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शानदार उपलब्धि है HAIF हार्ट फेलियर प्रिडिक्टर, कार्डियक केयर को अलग लेवल पर पहुंचा रहे हैं FITTO और AI
What is Heart Failure Predictor: भारत में हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और चिंताजनक बात यह है कि इसका प्रभाव अब युवाओं में भी दिखने लगा है। इन बढ़ती समस्याओं के समाधान के लिए चिकित्सा क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।
इसी दिशा में काम करते हुए, FITTO (Online Healthcare platform) ने पहले डेंगू शॉक सिंड्रोम की पहचान के लिए DSSp ऐप लॉन्च किया था और अब हार्ट फेलियर की भविष्यवाणी करने के लिए हार्ट फेलियर प्रिडिक्टर (HFP) विकसित किया है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व डॉ. अभिजीत रे कर रहे हैं, जिन्होंने इस प्रिडिक्टर के उद्देश्य और हृदय रोग की गंभीरता के बारे में अपनी बातें साझा की हैं।

हार्ट फेलियर प्रिडिक्टर की जरूरत क्यों पड़ी?
बोल्डस्काई के साथ बातचीत में डॉ. रे ने बताया कि हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक में फर्क होता है। हार्ट फेलियर में बीमारी को पहचानने के लिए कोई स्पष्ट मापदंड नहीं होते, और इसका आकलन केवल जांच पर निर्भर करता है, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीज में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, और जब लक्षण आते हैं, तो वे हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी दूसरी बीमारियों से मिलते-जुलते होते हैं, जिससे पहचान में भ्रम पैदा हो जाता है। इस समस्या को हल करने के लिए डॉ. रे का मानना है कि हार्ट फेलियर की जल्दी पहचान के लिए एक स्क्रीनिंग सिस्टम होना चाहिए।
हृदय विफलता का पूर्वानुमान कैसे लगाया जा सकता है?
डॉ. अभिजीत रे के अनुसार, हृदय विफलता की संभावना का अनुमान लगाने के लिए मरीज के डेटा का उपयोग किया जाता है। इसके लिए 12-लीड ईसीजी, कलाई पर पहनी जाने वाली ईसीजी घड़ी या हाथ में पकड़े जाने वाले ईसीजी उपकरण से डाटा एकत्रित किया जाता है। फिर इस डाटा को एक पेटेंट किए गए फॉर्मूले के एल्गोरिदम के माध्यम से प्रोसेस किया जाता है। एआई तकनीक से युक्त यह फॉर्मूला अगले तीन महीनों में मरीज के हार्ट अटैक के जोखिम का अंदाजा लगाने में मदद करता है।
हृदय विफलता के मुख्य कारण
डॉ. रे ने बताया कि हृदय विफलता के कई कारण होते हैं। इनमें उच्च रक्तचाप, शराब का अत्यधिक सेवन, मधुमेह, हाइपोथायरायडिज्म, और दिल का दौरा शामिल हैं। दिल का दौरा पड़ने के बाद हृदय की पंपिंग क्षमता घट जाती है, जिससे हार्ट फेलियर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
भारत में हृदय विफलता की बढ़ती समस्या
डॉ. अभिजीत ने बताया कि भारत में पिछले कुछ दशकों में हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़े हैं, और चिंताजनक बात यह है कि अब युवा लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। 40 वर्ष से कम उम्र के कई व्यक्ति भी अब हार्ट फेलियर के लक्षणों का सामना कर रहे हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
एआई से स्वस्थ जीवन कैसे संभव है
डॉ. अभिजीत के अनुसार, एआई की मदद से हृदय विफलता का पूर्वानुमान लगाना इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कैसे स्वास्थ्य सेवाओं में नई संभावनाएं ला रही है। पहले डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन मुख्यतः अपने नैदानिक अनुभव और उपलब्ध उपकरणों के आधार पर करते थे। लेकिन अब एआई की मदद से यह संभव है कि किसी व्यक्ति में भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का अनुमान लगाया जा सके। यह क्षमता न केवल निदान को अधिक सटीक बनाती है, बल्कि इस समय रहते रोकथाम और मरीज की बेहतर देखभाल को भी आसान बनाती है। इससे समय पर और व्यक्तिगत देखभाल की योजना बनाना संभव होता है, जो रोगी की स्थिति में सकारात्मक सुधार लाता है।
डॉ. अभिजीत की तरफ से विशेष टिप्पणी
डॉ. रे ने सलाह दी कि यदि किसी व्यक्ति में हृदय रोग के कोई ज्ञात कारण हों, तो उन्हें समय रहते नियंत्रण में रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हृदयाघात से बचने के लिए नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी और अच्छा आराम करना जरूरी है। उन्होंने दिल की सेहत का ख्याल रखने की सख्त आवश्यकता पर बल देते हुए हमारे स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का संदेश दिया।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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