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गॉल्स्टोन में खाए जाने वाला खाना
अध्ययन के अनुसार यह पाया गया है कि १० में से ४ लोगों में गॉल्स्टोन पाया जाता है। जबकि कई लोगों को तो यह पता भी नहीं होता है कि उनको गॉल्स्टोन है। इन्हें शांत या पीड़ाहीन गॉल्स्टोन कहते हैं। ऐसे मरीजों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। सामान्य परिस्थिति में अगर किसी को दिक्कतें आती हैं तो डॉक्टर पित्ताशय हटाने की राय देते हैं। ज़्यादातर लोगों में जब पित्ताशय हटा दिया जाता है तब वह अपने अनुसार खाना खा सकते हैं।
गॉल्स्टोन क्या होते हैं?
गॉल्स्टोन छोटे छोटे पत्थर के आकर में होते हैं जो पित्ताशय में जमा हो जाते हैं और यह कोलेस्ट्र्रोल से बने होते हैं। लीवर से पित्त उत्पन्न होता है जो पित्ताशय में जमा होता है। जब तैलीय खाना खाया जाता है तो, पित्ताशय सिस्टिक डक्ट के द्वारा विवश कर पित्त छोटी अंतड़ी में भेजता है। कभी-कभी डॉक्टर में गॉल्स्टोन फँस जाता है जिससे पित्ताशय में दर्द हो सकता है। इसलिए आप जितना तैलीय खाना खायेंगे उतना पित्ताशय में दौरा पड़ने की संभावना बढ़ेगी। यह सही जानना कि कौन सा खाना नहीं खाना चाहिए, इस खतरे को कम करने में मदद करेगा।

गॉल्स्टोन से किसको खतरा हो सकता है?
पुरानी कहावत के अनुसार जिन लोगों पर गॉल्स्टोन का खतरा सबसे ज़्यादा हो सकता है वो हैं: मोटे, चालीस की उम्र के लोग, महिलाएं और जननक्षम। यह पाया गया है कि महिलाओं में मोटापा, गॉल्स्टोन विकसित करने का एक महत्वपूर्ण कारण है। शरीर का वेट बढ़ने से गॉल्स्टोन होने कि संभावना भी बढ़ जाती है। इसी तरह शरीर के वेट का अचानक से गिरना भी गॉल्स्टोन को जन्म दे सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलायों में गॉल्स्टोन के पाए जाने की संभावना ज्यादा है। इसके साथ ही ४० साल से ज्यादा के लोगों में गॉल्स्टोन पाया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं में भी गॉल्स्टोन होने की संभावना ज़्यादा रहती है। जिन लोगों की फॅमिली हिस्ट्री में लोगों को गॉल्स्टोन हुआ है उनको यह बिमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
परहेज करने लायक खाना
उन लोगों को जिन्हें गॉल्स्टोन है या जिन्हें इसका रिस्क है वो इन चीज़ों से परहेज रखें जैसे: अंडे, पोर्क, प्याज, मुर्गा, दूध और दुसरे दूध के पदार्थ, कॉफ़ी, मौसमी, नारंगी, बीन्स, बादाम, कॉर्न, मीट, शराब, चर्बी से भरा हुआ खाना और वनस्पति तेल। तला हुआ खाने से दूर रहने की कोशिश करें। कुछ और ऐसा खाना है जिससे बचने की कोशिश करनी चाहिए, वो हैं: काली चाय, चोकलेट, आइस क्रीम, फल का रस, नकली या कृत्रिम मक्खन, कोल्ड ड्रिंक्स, शलगम, बंधगोभी, जई, गेहूं, जौ और मैदा। इतना ही नहीं, धूम्रपान नहीं करनी चाहिए और तनाव में नहीं खाना चाहिए।
खाने लायक खाना
इस दौरान आपको वैसा खाना खाना चाहिए जो आपके स्वास्थय के लिए हितकर साबित हो। अपना खाना भूनकर, सेंक कर, उबाल कर तैयार करें। खाना जो गॉल्स्टोन में हानि नहीं पहुंचाते हैं वो हैं: चुकंदर, खीरा, सेम, भिन्डी, मीठे आलू, अवोकेडो, विनेगर, लहसन, पके हुए टमाटर, छोटा प्याज, ठन्डे पानी की मछली, नींबू, अंगूर, सेब, बेर, पपीता, नाशपाती और ओमेगा ३ तेल। गॉल्स्टोन में ब्रेड, अन्न, पास्ता, चावल और आलू भी फायदेमंद साबित होते हैं। यह ज़रूरी है कि इन चीज़ों को बिना तेल और फैट के तैयार किया जाए। गॉल्स्टोन से परेशान कई लोग कॉफ़ी, चाय, दूध और फ्रूट जूस को अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी से निकाल देते हैं। और अगर पेय पदार्थ को देखें तो गुनगुने पानी में नींबू का रस डाल कर पीना सेहत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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