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बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण एक मात्र ऐसी अभिनेत्री रही हैं, जिन्होंने अपनी डिप्रेशन की कहानी का खुलासा किया। World Health Organisation की एक रिपोर्ट के तहत भारत में लगभग 56 million लोग डिप्रेशन और 38 million लोग एंक्जाइटी डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। मेंटल डिस्ट्रेस की वजह से भारत में हर एक घंटे में स्टूडेंट suicide कर रहा है। हांलाकि भारत में अभी भी डिप्रेशन को लोग गंभीरता से नहीं लेते।
डिप्रेशन को एक रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है। कोई भी व्यक्ति डिप्रेस्ड की अवस्था में स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। उस व्यक्ति-विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहाँ तक कि संबंध तक बेमानी हो जाते हैं। इनके अतिरिक्त अवसाद के ९० प्रतिशत रोगियों में नींद की समस्या होती है। मनोविश्लेषकों के अनुसार अवसाद के कई कारण हो सकते हैं।
अवसाद अक्सर दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी के कारण भी होता है। न्यूरोट्रांसमीटर्स दिमाग में पाए जाने वाले रसायन होते हैं जो दिमाग और शरीर के विभिन्न हिस्सों में तारतम्यता स्थापित करते हैं। इनकी कमी से भी शरीर की संचार व्यवस्था में कमी आती है और व्यक्ति में अवसाद के लक्षण दिखाई देते हैं।
न्यूरोट्रांसमीटर्स की कमी को दूर करने के लिये आप अपने खान-पान में कुछ बदलाव कर सकते हैं और खुद को बेहतर महसूस करवा सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आप डिप्रेशन की बीमारी से गुजर रहे हैं तो नीचे दिये हुए फूड को अपनी डाइट में शामिल करना ना भूलें।

1. पानी
अगर आप सोडा या सॉफ्ट ड्रिंक काफी पीते हैं तो आपको काफी ज्यादा डिप्रेशन हो सकता है। ऐसे में इस बात का खास ख्याल रखें कि शरीर में पानी की कमी ना होने दें नहीं तो आपको डीहाइड्रेशन हो सकता है
जिसके चलते आपका मेटाबॉलिज्म बिगड़ सकता है। खुद को डिप्रेशन से बचाने के लिये पानी भरपूर मात्रा में पिएं और ऐसी साग सब्जी खाएं जिसमें पानी की मात्रा अधिक होती हो।
2. दूध
दूध में विटामिन डी होता है जो कि मूड को काफी बेहतर बनाने में मदद करता है। विटामिन डी ब्रेन के अंदर neurotransmitter की तरह काम करता है। इसलिये रात को सोने से पहले हमेशा गुनगुना दूध पिएं।
3. दही
दही में प्रोटीन, फैट्स और प्रोबायोटिक बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो कि दिमाग का मूड बदलने में काफी काम आते हैं। इसमें जो फैट होता है वह ब्रेन को बूस्ट करता है।

4. हरी पत्तेदार साग सब्जी
केल, पालक और एस्परैगस आदि डिप्रेशन से लड़ने में कार्यगर होते हैं। पालक में ढेर सारा फॉलिक एसिड होता है जो कि शरीर में रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करता है। इससे दिमागी ताकत बढती है और मूड ठीक होता है।
5. मछली
जब भी आपको अवसाद हो तो तुरंत ओमेगा -3 फैटी एसिड की मात्रा अपने खाने में बढ़ा दीजिये, जैसे मछली, और वॉलनट्स। मछली में आप सलमन, हेरिंग, लेक ट्राउट, सार्डिन, मैकेरल या टूना खा सकते हैं। इन मछलियों में जो फैट होता है वह मूड को बैलेंस रखने में मदद करता है।
6. बीटरूट
बीटरूट में ढेर सारे पोषक तत्व होते हैं जैसे विटामिन, फोलेट, Uridine और Magnesium आदि। यह ब्रेन में neurotransmitters की तरह काम करते हैं जो कि मूड को बदलने में मदद करते हैं।
7. डार्क चॉकलेट
डार्क चॉकलेट एंटीऑक्सीडेंट से भरी होती है जो कि न केवल स्किन के लिये अच्छी मानी जाती है बल्कि दिमाग में भी फील गुड हार्मोन बढाती है। अगर आप इसे रोजाना खाएंगे तो आपको अंदर से अच्छा महसूस होने लगेगा।
8. ऑलिव ऑइल
ऑलिव ऑइल में एंटीऑक्सीडेंट और Monosaturated Fatty Acids पाए जाते हैं जो कि ब्रेन की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह दिल की बीमारी को तथा डिप्रेशन को दूर करने में बड़े मददगार होते हैं।

9. मशरूम
यह प्रोबायोटिक होता है जो कि आपके गट में हेल्दी बैक्टीरिया बनाने का काम करता है। इसके साथ ही यह ब्रेन में neurotransmitters की तरह काम करता है। यह आपके मेंटल स्टेट को बैलेंस कर के दिन को खुश रखता है।
10. अखरोट और काजू
इन दोंनो में मैगनीशियम होता है। काजू में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि डिप्रेशन को दूर करने में मदद करता है और ब्रेन की हेल्थ को सुधारता है।
11. काली सेम यानी ब्लैक बींस
शरीर में बींस काफी धीरे धीरे डायजेस्ट होता है। यह शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखने में मदद करता है। और जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल बैलेंस रहता है तो आपका मूड भी अच्छा होता है। इसमें फोलेट और मैगनीशियम होता है जो कि डिपेशन को दूर करने में मदद करते हैं।
12. टमाटर
टमाटर खाने में आपका मूड बहुत अच्छा रहता है क्योंकि इसमें लइकोपीन नाम का एंटीऑक्सिडेंट पाया जाता है जो अवसाद से लड़ने में काफी मददगार साबित होता है। एक स्टडी में यह पाया गया है कि जो लोग सप्ताह में दो से छे बार टमाटर खाते हैं वे 46% तक कम अवसादग्रस्त होते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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