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सर्दियों में तिल के तेल लगाने के है अनेक फायदें

भारतीय घरों और रसोई में कई तरह का तेल और उपयोग में लिया जाता है। चाहे वह खाने का तेल हो या सिर में लगाने का।
सरसों, नीम, तिल, आलिव आयल, सोयाबीन, मूंगफली, नारियल तेल आदि तेलों में बडे़ ही गुण पाए जाते हैं।
इसी तरह से तिल का तेल भी बहुत ही स्वास्थ्य वर्धक माना जाता है। तिल का तेल तिल के बीजों से प्राप्त एक खाने योग्य वनस्पति तेल है। दक्षिण भारत में खाना पकाने के तेल के रूप में इस्तेमाल किये जाने के साथ ही इसका प्रयोग अक्सर चीनी, कोरियाई और कुछ हद तक दक्षिण पूर्व एशियाई भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। सर्दियों के मौसम में तिल के तेल की मालिश करने से ठंड से बचाव होता है। तिल और मिश्री का काढ़ा बनाकर खांसी में पीने से जमा हुआ कफ निकल जाता है।
इसके अलावा ही हिंदू धर्म में, तिल या तिल के तेल का मंदिरों में देवताओं के सामने रखे दिये में प्रयोग किया जाता है। तिल के तेल का हिन्दू मंदिरों में पूजा करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
आइए जानते है कि खाने में तिल के तेल या उसके बीजों को इस्तेमाल करने से क्या क्या फायदे हो सकते है।

नींद बढ़ाए
तिल के तेल में tryptophan की अधिकता होती है। जो कि शरीर में सेरोटोनिन नामक रसायन बनाने में मदद करता है, जो कि शरीर में नींद को बनाने में सहायक होता है। तिल का तेल या इसका पेस्ट यूज करने से यह नींद के लिए लाभदायक है।

खून बढ़ाए
तिल के तेल या सीसम के बीज में भरपूर मात्रा में आयरन होता है जो कि एनिमिया से बचाता है। एक टेबल स्पून सीसम के बीजों को पानी में कुछ देर भिगोकर रखने से फिर इसे पीसकर दूध में मिला ले फिर गुड1 को मिलाकर पी लेने से शरीर में खून की मात्रा बढ़ती है और एनिमिया दूर होता है।

एंटीऑक्सीडेंट
तिल का तेल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। वाइरस, एजिंग और बैक्टीरिया से जितने भी नुकसान शरीर के ब्लडस्ट्रीम के अदंर पहुचे हैं यह उसको सही करता है।

हैंगऑवर से बचाएं
सीसम में सीसेमिन नामक तत्व पाया जाता है जो कि लीवर को बचाता है जो कि ज्यादा शराब पीने के कारण हुआ हो
मधुमेह 2011 में एक स्टडी के मुताबिक बताया गया था कि तिल का तेल मधुमेह रोगियों, जो कि टाइप 2 डायबीटीज से पीडि़त हैं उनके लिये दवा का काम करता है।

त्वचा की देखभाल
इसमें विटामिन ई और विटामिन बी पाया जाता है जो कि त्वचा को जवां और चमकदार बनाता है।

गठिया
जिन लोगो को गठिया रोग है उनको इस तेल से मालिश करनी चाहिये, इससे सूजन कम होती है और दर्द कम होता है।

मौखिक स्वास्थ्य
यह तेल दांत की सड़ान और मसूडों से खून को बहने से रोकता है तथा दांत, मसूडों और जबड़े को मजबूत बनाने के लिए काम आता है।

सर्दी-जुखाम
सीने में जमाव और साइनस की समस्या को दूर करना है तो इस तेल को बस सूंघ लें और फिर सर्दी जुखाम से मुक्त हो जाएं।

रूसी
बालों में अगर ड्रेंडफ हो गया है तो इस तेल को बालों में नियमित रूप से लगाएं और रूसी से मुक्ती पाएं।

सोडियम में कमी लाए
एक स्टडी में बताया गया है कि सीसम के तेल का सेवन करने से ना केवल ब्लड़ प्रेशर कम होता है बल्कि यह शरीर में सोडियम की मात्रा को भी कम करने में असरदार है

कैल्शियम
यह तेल हड्डी को मजबूत बनाता है, सिरदर्द भगाता है और पीएमएस सिंड्रोम जैसी बीमारी को भी दूर करता है।

कैंसर से बचाव
इसमें एंटीऑक्सीडेंट तथा मज़बूत प्राकृतिक पदार्थ होता है जो कि कैंसर विरोधी होता है। इससे शरीर में कैंसर सेल की ग्रोथ नही हो पाती।

तनाव से मुक्ति
अगर आप इस तेल का नियमित उपयोग करेंगे तो आपका तनाव, थकान, अनिंद्रा जैसी परेशानियां ठीक होंगी।

मालिश के लिये उपयोग
तिल के तेल को आसानी से त्वचा में प्रविष्ट होने वाला माना जाता है। इससे शिशु की मालिश करने से बच्चे की बढत होती है और उसे ताकत मिलती है।

डाइजेशन के लिए
तिल के तेल को अच्छे फाइबर के गुणों के लिए जाना जाता है। ये पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होताहै। रोजाना सीसम ऑयल खाने से पेट बाउल मूवमेंट को साफ करता है साथ ही कब्ज होने से बचाता है इसके अलावा ये आपके कोलोन को हेल्दी बनाए रखता है।



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