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इस नवरात्रि चाहिए माँ का आशीर्वाद तो राशि अनुसार करें दुर्गा के इस रूप की पूजा
माँ दुर्गा शक्ति का स्रोत हैं। ये वो हैं जो अपने सच्चे भक्तों को उनके जीवन में मार्ग दिखाती हैं और उनकी रक्षा करती हैं। ये भक्तों के जीवन में ज्ञान का दीपक जलाती हैं और भौतिक चीज़ों की चकाचौंध से उन्हें राहत देती हैं।
माना जाता है कि माँ दुर्गा, माता पार्वती का ही अंश हैं जो राक्षसों का विनाश करने के लिए अवतरित हुई थीं। उनके नौ अलग अलग रूप हैं जिन्होंने महिषासुर को मारते वक़्त उनकी मदद की थी।

नवरात्रि माँ दुर्गा की आराधना करने का सबसे उत्तम समय है। इस दौरान उनके सभी नौ रूपों को भी पूजा जाता है और उनका स्मरण लोग अपनी राशि के अनुसार भी कर सकते हैं।
हम पूरी लिस्ट लेकर आए हैं जिसमें बताया गया है कि राशि के अनुसार आपको माँ दुर्गा के किस रूप को पूजना चाहिए।

मेष: 21 मार्च - 20 अप्रैल
मेष राशि वालों को माँ शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। उन्हें नवरात्रि के पहले दिन पूजा जाता है। मेष राशि के जातक दुर्गा चालीसा और सप्तशती पाठ का जाप भी कर सकते हैं।

वृषभ: 21 अप्रैल - 21 मई
वृषभ राशि वालों को महागौरी का ध्यान करना चाहिए। वो ललिता के नाम से भी जानी जाती हैं और भक्तों को उनका आशीर्वाद पाने के लिए ललिता सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। ये भक्तों के भटके मन को शांत करती हैं। वहीं अविवाहित लड़कियों को मनचाहा वर प्राप्त होता है।

मिथुन: 22 मई - 21 जून
माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना मिथुन राशि के लोगों द्वारा की जानी चाहिए। उनकी शिक्षा के मार्ग में आने वाली सभी रुकावटों को वो दूर कर देती हैं। इस राशि के भक्त तारा कवच का जाप करें।

कर्क: 22 जून - 22 जुलाई
कर्क राशि के लोगों को माँ शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी सहस्रनाम के पाठ से भी लाभ मिलेगा। भक्तों को जीवन में तरक्की मिलने के साथ ही भय से भी मुक्ति मिलेगी।

सिंह: 23 जुलाई - 21 अगस्त
सिंह राशि के भक्तों को माँ दुर्गा के कूष्माण्डा देवी स्वरूप की उपासना करनी चाहिए। उनके किसी भी मंत्र का 505 बार जाप मनवांछित फल देगा। इनकी पूजा जीवन में हर तरह की सफलता पाने के लिए की जाती है।

कन्या: 22 अगस्त – 23 सितंबर
कन्या राशि के लोगों को माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा ज़रूर करनी चाहिए। ये माँ सरस्वती की तरह अपने भक्तों को ज्ञान का आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा इस राशि के जातक लक्ष्मी मंत्र का जाप कर सकते हैं।

तुला: 24 सितंबर - 23 अक्टूबर
तुला राशि वालों को महागौरी माँ की शरण में जाना चाहिए। ये भक्तों के दांपत्य जीवन को सुखमय बनाती हैं और अविवाहितों को मनपसंद वर का आशीर्वाद देती हैं। उन्हें दुर्गा सप्तशती के प्रथम स्त्रोत का जाप करना चाहिए। आपके लिए महाकाली स्त्रोत या काली चालीसा का पाठ भी लाभदायक होगा।

वृश्चिक: 24 अक्टूबर - 22 नवंबर
इस राशि के लोगों को माँ के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। इनकी उपासना संतान प्राप्ति के लिए की जाती है लेकिन दूसरी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी आप इनका ध्यान कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती के पाठ से भी आपको फायदा होगा।

धनु: 23 नवंबर - 22 दिसंबर
धनु राशि के भक्त माँ चंद्रघंटा की उपासना करें। माला के साथ दुर्गा मंत्र का जाप करें। माँ चंद्रघंटा की पूजा नकारात्मक शक्तियों से दूर रहने और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए की जाती है।

मकर: 23 दिसंबर - 20 जनवरी
माँ कालरात्रि की पूजा मकर राशि के जातकों द्वारा की जानी चाहिए। ये भक्तों के जीवन से हर तरह के भय को दूर कर देती हैं। यदि जीवन में नकारात्मक शक्तियां या बुरी नज़र परेशान कर रही है तो इनकी उपासना से मुक्ति पाई जा सकती है।

कुंभ: 21 जनवरी - 19 फरवरी
कुंभ राशि के भक्त भी माँ कालरात्रि की पूजा कर सकते हैं। इसका अलावा वो दुर्गा मंत्र और दुर्गा देवी कवच का पाठ भी कर सकते हैं।

मीन: 20 फरवरी - 20 मार्च
मीन राशि वालों को माँ चंद्रघंटा का ध्यान करना चाहिए। वो उनके सपनों को पूरा करने और उस मार्ग में आने वाली सभी रुकावटों को दूर करने में मदद करती हैं। मीन राशि के जातक माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए बगलमुखी मंत्र का जाप कर सकते हैं।



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