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Nikah Halala : निकाह हलाला पर क्या हैं इस्लाम के रूल्स? सुप्रीम कोर्ट करेगा इस प्रथा पर सुनवाई
मुस्लिम महिलाओं के लिए और उनके हक में सुप्रीम कोर्ट ने सबसे बड़ा फैसला तीन तलाक को खत्म करके दिया था। अब फिर से मुस्लिम औरतों के हक की बात दोबारा उठी है। जिसकी वजह से हजारों औरतों की जिंदगियां खराब हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट निकाह-हलाला जैसी कुप्रथा पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस केस में 5 जजों की बेंच फैसला करेगी। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की तरफ से दाखिल जवाबों पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि इस केस पर अब नई पांच जजों की बेंच का पुर्नगठन होगा।

Nikah Halala : मुस्लिम महिलाओं की याचिका पर सुनवाई
वकील अश्विनी उपाध्याय समेत कुछ मुस्लिम औरतों नायसा हसन, शबनम, फरजाना, समीना बेगम और मोहसिन कथिरी ने निकाह हलाला को लेकर याचिका दाखिल की है। जिसमें मुस्लिम समाज की इस प्रथाओं को असंवैधानिक करार देने की बात की जा रही है। लेकिन सबसे अहम सवाल कि, इस प्रथा पर इस्लाम क्या कहता है। इसके बारें में जानना बहुत जरूरी है। आइये जानते हैं निकाह हलाला क्या है और इस पर इस्लाम धर्म ने क्या रूल्स सेट किये हुए हैं-

Nikah Halala : इस्लाम में निकाह-हलाला के बारें में क्या रूल्स है ?
मुस्लिम पर्सनल लॉ या शरिया के अनुसार, जब पति अपनी बीवी को तीन तलाक एक बार में दें या वो तीन तलाक अलग-अलग दें, लेकिन बाद में वो अपनी तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करना चाहता हो, तो इस्लाम में इसे हराम करार दिया गया है। लेकिन फिर भी उसको अपनी तलाकशुदा पत्नी से दोबारा शादी करनी है, तो इसके लिए महिला को पहले निकाह हलाला की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। जिसमें उसे किसी दूसरे मर्द के साथ शादी करनी होगी, और एक बीवी की तरह ही उसके साथ रहना होगा। इसके बाद उसको दूसरा शौहर उसको तलाक दे और महिला को दोबारा 3 महीने की इद्दत (वो वक्त जब तलाकशुदा महिला या जिसके पति की डेथ हो चुकी हो घर से नहीं निकल सकती, सिवाए किसी इमरजेंसी के) पूरी करनी होती है। इसके बाद ही वो महिला अपने पहले पति से दोबारा शादी कर सकती है। इसे इस्लाम में हराम कहा गया है। इसके पीछे सबसे बड़ा रीजन ये है कि शौहर अपनी बीवी को तलाक ना दें क्योंकि तलाक के बाद उसकी बीवी उसके लिए गैर हो जाती है, और अगर उसे अपनी पत्नी से दोबारा शादी करनी है तो इस शेमफुल काम करने के बाद ही उसकी पत्नी उसको वापस मिल सकती है।

Nikah Halala : क्या हलाला का नाम देकर ग़लत प्रथा क़ायम हुई ?
जाने-माने क़ानूनविद प्रोफ़ेसर ताहिर महमूद इस बारें में कहते हैं कि अगर किसी मुस्लिम महिला को उसके पति ने तलाक दे दिया और मुस्लिम महिला ने दूसरे शख्स से शादी कर ली। लेकिन किन्ही वजहों से उसके दूसरे पति की मौत हो जाती है तो मुस्लिम महिला की रज़ामंदी से उसके पहले शौहर से शादी हो सकती है। अगर मुस्लिम औरत और उनके पहले पति की आपसी सहमती है तभी ये शादी हो सकती है। इस्लाम में इसकी इजाज़त है।
प्रोफ़ेसर ताहिर महमूद हलाला प्रथा पर कहते हैं कि इसी इजाज़त को भारत में कुछ उलेमा ने हलाला का नाम देकर ग़लत प्रथा क़ायम कर दी है। इस्लामिक स्कॉलर्स के मुताबिक, हलाला के कई नियमों को भारत के मौलवियों ने पैसे खाने के चक्कर में अपने मर्जी से तोड़ा-मरोड़ा है।

Nikah Halala : कई मुस्लिम देशों में हलाला बैन है
हलाला को लेकर कई मुस्लिम देशों ने इस प्रथा पर प्रतिबंध लगा दिया है। क्योंकि कई देशों में पैसों के लेन-देन से ये प्रथा चली आ रही थी। भारत, पाकिस्तान समेत ब्रिटेन व कुछ अन्य देशों में भी ये प्रथा जारी है।

Nikah Halala : भारत के संविधान नें महिलाओं को दिया है बराबरी का हक
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2018 में निकाह हलाला को लेकर याचिका पर सुनवाई करने का फैसला लिया था। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस मामले पर कहा कि ये प्रथा भारत के संविधान के अलग अलग अनुच्छेदों का उल्लंघन करता है। अनुच्छेद 14 के अनुसार, भारत के सभी नागरिकों को बराबरी का हक है। लेकिन, इस मसले पर इसका उल्लंघन किया जा रहा है। वहीं अनुच्छेद 15 में भी जहां भारत में लिंग, धर्म और भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं है, लेकिन इस प्रथा के कारण मुस्लिम महिलाएं अपने अधिकार से वंचित हैं। साथ ही अनुच्छेद 21 भी देश के सभी नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है।



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