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योग से दूर करें नजला-जुकाम

1. जल नेति- जल नेति करने के लिए एक खास किस्म का लोटा आता है। नमक लगे हल्के गुनगुने पानी को इसमें भरें। एक नासिका से धीरे-धीरे इस पानी को डालें और दूसरी नासिका से निकालें। अच्छा होगा कि शुरुआत में इसे किसी अच्छे योग्य प्रशिक्षक से सीखें।
2. मत्स्यासन- पीठ के बल लेट जाएं। हाथों का सहारा लेते हुए सिर के उपरी भाग को जमीन पर रखें और कंधो और गर्दन को जमीन से न लगाएं। हाथों को जांघ पर रख लें।
3. र्स्वागासन- पीठ के बल लेट जाएं। अब दोनों पैर धीरे धीरे उठाएं। हाथों के सहारे कमर को उठाएं। दोनों पैर सिर के उपर जमीन से एक ऊचांई पर रखें। दोनों पैरों को सीधे खडे करें। अब अपने हाथों से पीठ को सहारा दें। ठुड्डी गले से स्पर्श करें। धीरे धीरे पूर्व स्थिति में आ जाएं।
4. शीर्षासन- किसी दीवार के पास आसन पर मोटे कपड़े की पांच-सात तह की गद्दी रखें। अब हाथों को कुहनियों तक यानी बांह का अगला भाग गद्दी पर रखें और घुटने जमीन पर टिक जाएं। एक हाथ की अंगुलियां दूसरे हाथ की अंगुलियों में फंसाकर दोनों हथेलियों को बांध ले और आगे को सिर झुकाकर उसे गद्दी पर इस तरह ले जाएं कि सिर का पिछला भाग हथेलियों में आ जाए। सिर का पिछला भाग हथेलियों में आ जाने पर फिर सिर के बल शरीर का बोझ डाल कर धड़ को ऊपर उठाएं। धीरे धीरे टांगों को ऊपर ले जाएं और फिर दुबारा धीरे धीरे टांगों को नीचे ले जाकर पहली स्थिति में आ जाएं।
5. सूर्यभेदी- सबसे पहले आराम दायक आसन में बैठें। दाएं हाथ से नासिकाग्र मुद्रा लाएं। अनामिका से बाईं नासिका को बंद करें और दाईं से सांस लें। अब दाईं नासिका को बंद करके बाईं से छोड़ दें। इस प्रणायाम से शरीर में गर्मी बढ़ती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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