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पेट के अल्सर से हैं परेशान तो आजमाएं ये 8 आयुर्वेदिक उपचार
अल्सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है। पहले यह माना जाता था कि अल्सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी द्वारा होता है।
वैज्ञानिको का मानना है कि ये बैक्टीरिया शरीर में गंदे पानी या खराब खाने दृारा पेट में प्रवेश करते हैं। अल्सर तब गंभीर होने लगता है जब आपको कुछ लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे, खून की उल्टी, मल में गहरे रंग का खून आना, उल्टी या मतली महसूस होना, अचानक वजन कम होना या फिर भूख में परिर्वतन होना आदि।
अगर अल्सर का उपचार न किया जाये तो ये और भी विकराल रूप धारण कर लेते हैं। पेप्टिक अल्सर का आयुर्वेद में भी उपचार है इसलिये पहले घरेलू उपचार आजमा कर देंखे और फिर जरुरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

शहद खाएं
1 या 2 चम्मच शुद्ध शहद का सेवन दिन में एक बार करें। यह पेट के अंदर की सतह के घावों पर मरहम का काम करती है, जिससे अल्सर जल्द ठीक होने लगता है।

पत्तागोभी कर जूस
आधी पत्तागोभी को छोटे टुकड़ों में काट लें और इसे मिक्सी में पीस कर इसका रस निकाल लें। इस रस का सेवन सोने से पहले करें।

पानी और मेथी
1 गिलास पानी में 1 छोटा चम्मच मेथी दाना उबालें। ठंडा होने पर इसे छान लें और फिर इसमें थोड़ा शहद मिला कर रोजाना 2 बार पियें।

केला
केले में एंटीबैक्टीरियल तत्व होते हैं जो पेट में अल्सर का बढ़ना रोकते हैं। इसलिये रोजाना ब्रेकफास्ट करने के बाद केला जरुर खाएं।

लहसुन
दिन में 2-3 लहसुन की एक कली का सेवन खाना खाने के बाद जरुर करें।

नारियल तेल
नारियल तेल एक प्राकृतिक सामग्री है जो पेट के कई रोगों को दूर करती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पेट का अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया का खात्मा करते हैं।

एलोवेरा जूस
एलोवेरा जूस को पानी में मिला कर कुछ दिनों तक पियें।

मुलेठी
एक गिलास गरम पानी में 1 छोटा चम्मच मुलेठी का पावडर मिक्स करें। इसे 15 मिनट के लिये ऐसे ही छोड़ दें और बाद में इसे छान कर दिन में तीन बार पियें।



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