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Chandra Grahan में हो जाए मृत्यु तो उस दौरानअंतिम संस्कार करना चाहिए या नहीं? जानें नियम
Death During Chandra Grahan 2026: आज चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है जिसका हिंदू धर्म में धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अलग-अलग महत्व होता है। हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर कार्य के लिए शास्त्रों में विशेष नियम और मुहूर्त बताए गए हैं। ग्रहण काल को आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और 'सूतक' की वजह से अशुद्ध माना जाता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल खड़ा होता है कि यदि चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए, तो क्या उसका अंतिम संस्कार तुरंत किया जा सकता है? धार्मिक मान्यताओं और गरुड़ पुराण के अनुसार, ग्रहण के समय प्रकृति के पंचतत्वों में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है।
यही कारण है कि सूतक काल में प्राण त्यागने और शवदाह को लेकर ज्योतिष शास्त्र और परंपराओं में कड़े निर्देश दिए गए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि ग्रहण के साये में मृत्यु होने पर परिवार को किन नियमों का पालन करना चाहिए और मोक्ष प्राप्ति के लिए क्या विधान है।

क्या ग्रहण काल में अंतिम संस्कार किया जा सकता है?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण के समय पृथ्वी का वातावरण दूषित हो जाता है। अंतिम संस्कार के लिए अग्नि, जल और पृथ्वी जैसे तत्वों की शुद्धता अनिवार्य है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के दौरान अग्नि प्रज्वलित करना या शवदाह करना मृतक की आत्मा के लिए कष्टकारी हो सकता है। ये तो आप जानते ही हैं कि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है, जिसमें किसी भी प्रकार के संस्कार (अंतिम संस्कार सहित) को टालने की सलाह दी जाती है।
यदि ग्रहण काल में मृत्यु हो जाए, तो क्या करें?
शास्त्रों के अनुसार, यदि ग्रहण के दौरान किसी के प्राण निकल जाएं, सामान्यतः ग्रहण समाप्त होने और मोक्ष (ग्रहण की समाप्ति) के बाद ही शव यात्रा निकालने का विधान है। मृत शरीर को एक साफ सफेद सूती कपड़े से ढककर किसी सुरक्षित और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए। साथ ही परिवार के सदस्यों को शव के पास बैठकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का मानसिक जाप करना चाहिए ताकि वातावरण की नकारात्मकता दूर रहे। ग्रहण समाप्त होते ही पूरे घर में गंगाजल छिड़कें, स्वयं स्नान करें और फिर शव को अंतिम विदाई के लिए तैयार करें।
क्या मजबूरी में शवदाह किया जा सकता है?
अक्सर यह सवाल आता है कि यदि शव को अधिक देर तक रखना संभव न हो, तो क्या करें? ऐसे में कुछ विद्वानों का मत है कि अनिवार्य परिस्थितियों में शांति पाठ और विशेष दोष निवारण पूजा के बाद दाह-संस्कार किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में 13वीं के दिन चंद्रमा की विशेष पूजा, दान-पुण्य और शांति पाठ अनिवार्य होता है, ताकि आत्मा को शांति और मोक्ष प्राप्त हो सके।
वैज्ञानिक बनाम धार्मिक दृष्टिकोण
जहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण ग्रहण को मात्र एक खगोलीय घटना (सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा का एक कतार में आना) मानता है और इसका मृत्यु से कोई संबंध नहीं देखता, वहीं धार्मिक मान्यताएं इसे ऊर्जा के असंतुलन से जोड़ती हैं। अंततः यह परिवार की व्यक्तिगत आस्था और स्थानीय परंपराओं पर निर्भर करता है कि वे किस मार्ग का अनुसरण करते हैं। अगर आप वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ग्रहण के दौरान अंतिम संस्कार कर सकते हैं और धार्मिक मान्यता को फॉलो करते हैं तो ग्रहण समाप्ति का इंतजार करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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