जानिये, धोखा देना कैसे बन जाती है आदत

By Aditi Pathak

रिश्‍ते के विशेषज्ञों को कहना है कि किसी भी रिश्‍ते में शुरूआत में दो से तीन बार धोखा देने पर व्‍यक्ति सोचता है लेकिन इसके बाद ये उसकी फितरत या यूँ कहें कि आदत ही बन जाती है। शायद यही वजह है कि कहा जाता है ''एक बार धोखा देने वाला, बार-बार धोखा देता है।''

हाल ही में हुए एक अध्‍ययन में रिसर्चरों ने एक ग्रुप बनाया जिसमें बहुत सारे लोगों को एकत्रित करके उनसे सवाल पूछा कि उनके सम्‍बंध अपने पार्टनर के साथ कैसे हैं और धोखा देने के बारे में पूछा।

cheating in a relationship


जिसमें से कई लोगों ने स्‍वीकार किया कि उन्‍होंने अपने पार्टनर को धोखा दिया है। अगर आप इस अध्‍ययन को लेकर आश्‍चर्यचकित हैं तो इस स्‍टडी को पढें:

अध्ययन क्‍या कहता है?

अध्ययन क्‍या कहता है?

सर्वेक्षण से पता चलता है कि किसी व्यक्ति को किसी रिश्ते में धोखा देने की संभावना 300% अधिक हो सकती है।

पीडि़त का क्‍या होता है?

पीडि़त का क्‍या होता है?

एक और दिलचस्प तथ्य यह है कि जिन लोगों को रिश्ते में धोखा दिया गया था, उनके बाद के संबंधों में भी धोखा देने की अधिक संभावनाएं हैं। हो सकता है कि वे एक और धोखे के शिकार हो जाएं जब तक कि वे सबक सीख नहीं लेते हैं या सावधान नहीं हो जाते हैं।

संदेह या शक के बारे में क्‍या राय है?

संदेह या शक के बारे में क्‍या राय है?

यहां एक और तथ्‍य यह है कि जिन लोगों ने अपने पूर्व रिश्‍ते में शक किया होता है वो आगे भी हर रिश्‍ते में शक करते हैं।

अध्‍ययन का क्‍या परिणाम है?

अध्‍ययन का क्‍या परिणाम है?

आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि धोखे का परिणाम, दोनों ही पार्टनरों के दिमाग पर पड़ता है। इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव दोनों पर ही होता है। इससे उनका खुद पर काबू नहीं रह पाता है और न ही वो नियंत्रित रह पाते हैं।

ब्रेन कैमिस्‍ट्री की इसमें क्‍या भूमिका है?

ब्रेन कैमिस्‍ट्री की इसमें क्‍या भूमिका है?

इसके पीछे कारण यह माना जाता है कि एक बार धोखा देने पर उसका दिमाग वैसे ही सेट हो जाता है। उसका ब्रेन भी उसे वैसा ही करने की इज़ाजत देता है। बाद में ब्रेन को उसकी आदत हो जाती है।

अपराधबोध महसूस होता है या नहीं?

अपराधबोध महसूस होता है या नहीं?

जब भी आप कुछ अनैतिक काम करते हैं तो आपका दिमाग आपको सोचने पर मजबूर कर देता है। इससे आपको गिल्‍टी महसूस होती है। पर अगले ही पल आपको वो काम ठीक लगने लगता है। ये व्‍यवहार का अवांछनीय रूप होता है।

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