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गर्भधारण की कोशिश कर रही महिलाओं के लिए वरदान हैं करेक्टिव सर्जरी, डॉक्टर से जानें इसके फायदे
Corrective Surgeries Improve Fertility: मां बनाना हर शादीशुदा महिला का सपना होता है। लेकिन आजकल की बदलती जीवनशैली में इंफर्टिलिटी महिलाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। कई महिलाएं सालों तक कोशिश करने के बाद भी मां नहीं बन पाती हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि इनफर्टिलिटी का प्रमुख कारण हार्मोनल समस्या होती है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार इनफर्टिलिटी का कारण शरीर की संरचनात्मक समस्या (Structural Problems) भी हो सकती है। यानी गर्भाशय या फैलोपियन ट्यूब्स में कोई रुकावट या बनावट की गड़बड़ी गर्भधारण में रुकावट डालती है। ऐसी समस्याएं अक्सर तब पता चलती हैं जब महिला कई बार कोशिश के बावजूद गर्भवती नहीं हो पाती या बार-बार गर्भपात होता है। हालांकि, आज के समय में मेडिकल साइंस इतनी आगे बढ़ चुकी है कि ऐसी समस्याओं का इलाज अब बहुत आसान हो गया है। मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (Minimally Invasive Surgery) जैसे लैप्रोस्कोपी और हिस्टरोस्कोपी के जरिए न सिर्फ न सिर्फ महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या को दूर किया जा सकता है, बल्कि वे प्राकृतिक रूप से गर्भधारण भी कर सकती हैं। आज इस लेख में गुड़गांव स्थित मदरहुड हॉस्पिटल्स की वरिष्ठ सलाहकार - प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं उन्नत लेप्रोस्कोपिक सर्जन, डॉ कुसुम लता से जानते हैं कि कैसे करेक्टिव सर्जरी महिलाओं को बांझपन के संरचनात्मक कारणों पर काबू पाने में मदद कर सकती है -

कब संरचना बनती है गर्भधारण करने में रुकावट?
हर महिला के शरीर की संरचना अलग होती है। कई बार गर्भाशय या ट्यूब्स में ऐसी छोटी-छोटी दिक्कतें होती हैं जो सामान्य रूप से महसूस नहीं होतीं, लेकिन गर्भ ठहरने में बड़ी बाधा बन जाती हैं, जैसे -
फाइब्रॉयड: ये गर्भाशय में बनने वाली छोटी गांठें होती हैं जो कैंसरस नहीं होतीं, लेकिन गर्भाशय का आकार बिगाड़ देती हैं। इससे भ्रूण को चिपकने में दिक्कत होती है।
यूटराइन सेप्टम: गर्भाशय के बीच एक दीवार जैसी बनावट बन जाती है, जिससे बार-बार गर्भपात हो सकता है।
पॉलीप्स: ये गर्भाशय की अंदरूनी सतह पर बनने वाले छोटे उभार होते हैं, जो भ्रूण के सही से चिपकने में रुकावट डालते हैं।
ब्लॉक्ड फैलोपियन ट्यूब्स: अगर ट्यूब्स बंद हो जाएं तो अंडाणु और शुक्राणु का मिलना ही संभव नहीं होता।
समय पर जांच है सबसे जरूरी कदम
कई महिलाएं शर्म या डर के कारण डॉक्टर से सलाह नहीं लेती हैं लेकिन समय पर जांच करवाना सबसे अहम कदम है। फर्टिलिटी चेकअप में सिर्फ हार्मोन की नहीं बल्कि गर्भाशय और ट्यूब्स की जांच भी होनी चाहिए। इन जांचों से समस्या का सही कारण पता चल सकता है:
अल्ट्रासाउंड: गर्भाशय की आकृति और फाइब्रॉयड या पॉलीप्स का पता लगाने में मदद करता है।
हिस्टरोसाल्पिंगोग्राफी (HSG): ट्यूब्स खुली हैं या बंद, इसका पता चलता है।
डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी: पेट के अंदर की पूरी स्थिति देखने में मदद करती है।
करेक्टिव सर्जरी कैसे है गर्भधारण करने में मददगार?
पहले गर्भाशय या ट्यूब्स की सर्जरी में बड़ा चीरा लगाया जाता था और रिकवरी में हफ्तों लग जाते थे। लेकिन अब तकनीक ने सब आसान कर दिया है। लैप्रोस्कोपी (Laparoscopy) और हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy) जैसी आधुनिक तकनीकों से अब डॉक्टर बहुत छोटे चीरे से ही पूरी समस्या को ठीक कर देते हैं। इन सर्जरी के जरिए डॉक्टर गर्भाशय से फाइब्रॉयड या पॉलीप्स निकाल सकते हैं, फैलोपियन ट्यूब्स की रुकावट खोल सकते हैं और गर्भाशय की बनावट सही कर सकते हैं। कई मामलों में यह देखा गया है कि कई महिलाएं जिन्होंने सालों तक कोशिश की लेकिन गर्भ नहीं ठहर पाया, उन्होंने सिर्फ एक बार की सर्जरी के बाद नेचुरल कंसेप्शन किया।
इस तरह की सर्जरी के कई फायदे होते हैं, जैसे इस तरह की सर्जरी के कई फायदे होते हैं, जैसे इसमें बहुत कम दर्द होता है और जल्दी रिकवरी होती है। साथ ही, इस सर्जरी में कोई बड़ा निशान नहीं आता और अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है। अगर आपको सर्जरी की सलाह दी गई है, तो इसे इग्नोर न करें। लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी जैसी सर्जरी महिलाओं में फाइब्रॉएड से लेकर ब्लॉक फैलोपियन ट्यूब का इलाज किया जा सकता है, जिससे उन्हें गर्भधारण और मातृत्व के लिए नई उम्मीद मिल सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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