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डायबिटीज के मरीजों के लिए पोहा या इडली क्या है बेस्ट ऑप्शन, क्लिक कर जानें

आज कल के हमारे बीजी शेड्यूल में हम अपने खान-पान का अच्छे से ध्यान नहीं रख पाते। कई लोग तो जल्दबाजी में नाश्ता करना ही भूल जाते हैं। जिसका बुरा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। कई लोग कम समय में जल्दी बनने वाले नाश्ते के विकल्प को चुनना पसंद करते हैं। ऐसे में आफ पोहा का सेवन कर सकते हैं। ये न सिर्फ आपके स्वास्थ के लिए अच्छा है, बल्कि डायबिटीज के मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। पोहा ग्लूटेन फ्री होने के साथ फैट फ्री भी होता है। यह अपके दिल को भी स्वस्थ रखने में काफी मदद करता है। तो वहीं कुछ लोग नाश्ते में पोहा खाने के स्थान पर इडली खाना पसंद करते हैं। लेकिन अगर इन दोनों के पोषक मूल्यों की बात की जाएं तो, कौन सा नाश्ता आपके स्वस्थ के लिए अच्छा विकल्प है, आइए आपको बतातें हैं।

इडली और पोहे में बेहतर कौन?
सुबह के नाश्ते में पोहा खाना सबसे अच्छा विकल्प होता है। पोहे में लगभग 70 प्रतिशत स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट और 30 प्रतिशत फैट होता है। इसमें मौजूद फाइबर धीरे-धीरे खून के प्रवाह में चीनी को भेजने का काम करता है। ताकि अचानक से स्पाइक्स से बचा जा सके। इसलिए अगर आप अपने दिन भर के भूख को मिटाना चाहते हैं, तो चावल, इडली या डोसा खाने की जगह पोहा को चुनें। क्योकि इसे खाने से आपको कार्ब्स की एक स्वस्थ खुराक मिलती है।
पोहा और इडली दोनों प्रोबायोटिक्स के साथ विटामिन बी से भरपूर होता हैं। लेकिन सफेद चावल की तुलना में पोहा में आयरन और कैल्शियम की मात्रा ज्यादा होती है। पोहे में सफेद चावल की तुलना में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है। चावल में प्रोटीन की न्यूनतम मात्रा के साथ कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होता है। ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप चावल किस तरह के चावल को चुन रहे हैं, और उसे कैसे पका रहे हैं। पोहा बनाने से पहले इसे उबाला जाता है, और फिर इसे चपटा किया जाता है। जिसके बाद आप इसे कच्चा भी खा सकते हैं, और पका कर भी खा सकते हैं।पोहे को मटर, फूलगोभी, गाजर, धनिया जैसी कई सब्जियों के साथ पकाया जाता है, जिसके कारण आपका नाश्ता ज्यादा पौष्टिक बन जाता है। ये नाश्ता स्वाद के साथ कम समय में तैयार होने वाला है। जो आपके पाचन तंत्र को भी सही रखता है।

पंचन के लिए अच्छा विकल्प है पोहा
पोहा आपके पेट के लिए बहुत हल्का होता है, जिसके कारण ये आसानी से पच जाता है। इसलिए, इसे सुबह के नाश्ते या शाम के नाश्ते के रूप में खाया जा सकता है। पोहा कभी भी आपके पेट में सूजन का कारण नहीं बनेगा। यहां तक की पोहा करने के बाद आपको जल्दी भूख नहीं लगेगी। पोहे में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। इसमें आवश्यक विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भी शामिल होते हैं। पोहे में करी पत्ते का तड़का बनाने के कारण ये दिल को भी स्वस्थ रखता है। अगर आप अपने पोहे में मूंगफली मिलाते हैं, तो इससे आपके नाश्ते में कैलोरी की मात्रा बढ़ जाती है। साथ ही इससे एंटीऑक्सिडेंट और प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत बन जाता है। इसलिए अगर आप डाइटिंग कर रहे हैं, या मोटापे से परेशान हैं, तो अपने नाश्ते में मूंगफली को इग्नोर कर सकते हैं।

समग्र स्वास्थ्य के लिए पोहा अच्छी खुराक
पोहा को प्रोबायोटिक माना जाता है। जैसे-जैसे यह आपके अंदर जाता है, अच्छे बैक्टीरिया को बरकरार रखते हुए आंत के स्वास्थ्य को बढ़ाता है। पोहे में आयरन की मात्रा ज्यादा होने के कारण यह आयरन की कमी से परेशान लोगों के नाश्ते के लिए बेहतर ऑप्शन होता है।
देसी पोहा जिंक, आयरन और पोटेशियम जैसे जरुरी खनिजों से भरपूर होता हैं। जिंक इम्युनिटी और मेटाबॉलिज्म में आपकी मदद करता है। बता दें कि आयरन आपकी ग्रोथ के लिए जरूरी है, और पोटैशियम फ्लूइड बैलेंस को फायदा पहुंचाने का काम करता है।

पोहा खाने के तरीके
पोहा एक ऐसा व्यंजन है जिसे आप कई तरह से खा सकते हैं। सब्जियों, हरी मटर को मिलाकर आप इसे जल्दी और हेल्दी तरीके से तैयार कर सकते हैं। इसका स्वाद बढ़ाने के लिए इसके ऊपर आप थोड़ा सा नीबू का रस भी डाल सकते हैं। कभी-कभी आप इसे गुड़ और नारियल के साथ मिलाकर भी खा सकते हैं। बिहार यूपी जैसे राज्यों में पोहा और दाही भी बहुत शोक से खाया जाता है। ये आपके पेट को ठंडा भी रखता है। इसके अलावा आप पोहे का परांठा भी बना कर खा सकते हैं। और पोहे की नमकीन भी बना कर नाश्ते के रूप में स्टोर करके रख सकती हैं।



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