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क्या ज्यादा मीठा खाने से होती है बच्चों को डायबिटीज? एक्सपर्ट से जानें ऐसे ही कई मिथकों की सच्चाई
Diabetes In Children Causes: डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जो आज के समय में महामारी का रूप ले चुकी है. जहां पहले यह बीमारी ज्यादातर उम्रदराज लोगों देखने को मिलती थी। वहीं, आजकल बच्चे भी इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं। गलत खानपान, खराब जीवनशैली और जेनेटिक कारणों की वजह से बच्चों में डायबिटीज की बीमारी हो सकती है। ज्यादातर माता-पिता मानते हैं कि बहुत ज्यादा मिठाई या चॉकलेट खाने से ही बच्चों को डायबिटीज होती है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या सिर्फ मीठा ही बच्चों में बढ़ते डायबिटीज का कारण है? इस विषय पर बेहतर जानकारी प्राप्त करे के लिए हमनें बात की नोएडा के सीनियर कंसल्टेंट पीडियाट्रिशन और नियोनेटोलॉजिस्ट, डॉ. अमित गुप्ता से. तो आइए, जानते हैं बच्चों में तेजी से बढ़ रहे हैं डायबिटीज के मामलों का सही कारण क्या है?
डॉ. अमित गुप्ता के मुताबिक, बदलती लाइफस्टाइल, घंटों स्क्रीन टाइम, बाहर का खाना, मोटापा और कम एक्टिविटी, ये सब मिलकर आज कई बच्चों को डायबिटीज की ओर धकेल रहे हैं। कई बार बच्चे चुपचाप इस बीमारी से जूझते रहते हैं और माता-पिता को देर से पता चलता है। इसलिए जरूरी है कि हम पुराने मिथकों को भूलकर सही जानकारी समझें।

बच्चों में डायबिटीज के लिए सिर्फ शुगर जिम्मेदार नहीं
जब भी कोई डायबिटीज शब्द सुनता है, तो दिमाग में सबसे पहले चीनी या मिठाई आती है। लेकिन डॉ. अमित गुप्ता के अनुसार, चाइल्डहुड डायबिटीज सिर्फ मीठा खाने की वजह से नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर इंसुलिन नामक हार्मोन को कैसे बनाता और इस्तेमाल करता है। बच्चों में डायबिटीज के केस लगातार बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है लगातार घंटों बैठे रहने की आदत। आजकल बच्चे घंटों मोबाइल, टीवी या टैब पर लगे रहते हैं, बाहर खेलने का समय कम होता जा रहा है और जंक फूड उनकी डाइट का बड़ा हिस्सा बन गया है। ऐसे में, शरीर में फैट बढ़ता है और धीरे-धीरे इंसुलिन रेसिस्टेंस बनने लगता है, जिससे डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है.
बच्चों में डायबिटीज के शुरुआती लक्षण
बार-बार प्यास लगना
बहुत ज्यादा पेशाब आना
बिना वजह वजन घटना
थकान रहना
बार-बार बीमार पड़ना
बच्चों में डायबिटीज के बारे में फैले सबसे कॉमन मिथक
मिथ: ज्यादा मीठा खाने से बच्चे को डायबिटीज हो जाता है
सच्चाई: मीठा खाना डायबिटीज का सीधा कारण नहीं है। टाइप 1 डायबिटीज में बच्चे की इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देता है। इसका चीनी खाने से कोई लेना-देना नहीं है। अक्सर ये जेनेटिक्स या परिवार में डायबिटीज के इतिहास से जुड़ा होता है।
मिथ: डायबिटीज सिर्फ बड़ों को होता है
सच्चाई: पहले टाइप 2 डायबिटीज सिर्फ वयस्कों में देखा जाता था, लेकिन अब बच्चों में भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके कुछ प्रमुख कारणों में जंक फूड का अत्यधिक सेवन, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम, मोटापा, शारीरिक एक्टिविटी की कमी शामिल हैं.
मिथ: डायबिटीज होने पर बच्चे को बाहर का खाना पूरी तरह छोड़ना पड़ता है
सच्चाई: डायबिटीज का मतलब खाना बंद करना नहीं है। मॉडरेशन यानी नियंत्रित मात्रा में खाना सबसे जरूरी है। बच्चा अपनी पसंदीदा चीजें भी खा सकता है, बस मात्रा और टाइमिंग का ध्यान रखना होगा। बेहतर है कि बच्चे की डाइट में ताजे फल, सब्जियां, फाइबर, साबुत अनाज और हेल्दी स्नैक्स शामिल हों. बच्चे को घर पर ही हेल्दी स्नैक्स बनाकर देना बेस्ट है.
बच्चों को डायबिटीज से कैसे बचाएं?
रोज कम से कम 60 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी कराएं।
बच्चों को साइकिलिंग, रनिंग, स्पोर्ट्स जैसी फिजकल एक्टिविटी के लिए प्रोत्साहित करें।
कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेट जूस, चॉकलेट, पेस्ट्री की जगह हेल्दी विकल्प दें।
फैमिली हिस्ट्री हो तो नियमित ब्लड शुगर चेकअप जरूर कराएं
निष्कर्ष
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे सही समय पर पहचानकर आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। सही लाइफस्टाइल, सही खानपान और नियमित जांच से बच्चों को डायबिटीज की चपेट में आने से बचाया जा सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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