Dharmendra Famous Dialogues: ‘बसंती...' से ‘कुत्ते, कमीनें' तक, धर्मेंद्र के 10 आइकॉनिक डायलॉग

Dharmendra Famous Dialogues: बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि अब बॉलीवुड के दिग्गज सितारे धर्मेंद्र हमारे बीच नहीं रहे। 89 साल की उम्र में 24 नवंबर को धर्मेंद्र का निधन हो गया है। अभिनेता की मौत से पूरे देश में मातम का माहौल है और हर कोई अपने चहेते एक्टर के अलविदा कहने से सदमे में हैं। बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र सिर्फ अपने एक्शन या रोमांस के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी दमदार आवाज और डायलॉग डिलीवरी के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी फिल्मों में ऐसे कई डायलॉग्स हैं जिन्हें आज भी लोग वैसे ही दोहराते हैं जैसे रिलीज के समय।

कभी वीरू की शरारतें, कभी शराबी का दर्द, तो कभी एक्शन हीरो की गर्जना-धर्मेंद्र के संवादों में एक अलग ही जादू था। उनके ये आइकॉनिक डायलॉग आज भी पॉप कल्चर का हिस्सा हैं और आने वाली पीढ़ियों तक याद रखे जाएंगे। आइए देखते हैं उनके 10 सबसे मशहूर और सदाबहार डायलॉग, जो धर्मेंद्र को 'अमर लीजेंड' बनाते हैं।

धर्मेंद्र के 10 आइकॉनिक डायलॉग (फिल्मों के साथ)

1. "बसंती... इन कुत्तों के सामने मत नाचना।"

फिल्म: शोले (1975)
इस एक डायलॉग ने वीरू और बसंती की जोड़ी को अमर कर दिया।

2. "कुत्ते... कमीनें... मैं तेरा खून पी जाऊंगा!"

फिल्म: यादों की बारात (1973)
धर्मेंद्र का सबसे आग उगलता और पावरफुल डायलॉग - आज भी लोग स्टाइल में बोलते हैं।

3. "जो डर गया... समझो वो मर गया।"

फिल्म: शोले
आज भी मोटिवेशनल लाइनों में सबसे ऊपर गिना जाता है।

4. "दिल के मामले में हमेशा दिल की सुननी चाहिए।"

फिल्म: फिल्म लाइफ इन मेट्रो (1975)
कॉमेडी टाइमिंग की मास्टरक्लास - यह डायलॉग मीम कल्चर में आज भी फेमस है।

5."गांव वालों, तुमको मेरा आख़िरी सलाम... गुडबाय..."

फिल्म: शोले (ड्रंक सीन)
धर्मेंद्र का यह ड्रंक कॉमिक सीन आज भी बॉलीवुड का सबसे फेवरेट है।

6. "तुम्हारी ये गोली लोहे के शरीर के पार नहीं जा सकती"

फिल्म: लोहा
इस फिल्म में धर्मेंद्र के हर डायलॉग को लोगों ने पसंद किया।

7. 'ओए! इलाका कुत्तों का होता है, शेर का नहीं',

फिल्म: यमला पगला दीवाना (2011)
सीधे दिल को छू जाने वाला संवाद।

8. 'कभी जमीन से बात की है ठाकुर? ये जमीन हमारी मां है'

फिल्म: गुलामी (1985)
इमोशनल डायलॉग जिसमें धर्मेंद्र की सादगी दिखती है।

9.'एक-एक को चुन-चुन के मारूंगा... चुन-चुन के मारूंगा'

फिल्म: शोले (1975)
सीधा-सादा, ईमानदार किरदार और दमदार कथन।

10. अगर तकदीर में मौत लिखी है तो कोई बचा नहीं सकता, अगर जिंदगी लिखी है तो कोई माई का लाल मार नहीं सकता'

फिल्म: धरमवीर (1977)
हीमैन स्टाइल में धमकी-शुद्ध धर्मेंद्र अंदाज।

Story first published: Monday, November 24, 2025, 19:00 [IST]
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