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वेटलॉस करने की है चाहत, तो खाने से जुड़ी इन आदतों को कह दें अलविदा
परफेक्ट फिगर पाने की चाहत तो हम सभी की होती है, लेकिन फिर भी अधिकतर लोग अपने बढ़े हुए वजन के कारण परेशान रहते हैं। इसके पीछे कहीं ना कहीं हमारी खान-पान की आदतें भी जिम्मेदार होती है। कुछ ऐसी बातें होती हैं, जिन पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है, लेकिन फिर भी वह हमारे वेट लॉस प्रोग्राम को बेहद प्रभावित करते हैं। मसलन, सुबह जल्दी-जल्दी में नाश्ता किए बिना ही घर से निकल जाना या अपना पसंदीदा टीवी शो देखते समय चिप्स खाना।

यहां आपको यह समझना चाहिए कि आपकी एक छोटी सी बुरी आदत ने आपका वजन बढ़ा दिया है। इसमें भी सबसे बुरी बात यह है कि आपको इस बात का अहसास ही ना हो कि आप अपने आहार में क्या कर रहे हैं। तो चलिए आज इस लेख में हम आपको आहार से जुड़ी कुछ ऐसी आदतों के बारे में बता रहे हैं, जो वेट लॉस की राह में रोड़ा पैदा करती हैं-
बिना सोचे-समझे खाना
बिना सोचे-समझे खाना भी आपके वजन बढ़ने की एक मुख्य वजह हो सकती है। भले ही शाम 7 बजे से पहले खाना आपको मानसिक तृप्ति प्रदान करता है। लेकिन कई बार जब हम रात में देर तक जगते हैं तो ऐसे में फूड क्रेविंग्स होती हैं। इस स्थिति में अधिकतर लोग पेस्ट्री, फ्राइड फूड, पैकेज्ड फूड व कोल्ड ड्रिंक्स आदि कई तरह के फूड्स का सेवन करते हैं। आप हमेशा एक स्लिम और टोंड फिगर चाहते हैं, तो ऐसे में आपको माइंडफुल ईटिंग पर जोर देना चाहिए। मसलन, आप अपने जंक फूड को चटपटे सलाद और रोस्टेड सब्जियों से स्विच कर सकते हैं।
मीठे का अधिक सेवन करना
अध्ययनों से पता चलता है कि जब आप थके हुए होते हैं, तो आप ऊर्जा के लिए या खुद को एक्टिव रखने के लिए मिठाई का सहारा लेने की अधिक संभावना रखते हैं। शुगरी प्रोसेस्ड फूड आपके मस्तिष्क में “फील-गुड“ न्यूरोकेमिकल डोपामाइन के रिलीज होने की वजह बनता है। शुगर क्रेविंग कई तरह की स्थितियों के कारण हो सकता है, जिसमें डिप्रेशन, नींद की कमी, पीरियड्स क्रेविंग और डायबिटीज शामिल हैं। कभी-कभी मीठा खाने की इच्छा निर्जलीकरण के कारण होती है, इसलिए नहीं कि हम उन्हें खाने के आदी हैं। ऐसे में मीठे पर बहुत अधिक निर्भर होने के स्थान पर हमें इससे होने वाले नुकसानों के बारे में जानना चाहिए। साथ ही, अधिक प्रोटीन खाने, व्यायाम करने और पर्याप्त नींद लेकर स्वीट क्रेविंग्स को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

तनावग्रस्त होने पर खाना
यह एक आम वजह है, जिसके कारण व्यक्ति का वजन कम नहीं हो पाता है। इमोशनल ईटिंग अक्सर काम के तनाव, पैसे की चिंता, रिश्ते की कठिनाइयों या स्वास्थ्य समस्याओं के परिणामस्वरूप होता है। कई अध्ययनों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्ट्रेस ईटिंग अधिक आम है। लोग अपनी भावनाओं को शांत करने के लिए खाते हैं, और इमोशनल ईटिंग करने वाले लोग आइसक्रीम, कुकीज़, चॉकलेट, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज़ और पिज्जा जैसे कंफर्ट फूड को खाना बेहद पसंद करते हैं, जिससे वजन बढ़ता है। शोधकर्ताओं द्वारा तनाव और अधिक खाने को वजन बढ़ने से जोड़ा गया है।
खाने को लेकर लापरवाही बरतना
जब किसी व्यक्ति का दिमाग व्यस्त रहता है, तो वह इस बात से अनजान होता है कि वह क्या खा रहा है या कितना खा रहा है। बोरियत से बचने के लिए भी कुछ लोग खाते हैं, भले ही उन्हें उस समय भूख हो या ना हो। इतना ही नहीं, टीवी देखते समय या फोन पर बातचीत करते हुए भी लोग भूख के बिना भोजन करते हैं। क्या आपने कभी टीवी पर किसी एड में सेलेब्स डिलिशियस बर्गर खाते हुए देखा है और फिर उसे ऑर्डर करने के लिए आपका ललचाया है? ऐसा हम सभी के साथ कभी ना कभी अवश्य हुआ है। इस स्थिति से बचना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है।
फूड पोर्शन का ध्यान ना रखना
कई बार जब आंखों के सामने खाने के कई विकल्प मौजूद होते हैं या फिर मनपसंद कोई फूड आइटम होती है, तो हम बिना सोचे-समझे उसे खाना शुरू कर देते हैं। इतना ही नहीं, खाते समय हम पोर्शन साइज पर भी ध्यान नहीं देते हैं। जबकि यह वास्तव में बेहद आवश्यक है। बड़ी मात्रा में खाने से बॉडी फैट को बढ़ावा मिलता है, बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, मस्तिष्क के कार्य में बाधा आती है और यह गंभीर अपच का कारण बन सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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