Latest Updates
-
बारिश के मौसम में सर्दी-खांसी और गले की खराश से हैं परेशान तो आजमाएं ये 5 घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत -
Sawan 2026 Shivling Puja Vidhi: शिवलिंग पर सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए? जानिए सावन में जलाभिषेक का सही तरीका -
Radhika Ambani Look: लंदन में Dior की सिंपल सी ड्रेस पहन छाईं राधिका अंबानी, लेकिन कीमत सुन उड़ जाएंगे आपके होश -
Sawan First Somwar 2026: सावन का पहला सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और व्रत के जरूरी नियम -
Happy Sawan Somwar 2026 Wishes: शिव का नाम...सावन के पहले सोमवार पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामनाए संदेश -
बारिश के मौसम में तेजी से बढ़ रहा है वायरल फीवर का खतरा, जानिए लक्षण और बचाव के उपाय -
Friendship Day Wishes For Best Friend: इन संदेशों के जरिए बेस्ट फ्रेंड को दें फ्रेंडशिप डे की बधाई -
Happy Friendship Day 2026 Wishes: तेरी मेरी यारी...इन संदेशों के साथ दोस्तों को दें फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं -
आगरा की अवनी गुप्ता ने Miss Supranational 2026 में बढ़ाया भारत का मान, कॉर्पोरेट जॉब छोड़ बनाई टॉप 12 में जगह -
सावन में भूलकर भी न करें इन चीजों का सेवन, एक्सपर्ट से जानें सावन में क्या खाएं और क्या नहीं
थकान दूर करने के लिए पृष्ठासन

सीधे खड़े हो जाएँ. दोनों पैरों में डेढ़ फुट का अंतर रखें. दोनों हाथों की अँगुलियों को आपस में गूँथ लें. अब साँस भरें और दोनों बाज़ुओं को सिर के ऊपर लाएँ.
बाज़ू सीधा रखें. कलाई को पलटें ताकि हथेली का रूख़ आकाश की ओर रहे. अब साँस छोड़ते हुए कमर से आगे 90 डिग्री के कोण पर झुकें. सामने हथेली की ओर देखें. साँस बाहर रोककर रखें.
अपने शरीर और बाज़ुओं को ज़्यादा से ज़्यादा दाईं ओर घुमाएँ. इसी तरह बाईं ओर घुमाएँ. साँस भरें और सीधे खड़े हो जाएँ. अब साँस निकालते हुए हाथों को नीचे कर लें. यह एक पूरा चरण है.
पाँच बार इस इस आसन का अभ्यास करें. श्याटिका या स्लिप डिस्क की समस्या होने पर आगे की ओर झुकने वाले आसन नहीं करें.
तिर्यक कटिचक्रासन कंधे, पीठ और कमर की माँसपेशियों को व्यायाम देता है और उनकी शक्ति बढाता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर की जकड़न दूर होती है.शारीरिक और मानसिक तनाव कम करने में भी यह आसन सहायक है.
पृष्ठासन
नियमित अभ्यास से पैरों की माँसपेशियाँ मज़बूत बनती हैं
सीधे खड़े हो जाएँ. दोनों पैरों में डेढ फुट का अंतर रखें. पैरों को समानांतर नहीं रखें. दोनों पैरों की अँगुलियों को थोड़ा बाहर की ओर मोड़ लीजिए.
दोनों हाथों को नितम्ब के नीचे यानी जंघाओं के पिछले भाग पर सटाकर रखें. साँस भरें और साँस छोड़ते हुए घुटनों को थोड़ा मोड़ें. कमर से पीछ झुकते जाएँ और हाथों को नीचे सरकाते जाएँ.
पीछे झुकते हुए अगर आप हाथों को घुटनों के पिछले भाग तक पहुँचा सकें तो बहुत अच्छा है. अभ्यास हो जाने पर आप अपने हाथ टखनों तक पहुँचा सकते हैं.
लेकिन पीछे झुकने में जल्दबाज़ी नहीं करें और संतुलन बनाकर रखें. पृष्ठासन करने समय सिर को पीछे की ओर ढीला छोड़ दें. इस अवस्था में कुछ सेकेंड रुकने का प्रयास करें.
साँस भरें और फिर सीधे खड़े हो जाएँ. यह पूरा एक चरण है. तीन बार इसका अभ्यास करना चाहिए. पेट में अल्सर, उच्च रक्तचाप, श्याटिका या स्लिप डिस्क की समस्या होने पर पृष्ठासन का अभ्यास नहीं करें.
लाभ
पृष्ठासन करने से पेट की माँसपेशियों में खिचाव आता है. इससे पेट के सभी अंगों की कार्यक्षमता बढती है और स्फूर्ति आती है. नियमित अभ्यास से पीठ और कमर के हिस्से में रक्त का संचार बढ जाता है.
पीठ और कमर की जकड़न दूर होती है. तंत्रिकाओं को ताकत मिलती है और ताज़गी की अनुभूति होती है. साथ ही मानसिक संतुलन बढता है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications