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वो मेरे साथ गंदी हरकतें करता था और मैं उसे प्यार समझती थी...
जब पहली बार मेरा उत्पीड़न हुआ तो मुझे समझ भी नहीं थी, मुझे तो इस बारे में याद भी नहीं है कि मेरे साथ हुआ क्या था। मैं उस अपराधी को जानती हूं जिसने मेरे साथ ये सब किया, दिन और रात में उसके साथ ही रहा करती थी। मैं 10 क्लास तक उसकी गंदे इरादों का शिकार बनती रही।
मेरे खुद के अंकल ने मेरे साथ घिनौना काम किया था। मैं सेक्स को समझने के लिए बहुत ही छोटी थी, वो मुझे अपने साथ बाहर ले जाया करते थे और मेरे प्राइवेट पार्ट को छूआ करते थे ताकि उससे उनको खुशी मिलें।

किसी को नहीं बताने के लिए कहा..
सबसे पहले मैं सुनकर बहुत आश्चर्यचकित हो जाती थी कि जब भी वो कहते थे कि ये बात किसी को भी मत बताना। सही और गलत में फर्क समझने के लिए मैं बहुत ही छोटी थी। मैं उनके दिए गए हर निर्देशों का पालन करती थी। एक दिन वो मुझे अपने घर ले गए और मेरी अंडरवियर निकालकर मेरे प्राइवेट पार्ट को टच और किस करने लगे।

उन्होंने मेरे दिमाग में डाली ये बात..
मैं शरीर में जो सेंसेशन हो रहे थे उसे मैं महसूस कर पा रही थी, मुझे तो मालूम भी नहीं था कि मुझे ये नापसंद होगा सकता है। उन्होंने मेरे दिमाग में यह बात डाल दी गई। बड़े बच्चों को इसी तरह प्यार करते हैं। मैं अब इस चीज की आदी हो गई थी।

एक दिन..
एक दिन मेरे मामा मेरे घर आए थे, मैंने उनसे कहा कि वो मेरे शरीर के निचले हिस्से में किस क्यूं नहीं करते हैं, ये सब तो बच्चों को अच्छा लगता है। उन्होंने मेरी सबके सामने मेरे बेइज्जती करते हुए कहा कि मैं एक अच्छी लड़की नहीं हूं, और घर के दूसरे बच्चों को मुझसे बात नहीं करनी चाहिए। मैं बहुत ही आश्चर्यचकित और शर्मिंदा थी, लेकिन मैं समझ गई थी जो कुछ भी मैंने कहा वो सही नहीं था।

मेरे पैरेंट्स मुझसे करीब नहीं थे..
मैं एक बहुत ही संकीर्ण विचारधारा परिवार से थी। जहां मेरे माता पिता दूसरों पैरेंट्स के तरह अपने बच्चों से फ्रैंडली नहीं थे। मेरे पैरेंट्स मुझसे एक दूरी बनाकर चलते थे। वो मेरे मौसी के बेटियों के साथ ज्यादा फ्रैंडली थे। वो कभी मुझे कहीं नहीं ले जाते थे और अपनी बेटी की तरह दुलार भी नहीं देते थे।

अंकल ने उठाया इस बात का फायदा..
मैं बचपन से बहुत ही अकेलापन महसूस करने लगी थी, इसलिए मेरे अंकल सब के सामने मुझ पर दुलारा जताया करते थे और वो सभी बातें करते थे जो मेरे पिता मुझसे नहीं करते थे। इसलिए मैं उनसे बहुत ही क्लॉज हो गई। लेकिन जैसे जैसे मैं बड़ी हो रही थी, मुझे समझ में आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा हैं। मैं अपने अंकल से दूरी बनाकर चलने लगी, जहां वो मुझे अपने साथ ले जाने की बात करते, मैं साफ मना कर देती।

चुप रही मैं..
उनको जब कभी मौका मिलता था, वो मेरे साथ बदतमीजी करने से बाज नहीं आते थे। मैंने एक बार उन्हें कह दिया कि अगर वो मुझे ज्यादा बदतमीजी करेंगे तो मैं सबको जाकर सच बता दूंगी। कुछ दिनों के लिए वो अपनी हरकत बंद कर देते थे, लेकिन वो बार बार मुझे तंग किया करते थे।
मुझे अपने पैरेंट्स से कभी कोई सर्पोट नहीं मिला था। इसलिए मैं चुप ही रहीं

जब मैंने लिया एक्शन
एक बार की बात है कि मेरे बोर्ड एग्जाम से पहले वो मुझे विश करने घर आए थे और अकेले में मुझे पाकर मेरे साथ बदतमीजी करने लगे तो मैंने गुस्से के साथ उन्हें कहा कि अगर आप वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आए तो मैं घर से भाग जाऊंगी और कभी वापस नहीं आऊंगी। ये शब्द उनके प्रति मेरी नफरत बताने के लिए काफी थे।

आज भी है दिल में दर्द ...
इसके बाद उन्होंने मुझे तंग करना बंद कर दिया। हम आज भी फैमिली फंक्शन में मिलते है अब हमारे बीच पहले जैसी कोई बात नहीं होती है। एक बार मैंने अपनी मां को ये सारी बातें बताने की कोशिश की थी। लेकिन उन्होंने मेरी एक बात का भी विश्वास नहीं किया। इसलिए आज भी वो दर्द में अपने सीने में दफन करके जी रही हूं।
(नोट: ये किस्से रियल लाइफ एक्सपीरियंस से जुड़े हुए है, अगर आप भी ऐसी कोई एक्सपीरियंस शेयर करना चाहें तो यहांकर सकते हैं। )



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