कारण होता है। इससे गर्भपात, समय से पहले जन्म या नवजात शिशु में गंभीर संक्रमण हो सकता है।
एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) HIV (Human Immunodeficiency Virus)
एचआईवी एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके कारण अब तक चार करोड़ से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं। एचआईवी फैलने का सबसे आम तरीका वायरस से पीड़ित लोगों के साथ शारीरिक तरल पदार्थों का आदान-प्रदान है। इसके अलावा, एचआईवी गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से बच्चे में फैल सकता है। ऐसे में एचआईवी से बचाव के लिए नियमित प्रसवपूर्व जांच महत्वपूर्ण है। अगर गर्भवती महिला एचआईवी पॉजिटिव है, तो एंटीरेट्रोवायरल दवा बच्चे को संक्रमण के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।



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