Latest Updates
-
Independence Day 2026: ChatGPT से बनाएं तिरंगे के साथ अपनी देशभक्ति वाली फोटो, बस ये Prompts करें कॉपी-पेस्ट -
Hariyali Teej Solah Shringar: हरियाली तीज पर क्यों जरूरी है सोलह श्रृंगार? यहां देखें 16 श्रृंगार की लिस्ट -
Independence Day 2026: 15 अगस्त को जाने वाले हैं लाल किला? तो ये 5 बातें जरूर जान लें, वरना लौटना पड़ेगा वापस -
World Organ Donation Day 2026: शरीर के कौन से अंग किए जा सकते हैं दान? समझें पूरा प्रोसेस और नियम -
World Organ Donation Day 2026: आज है विश्व अंगदान दिवस, जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
कौन हैं कोमल रानी स्वर्णकार? जिनके गोविंदा संग हो रहे अफेयर के चर्चे, जानें दोनों के रिश्ते का पूरा सच -
सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं क्या करें और क्या नहीं? जानें खाने-पीने और सोने से जुड़े नियम -
Surya Grahan 2026: आज लगेगा साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, दिन में छा जाएगा अंधेरा; जानें भारत में दिखेगा? -
Hariyali Amavasya 2026: क्यों मनाई जाती है हरियाली अमावस्या? जानें स्नान-दान का मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Sawan Shivratri Vrat Katha 2026: सावन शिवरात्रि पर जरूर करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान शिव दूर करेंगे हर संकट
पीठ दर्द हो तो लें आयुर्वेद के अनुसार आहार
आयुर्वेद पीठ दर्द के उपचार में बहुत प्रभावी होता है। वात प्रकृति के लोग कुछ विशेष प्रकार की जीवनशैली और गतिविधि अपनाकर कमर के दर्द को आश्चर्यजनक तरीके से कम कर सकते हैं।
आयुर का अर्थ है जीवन। वेद का अर्थ है ज्ञान। भारत में आयुर्वेद की परंपरा लगभग 2000 वर्ष पुरानी है। वात, पित्त और कफ़ शरीर के तीन दोष होते हैं। जब ये तीन सामान्य स्तर पर होते हैं तो व्यक्ति का स्वास्थ्य सामान्य होता है जबकि बीमारी के समय इनमें से किसी का स्तर असामान्य हो जाता है। कमर या पीठ का दर्द एक आम और व्यापक स्वास्थ्य समस्या है। आयुर्वेद के अनुसार पीठ का दर्द वात के कारण होता है।
पीठ दर्द के आम कारणों में वजन अधिक होना, ओस्टोपोरसिस, ओस्टोआर्थराइटिस, शारीरिक गतिविधि में कमी, वायरल संक्रमण, ट्यूमर आदि शामिल हैं। संतुलित और नियंत्रित आहार के द्वारा पीठ के दर्द से बचा जा सकता है। इस लेख को पढने के बाद आप जान जायेंगे कि आयुर्वेद के अनुसार किस पारकर का आहार लेकर आप पीठ दर्द को रोक सकते हैं।
आयुर्वेद पीठ दर्द के उपचार में बहुत प्रभावी होता है। वात प्रकृति के लोग कुछ विशेष प्रकार की जीवनशैली और गतिविधि अपनाकर कमर के दर्द को आश्चर्यजनक तरीके से कम कर सकते हैं। कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन से दर्द बढ़ जाता है जबकि कुछ पदार्थों के सेवन से दर्द से आराम मिलता है। वात को शांत करने वाले आहार से पीठ दर्द से आराम मिलता है। एक महीने तक गरम, हल्का मसालेदार, पोषक आहार लें और फर्क देखें। पीठ दर्द को रोकने के लिए आयुर्वेद के अनुसार आहार:

हल्दी
हल्दी अपने एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है। हल्दी में कर्कुमिन नामक तत्व पाया जाता है जो उतकों को नष्ट होने और सूजन आदि बचाता है और इससे मांसपेशियां उचित तरीके से काम करती हैं। सलाद पर हल्दी छिडकें या इसे सब्जी में मिलाएं।

फाइबर युक्त आहार
हल्का और आसानी से पचने वाला आहार लें। कब्ज़, गैस्ट्रिक समस्याएं और पीठ का दर्द आपस में संबंधित है। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन न करें जिनसे कब्ज़ की समस्या हो। इसके अलावा फाइबर युक्त आहार लें। कब्ज़ से बचने के लिए 5 ग्राम बृहत् त्रिफला पाउडर को पानी में मिलाकर लें।

मसाला चाय
आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार बिशप घास के बीज की चाय दर्द और कब्ज़ से आराम दिलाने में बहुत सहायक है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है जो दर्द को कम करता है। वेलेरियन, कैमोमाइल, स्कल कैप, कृष्ण कमल का फूल और जटामासी भी ऐसा ही असर करते हैं।

लहसुन
लहसुन में दर्द निवारक गुण होता है। लहसुन की 10 कलियों को नारियल के तेल में सुनहरा होने तक तलें। इस तेल का उपयोग मालिश करने के लिए करें क्योंकि इससे रक्त प्रवाह में सुधार आता है, मांसपेशियों की जकड़न कम होती है और दर्द से आराम मिलता है।

दुग्ध उत्पाद
कैल्शियम और विटामिन डी के द्वारा अपनी रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करें। डेयरी उत्पाद कैल्शियम का अच्छा स्त्रोत हैं। कैल्शियम और विटामिन डी हड्डियों को मज़बूत बनाते हैं। आमतौर पर पीठ दर्द का मुख्य कारण कैल्शियम की कमी होता है। यह विशेष रूप से स्तनपान करवाने वाली महिलाओं में होता है।

अदरक
अदरक के एंटी इंफ्लेमेटरी और पेट को ठीक करने का गुण होता है। यही कारण है कि अदरक पीठ दर्द से आराम दिलाता है। अदरक की चाय पीयें या इसे कद्दूकस करके अपने वेजिटेबल जूस में मिलाएं।
इन खाद्य पदार्थों का सेवन न करें:
आयुर्वेद के अनुसार पीठ के दर्द को रोकने के लिए उपरोक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने अलावा आपको ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए जो पीठ दर्द को बढ़ाते हैं। अनाज और चीनी का सेवन कम करें। इससे लेप्टिन और इन्सुलिन का स्तर बढ़ आजाता है जिससे सूजन और दर्द बढ़ता है। इसके अलावा राजमा, उड़द दाल, भिन्डी और कढी का सेवन न करें। टेल हुए पदार्थ न खाएं।



Click it and Unblock the Notifications