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साइंस के अनुसार शादी के बाद शारीरिक और मानसिक रुप से क्या बदलाव आते हैं?
हर साल गर्मी में हज़ारों कपल्स शादी के बंधन में बंधते हैं। आपके इस फैसले का असर आपकी सेहत पर भी पड़ता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि शादी हमारी जिंदगी को कई तरह से प्रभावित करती है। इस बात में कोई शक नहीं है कि शादी शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए अच्छी होती है लेकिन एक सहायक साथी की मदद से भी शादी के बाद स्वस्थ जीवन जीना संभव है। लेकिन हाल ही में हुई एक रिसर्च में सामने आया है कि शादी और सेहत एवं स्वस्थ जीवन के बीच का संबंध थोड़ा जटिल है। जहां एक ओर इसके फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर नुकसान भी हैं।

सबूतों के आधार पर सिंगल लोगों के मुकाबले विवाहित महिलाओं और पुरुषों में कुछ तरह के ह्रदय रोगों का खतरा कम होता है। जैसे कि शादीशुदा लोग मोटापे के शिकार भी कम ही होते हैं और जब मोटापा नहीं होगा तो कई तरह के रोगों से बचा जा सकता है।
लेकिन सभी पर ये आंकलन लागू नहीं होता है। हर शादी अलग होती है और शादी का रिश्ता दोनों लोगों पर, उनके रिलेशनशिप पर, उनके प्लान्स पर निर्भर करता है। अब तक एक ही सेक्स के कपल्स की शादी के प्रभाव के बारे में रिसर्च नहीं की गई है।
आज हम आपको इस पोस्ट के ज़रिए बताने जा रहे हैं कि शादी किस तरह हमारे शरीर पर शारीरिक और मानसिक प्रभाव डालती है।
अन्य लोगों की तुलना में शादीशुदा लोगों का संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर रहता है। यहां तक कि एक उम्र के बाद इनकी सेक्स लाइफ, शिक्षा, आय में भी बढ़ोत्तरी होती है।
पिछले साल ही प्रकाशित हुई एक स्टडी में सामने आया है कि सेहत को अधिकर फायदे अधिक उम्र वाले शादीशुदा कपल्स में पाए गए हैं। जवान शादीशुदा लोगों में अविवाहित लोगों की तुलना में ज्यादा फर्क नहीं पाया गया।
एक स्टडी में पाया गया कि अधिक उम्र के एलजीबीटी मैरिड एडल्ट्स के जीवन का स्तर अच्छा होता है और सिंगल लोगों की तुलना में वो अपने पार्टनर के साथ ज्यादा खुश रहते हैं।
लेकिन विवाहित लोगों, खासतौर पर पुरुषों में ओवरवेट और मोटापे से ग्रस्त होने का खतरा ज्यादा रहता है। महिलाओं और पुरुषों दोनों ही शादी के बाद एक्सरसाइज़ करना कम कर देते हैं।
विवाहित पुरुष हैल्थकेयर चीज़ों का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं हालांकि, उन्हें शारीरिक और कैंसर स्क्रीनिंग की भी सलाह दी जाती है।
महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही कुछ तरह के ह्रदय रोग का खतरा कत रहता है जैसे कि सेरेब्रोवस्कुलर रोग, एबडोमिनल ओर्टिक एनेउरिस्म और कोरोनरी आर्टरी रोग आदि।
लेकिन तलाकशुदा और विधवा महिलाओं में ह्रदय रोग का खतरा ज्यादा रहता है।
कनाडा के एक सर्वे में ये बात सामने आई है कि शादीशुदा लोग मानसिक रूप से ज्यशदा स्वस्थ थे और वो शराब का सेवन कम करते हैं।
हाल ही में हुई एक स्टडी में पाया गया है कि शादी के पहले साल में पुरुष ज्यादा कॉन्साइंटियस रहते हैं जबकि महिलाएं कम न्यूरॉटिक हो जाती हैं।
लेकिन इसी स्टडी में ये भी पाया गया कि इस पहले साल में महिलाएं कम और पुरुष ज्यादा एक्स्ट्रोवर्ट रहते हैं।
लेकिन ये फायदे और नुकसान शादी ना करने या करने का आधार तो नहीं बन सकते हैं।
समय के साथ शादी के प्रभाव को लेकर हमारी धारण में काफी बदलाव आया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि शादीशुदा लोगों की तुलना में सिंगल लोगों की सेहत ज्यादा बेहतर रहती है क्योंकि उनमें किसी भी तरह का दबाव कम होता है।
लेकिन अगर शादी के सेहत को फायदे हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि इस वजह से आप शादी के बारे में सोचें। अगर आप किसी रिश्ते में खुश रह सकते हैं और अपने पार्टनर को खुश रख सकते हैं तो ही शादी जैसे बंधन में पड़ें।



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