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इन कारणों की वजह से ब्लड में बढ़ जाता है प्रोटीन
जब मरीज के खून में अधिक मात्रा में प्रोटीन जमा होने लगता है तो डॉक्टर प्रोटीन के कारणों का पता लगाने के लिए मरीज को ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
रक्त में प्रोटीन की अधिक मात्रा या हाइपरप्रोटीनेमिया कई बीमारियों को दावत दे सकती हैं। अधिक वसा और शुगर युक्त भोजन करने से शरीर में सूजन होने लगती है, जो सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर को बढ़ा देती है। भोजन के अलावा ब्लड में प्रोटीन की मात्रा बढ़ने से भी कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
जब मरीज के खून में अधिक मात्रा में प्रोटीन जमा होने लगता है तो डॉक्टर प्रोटीन के कारणों का पता लगाने के लिए मरीज को ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
उस प्रोटीन के आधार पर मरीज में बोनमैरो के लक्षणों का पता लगाया जाता है। रक्त में अधिक मात्रा में प्रोटीन के कारण होने वाली बीमारियों और उनके लक्षणों के बारे में हम यहां बता रहे हैं।

1. मायलोमा :
मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो कि प्लाज्मा कोशिकाओं के कारण होता है। ये बोनमैरो में एक प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं। वयस्कों में सामान्य रूप से बोनमैरो जहां सक्रिय अवस्था में होता है वहां मल्टीपल मायलोमा पाया जाता है जैसे रीढ़ की हड्डी, खोपड़ी(स्कल), पेल्विस रिब केज, कंधे के आसपास की हड्डियां और हिप्स। ये कोशिकाएं आमतौर पर एंटीबॉडी उत्पन्न करती हैं जो कि खुद एक प्रकार का प्रोटीन होता है। लेकिन ये कोशिकाएं जब कैंसर का रूप धारण कर लेती हैं तो एबनॉर्मल एंटीबॉडी बनने लगती हैं। ये असामान्य एंटीबॉडी ब्लडस्ट्रीम में निकलने लगती है जिसकी वजह से रक्त में प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है।

2. लीवर डैमेज:
रक्त में प्रोटीन की अधिक मात्रा लीवर खराब होने या लीवर संबंधी बीमारी की वजह हो सकता है। लीवर संबंधी बीमारी के शुरूआती दौर में लीवर में सूजन, कमजोर और बड़ा हो जाता है। लीवर में सूजन यह संकेत देता है कि हमारा शरीर किसी संक्रमण से लड़ने या घाव भरने की कोशिश कर रहा है। खराब लीवर ब्लड में दो मुख्य प्रोटीन (एएलटी - एलेनिन ट्रांसमिनेज और एएसटी - एस्पार्टेट ट्रांसमिनेज) को प्रवेश करा देते हैं। लीवर इन दोनों प्रोटीनों को उत्पन्न करता है जो आमतौर पर अमीनो एसिड को मेटाबोलाइज करने में सहायता करता है। हाई ट्राइग्लिसराइड्स, मोटापे, मधुमेह, सिरोसिस, हेपेटाइटिस, ऑटोइम्यून लीवर रोग और ड्रग्स या विषाक्त पदार्थों के कारण लीवर खराब होने से लीवर कोशिकाओं के भीतर वसा जमा होने से इन प्रोटीनों की मात्रा बढ़ सकती है।

3. न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (तंत्रिका नली में गड़बड़ी) :
तंत्रिका नली में गड़बड़ी असामान्य लक्षण है जो कि विकसित हो रहे भ्रूण के दिमाग, रीढ़ या रीढ़ की हड्डी में और जन्म के समय मौजूद होते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान बच्चे के लीवर से एक प्रोटीन उत्पन्न होता है जिसे अल्फा-फेटोप्रोटीन कहते हैं। अधिक मात्रा में प्रोटीन स्त्राव इस बात का संकेत हैं कि बढ़ रहे भ्रूण में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट है। इस वजह से रक्त में प्रोटीन की मात्रा अधिक है।

4. इन्फ्लेमेशन :
जब चोट लगती है या इन्फ्लेमेशन होता है तो इम्यून सिस्टम सी-रिएक्टिव नामक प्रोटीन पैदा करती है। यह प्रोटीन रोगाणुओं से लड़ने के लिए अन्य प्रोटीनों को भी सक्रिय करता है। सी -रिएक्टिव प्रोटीन उत्पन्न होने से रक्त में प्रोटीन का स्तर बढ़ने लगता है। सर्दी या फ्लू जैसे सामान्य संक्रमण और आर्थराइटिस जैसी समस्याएं इन्फ्लेमेशन के सामान्य लक्षण हैं जो प्रोटीन को बढ़ाते हैं। इन्फ्लेमेशन की वजह से कोशिकाएं डैमेज होती है। सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल का अत्यधिक खपत धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उसमें सूजन हो सकती है। यह सी-रिएक्टिव प्रोटीन उत्पन्न होने के कारण होता है।

5. एमाइलोडोडिस (Amyloidosis) :
एमाइलोडिसिस एक असामान्य लेकिन गंभीर बीमारी के लक्षणों का एक समूह है जो पूरे शरीर के ऊतकों और अंगों में एमीलॉयड नामक असामान्य प्रोटीन के जमा होने के कारण होता है। एमीलॉयड प्रोटीन हृदय, किडनी, लीवर, प्लीहा, पेट और अन्य अंगों में जमा हो जाता है। कभी-कभी एमाइलोडोसिस किडनी की बीमारी, रीमैटॉयड आर्थाइटिस और हॉजकिंस जैसी अन्य बीमारियां उत्पन्न कर देता है। जैसे-जैसे अमाइलॉइड प्रोटीन बढ़ता है वैसे वैसे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती हैं और अंगों को ज्यादा नुकसान पहुंचने लगता है।

6. एचआईवी / एड्स :
यदि कोई व्यक्ति एचआईवी / एड्स से पीड़ित है तो उसके रक्त में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। जीर्ण एचआईवी -1 संक्रमण वाले व्यक्तियों से प्राप्त ऑटोप्सी टिशू से पता चला है कि ग्लाइकोप्रोटीन 120 (जीपी 120) इनमें से कुछ व्यक्तियों के प्लीहा और लिम्फ नोड्स में उच्च सांद्रता में मौजूद था। पुराने एचआईवी से संक्रमित और एड्स के रोगियों के रक्त में भी ग्लाइकोप्रोटीन-120 की अधिक मात्रा पायी गयी। इससे पता चलता है कि रक्त में प्रोटीन का स्तर एचआईवी वाले लोगों में ज्यादा पाया जाता है।

रक्त में अधिक प्रोटीन की मात्रा के लक्षण :
- भूख में कमी
- ज्यादा थकान
- पाचन समस्या
- दस्त
- अचानक वजन घटना
- लगातार बुखार
- खड़े होने या बैठने पर चक्कर आना
- हाथ और पैर की उंगलियों में झुनझुनी



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