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नवरात्रि के पांचवां दिन मां स्कंदमाता के भोग के लिए बनाएं केले का हलवा, रेसिपी है बहुत आसान
नवरात्रि के पांचवें दिन देवी मां के वात्सल्य रूप स्कंदमाता की पूजा व आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धाभाव से मां के इस रूप की पूजा करता है, उसे देवी मां से ज्ञान व बुद्धि का वरदान मिलता है। इतना ही नहीं, अगर निसंतान दंपति देवी मां की पूजा करते हैं तो उनके घर में जल्द ही किलकारियां गूंजने लगती है।
स्कंद कुमार अर्थात स्वामी कार्तिकेय की मां होने के कारण देवी मां के इस पांचवे ममतामयी स्वरूप को स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है। माता का यह स्वरूप भक्तों की हर इच्छाओं को पूर्ण करता है।

देवी मां को प्रसन्न करने के लिए भक्तगण ना केवल पूरे भक्तिभाव से उनके लिए व्रत रखते हैं, बल्कि देवी मां के लिए तरह-तरह के भोग भी बनाते हैं। देवी स्कंदमाता को केले का भोग बेहद ही प्रिय है, इसलिए भक्तगण उन्हें केला व केले से बनी चीजें अर्पित करते हैं।
आप भी देवी मां के लिए केले का हलवा बनाकर उन्हें भोगस्वरूप चढ़ा सकते हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको केले का हलवा बनाने की आसान रेसिपी के बारे में बता रहे हैं-
केले का हलवा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री-
• 2 पके हुए केले
• 4 चम्मच घी
• स्वादानुसार चीनी
• कुछ बूंदे रेड फूड कलर
• इलायची
• ड्राई फ्रूट्स
केले का हलवा बनाने का तरीका-
• केले का हलवा बनाने के लिए सबसे पहले एक कढ़ाई में घी डालकर ड्राई
फ्रूट्स भून लें।
• अब ड्राई फ्रूट्स निकाल लें और केले को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में
काट लीजिए।
• केले को मैश कर लीजिए।
• एक कढ़ाई गर्म करें और उसमें घी, इलायची और केले डालकर उसे पकाना
शुरू करें।
• इसे करीबन 10-15 मिनट तक पकाएं, ताकि केले से नमी चली जाए और वह घी
छोड़ने लगे।
• इसमें फूड कलर डालकर अच्छे से मिला लें।
• इसमें भूने हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर कुछ मिनट तक पकाएं।
• एक प्लेट को घी की मदद से चिकना कर लें और फिर हलवा निकालकर इसमें
रख लें।
• इसे ठंडा कर लें और इसे कटे हुए पिस्ते और बादाम से सजाएं।
स्कंदमाता को कौन सी चीज का भोग लगता है?
मां स्कंदमाता देवी का ममतामयी रूप है। ऐसा माना जाता है कि इनकी पूजा करने से व्यक्ति को बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। स्कंद कुमार अर्थात स्वामी कार्तिकेय की माता होने के कारण देवी मां के इस स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। स्कंदमाता को भक्तगण केले का भोग लगाते हैं। इसके अलावा, देवी मां को खीर का भोग भी अर्पित किया जा सकता है।
स्कंदमाता का प्रसाद क्या है?
मां स्कंदमाता को केले का भोग बेहद ही पसंद है। इसलिए भक्तगण स्कंदमाता के प्रसाद के रूप में केला और केले से बनी चीजों का भोग लगाते हैं। अगर आप देवी को कोई मिष्ठान भोगस्वरूप चढ़ाना चाहते हैं तो केले का हलवा बनाकर भोग लगाया जा सकता है।
स्कंदमाता का नाम स्कंदमाता क्यों पड़ा?
देवी मां के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। कुमार कार्तिकेयर को भगवान स्कंद भी कहा जाता है। भगवान स्कंद की मां होने के कारण देवी मां के इस ममतामयी स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। देवी मां के इस स्वरूप में स्वामी स्कंद बाल स्वरूप में मां की गोद में बैठे हुए नजर आते हैं।
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