किस वजह से अंगूठे से दिया जाता है तर्पण, जानें पितृ पक्ष में क्या है इसका महत्व

सनातन धर्म में सभी व्रत और पर्व का बहुत ही अत्यधिक महत्व होता है। वैसे ही पितृपक्ष के पावन अवधि को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया गया है। पितृपक्ष में लोग तिथि के दौरान अपने पितृ देवताओं का श्राद्ध और तर्पण करते हैं। ऐसा कहते हैं कि पितृपक्ष के पावन पर्व पर पितृ देवताए स्वर्ग लोक से धरती लोक पर आते है।

इसके साथ ही पितृ देवताओं को विधि विधान से तर्पण करने से घर में सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति होती है और पितृ देवताओं का विशेष आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। पूर्वजों के आशीर्वाद से व्यक्ति को जीवन में उन्नति और तरक्की देखने को मिलती है। लेकिन आपने देखा होगा कि जब भी तर्पण करते हैं तो जल अंगूठे से दिया जाता है लेकिन इसका वास्तविक कारण क्या है? ऐसा क्यों होता है आईये विस्तार पूर्वक जानते हैं।

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पितरों को अंगूठे से जल अर्पित करने की क्या वजह है?

पितृ पक्ष का उल्लेख पुराणों में बड़े ही विस्तृत रूप से किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि इसकी शुरुआत रामायण तथा महाभारत काल से हुई थी। रामायण काल में भगवान श्री रामचंद्र ने पिता राजा दशरथ को तर्पण करते समय अंगूठे का उपयोग जल अर्पित करने में किया था। इसके साथ ही महाभारत काल में पांचो पांडवों ने अपने पूर्वजों को जल अर्पित करने के लिए तर्पण के दौरान अंगूठे का उपयोग किया था।

अंगूठे से तर्पण जल अर्पित करने का शास्त्रों में भी विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के हाथ के अंगूठे में पितरों का निवास होता है। इसीलिए अंगूठे को पितरों का तीर्थ भी कहा जाता है ऐसा माना जाता है कि जब तर्पण के दौरान अंगूठे से जल अर्पित किया जाता है तो सीधे पिंडों में शीघ्र से पहुंचता है और जब पिंडो पर जल पहुंचता है तभी पितृ देवता अपना भोजन प्रसाद, जल ग्रहण करते हैं।

यह एक व्यवधान भी माना जाता है कि जब भी कोई उंगली से तर्पण का जल अर्पित करते हैं तो वह सीधे हमारे पितृ देवताओं के पिंड तक नहीं पहुंच पाता है। ऐसे में हमारे पितृ देवताओं तक ना ही जल पहुंच पाता है ना ही भोजन इस स्थिति में उन लोगों को मोक्ष की प्राप्ति नहीं हो पाती है जिससे वह दर बदर भी भटकते रहते हैं और इसके साथ ही अपने संतान से नाराज भी हो जाते हैं इसीलिए विधि विधान से तर्पण का जल अंगूठे से दिया जाता है।

नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

Story first published: Monday, September 23, 2024, 8:00 [IST]
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