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क्या करें अगर आपका परिवार आपके शादी के फैसले से असहमत हो
शादी हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस शब्द के साथ ही हमारा मन कई सपनों को संजोने लगता है। बचपन से ही हमारे मन में इस शादी नाम के लफ्ज़ को इतनी अच्छी तरह से बैठा दिया जाता है कि कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की कल्पना इसके बिना नहीं कर पाता है।
शादी के बारे में ऐसी बातें जो आपको कोई नहीं बताएगा
शादी में पसंद के साथ माता-पिता की मर्जी भी शामिल होनी चाहिए। परंतु कुछ कारण परिवारिक अस्वीकृति की वजह बन जाते हैं। कभी-कभी माता-पिता की अनुमति के बगैर की गई शादी कपल्स के रिश्तों में खटास पैदा करती है। ऐसी खटास को पैदा होने से रोकने के लिए हम कुछ सुझाव लेकर आएं हैं।

1 अलग जाति या धर्म का होना
अगर लड़का या लड़की अलग धर्म के हों तो माता-पिता फौरन रिश्ते के लिए मना कर देते हैं। क्योंकि, वे सोचते हैं कि अलग जाति में की गई शादियां निभती नहीं हैं तथा परिवारों को मेल-जोल बढाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड सकता है। हालांकि मौजूद पीढ़ी इस बात को नहीं मानती है लेकिन फिर भी कुछ परिवार इस बात को अहमियत देते हैं।

2 सामाजिक दबाव
कई बार माता-पिता को किसी अन्य धर्म के लड़के या लड़की से अपने बच्चे की शादी करवाने में कोई एतराज नहीं होता है। लेकिन अन्य रिश्तेदारों की असहमति एवं लोगों की बातें उन्हें इस निर्णय को लेने से रोकते हैं। अतः समाज के बीच अपने परिवार की इज्जत को बनाए रखने के लिए वे अन्य जाति में अपने बच्चों की शादी को कराने से कतराते हैं।

3 बुरे अनुभव
अगर कभी इंटर-कास्ट मेरिज किसी की असफल शादी का कारण रहा हो तो फिर माता-पिता ऐसा फैसला दुबारा नहीं करना चाहेंगे। यह डर अगली शादियों में बाधाएं पैदा करता है।

4 रंगरूप में नापसंदगी
अक्सर माता-पिता अपने मन में हमारे होने वाले पति या पत्नी की एक छवि बनाकर रखते हैं। अगर हमारे द्वारा पसंद किया गया लड़का या लडकी उस छवि में पूरी ना उतरे तो यह उनकी नापसंदगी का कारण बन जाता है। अपनी बात मनवाने के लिए वे हमें इमोशनली ब्लैकमेल भी करते हैं तथा अंत में अपना निर्णय सुना देते हैं।

5 विवाह में माता-पिती की असहमति
कोई भी रिश्ता तब निभता है जब उसे निभाने की पूरी कोशिश की जाए व विवाह में यह जिम्मेदारी पति व पत्नी पर होती है। अगर पति-पत्नी एक दूसरे को समझने में असमर्थ हो या विवाह के बाद आने वाली समस्याओं का समाधान ना कर पाएं तब रिश्ते का अंत साफ नज़र आने लगता है। वे इसका कारण विवाह में माता-पिता की असहमति को मानते हैं। इस वजह से उनके मन में कुछ अन्य भावनाएं जन्म लेने लगती हैं।

6 दोष की भावना
कई बार कपल्स बिना माता-पिता की सहमति के विवाह के बंधन में बंध जाते हैं। लेकिन जब समस्याओं के दौरान उन्हें सही रास्ता दिखाने वाला कोई मौजूद नहीं होता है तब उन्हें अपने माता-पिता की कमी खलती है। यह उनमें एक दोष की भावना को पैदा करता है। यह भावना लड़ाई-झगडे के रुप में व्यक्त होती है। इस दोष के कारण कई बार व्यक्ति अंदर ही अंदर एक आग में जलता रहता है।

7 स्वयं पर भरोसा ना करना
कई बार हम पूरी दुनिया के खिलाफ जाकर अपना फैसला लेते हैं। परंतु बाद में दुविधा के कारण अपने फैसले पर शक करने लगते हैं व स्वयं पर से भी भरोसा उठने लग जाता है। यह हमें नकारात्मक व चिडचिडा बना देता है।

8 विवाह से जुड़ी हमारी उम्मीदें
कई बार हम सच्चाई को देख नहीं पाते हैं व अपनी ही ख्याली दुनिया में रह कर शादी का फैसल लेते हैं। बाद में हम अपने पार्टनर को उन से जुड़ी उम्मीदों को गिनवाते हैं तथा उन्हें इन पर पूरा उतने के लिए कहते हैं। हमारी अपेक्षाओं पर पूरा उतरते-उतरते हमारा पार्टनर थक जाता है व अंत में हमसे अलग होने के बारे में सोचने लगता है।

9 शादी के बाद परिवार के साथ अपने संबंधों को सुधारना
माता-पिता की अनुमति के बिना शादी करने पर कपल्स के मन में कई भावनाएं जन्म लेती हैं। ये भावनाएं उसे परिवार के साथ फिर से एक होने के लिए उकसाती हैं। अपने परिवार से मिलने के प्रयासों में वे अपने पार्टनर पर दबाव ड़ालने लगते हैं। इस दबाव के कारण कपल्स के बीच झगडे होते हैं।

10 बदले की भावना
कई बार परिवार प्रेम विवाह के लिए मान जाते हैं। लेकिन मन ही मन में वे इस विवाह से नाखुश भी रहते हैं। यही भावना आगे चल कर परिवारों में फूट पैदा करती है। अतः पारिवारिक झगडे विवाहित दम्पती को भी लड़ने पर मजबूर कर देते हैं।

धैर्य
शादी जिंदगी का बहुत ही महत्वपूर्ण निर्णय है तथा इस फैसले को जल्दबाजी में ना लें। सामाजिक दबाव में लिया गया फैसला अन्य समस्याओं का कारण बन सकता है। शादी के बाद दोनों परिवारों के हित के बारे में सोच कर ही कोई निर्णय लें। क्योंकि परिवार की नीव प्रेम व खुशहाली पर खड़ी होती है।

समस्या की जड को काटें
परिवार के खिलाफ जाकर शादी करना इस समस्या का समाधान नहीं है। अगर आप प्रेम विवाह करना चाहते हैं तो आपको अपने माता-पिता से आराम से बात करन की आवश्यकता है। उनके मन में बसे सवालों को मिटाने की जरुरत है। माता-पिता को हमेशा हमारे भविष्य की चिंता रहती है तथा उनकी स्वीकृति के लिए उनके विश्वास को जीतना बहुत जरुरी है।



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