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देर तक सोने के दुष्प्रभाव और उससे मुक्ती पाने का तरीका
सोना सबको अच्छा लगता है। एक लंबे दिनचर्या के बाद अपने आरमदायक बिस्तर पर झपकी लगाने से बेहतर और क्या हो सकता है। यह कुछ ऐसा है जो कि हम सब करते हैं। हर एक को नींद की जरुरत है। यह हमारे लिए अच्छी है। यह बात हमें हमारे जीवन में बताई गई है। नींद की कमी मनुष्य में कई समस्याओं का कारण बन सकती है। यह बात हर जगह सुनी होगी। इसलिए अनिद्रा जैसी समस्या से निपटने के लिए कई उपचार, दवाइयां और घरेलू उपचार मौजूद हैं।
पर इसके विपरित लक्षणों का क्या? क्या होगा अगर आप बहुत ज्यादा सोयेंगे? क्या यह समस्या बन सकती है? असल में, हां यह हो सकता है। जरुरत से ज्यादा सोने से कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यहां हम आपको अधिक सोने से बचने के कुछ उपाय बताएंगे

मधुमेह
अध्ययनों से पता चला है कि देर तक नींद करना या रात में कम नींद करना, मधुमेह के खतरे को बढ़ा सकता है।

मोटापा
अधिक सोने से या कम सोने से भी आपका वज़न बढ़ सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि जो लोग रात में 9 से 10 घंटों के लिए सोते हैं, वे अगले 6 सालों में 21% ज्यादा मोटे हो सकते हैं, उन लोगों की तुलना में जो रात में केवल 7 से 8 घंटों के लिए सोते हैं।

सरदर्द
कुछ लोगों को छुट्टी वाले दिन या वीकेंडस पर ज्यादा सोने से सर में दर्द होता है। शोधकर्ताओं की माने तो देर तक सोने से हमारे मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर और सेरोटोनिन पर पड़ते दुष्प्रभाव के कारण से यह होता है।

पीठ में दर्द
एक समय था जब डॉक्टर पीठदर्द से पीडित लोगों को केवल आराम करने के लिए कहते थें। लेकन डॉक्टरों को अब एहसास हुआ है कि स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए क्रियाकलाप के एक निश्चित स्तर को बनाए रखना भी बहुत जरुरी है। अतः वे जरुरत पड़ने पर ही अधिक सोने की सलाह देते हैं।

अवसाद
अनिद्रा का ऑवरस्लीपिंग की तुलना में अवसाद से गहरा रिश्ता है, लग-भग 15% लोग अवसाद के कारण ज्यादा सोते हैं। यह उनके अवसाद को और बदतर बना देता है। इसलिए ठीक होने की प्रक्रिया में नियमित रुप से सोन आवश्यक है।

हृदयरोग
नर्स स्वास्थ्य अध्ययन में लग-भग 72,000 महिलाओं को शामिल किया गया। इस अध्ययन के डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि जो औरतें हर रात 9 से 11 घंटों के लिए नींद करती है उन औरतों को 8 घंटे नींद करने वाली औरतों की तुलना में 38% अधिक कोरोनरी हृदयरोग होने की संभावना होती है।

मृत्यु
कई अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग रात को 9 से अधिक घंटों के लिए सोते हैं उनके मरने की संभावना 7 से 8 घंटों के लिए सोने वाले लोगों से अधिक होती है।

1. जागने का निर्णय लें
यह कहना गलत नहीं होगा - कि क्योंकि आप अपना ज्यादातर समय बिस्तर में बिताना पसंद करते हैं, इसलिए आप अक्सर देर तक सोते हैं। कई बार देर तक सोना एक "ऐस्केप मेकैनिज़्म" बन जाता है, जो आपको वास्तविकता से दूर ले जाता है। अगर आप ऑवरस्लीपिंग से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो अपने "जीवन की सचाइ" का सामना करें।

2. ऑवरस्लीपिंग से छुटकारा पाने के लिए प्रेरणा का सहारा लें
इस तरीके को आज़माने के कई उपाय हैं.....पर हम आपको कुछ सरल उपाय बताएंगे
a) कम से कम एक ठोस कारण ढूंढे कि क्यों आप इस आदत को छोडना चाहते हैं। निश्चित रुप से जितना हो सकें अपने विचार स्पष्ट रखें।
b) एक कागज पर वर्तमान काल में बहुत ही सकारात्मक विचार लिखें। (उदा: मुझे अपने आप पर गर्व और खुशी है कि मैं रोज सुबह 7 बजे पूरे जोश और उत्साह के साथ जागता हूँ)।
c) इसे अक्सर पढ़े, लिखें और फिर से लिखें, और सोने से पहले एक बार थोडा सा पढ़ लें।

3.सोने और जागने के बारे में अपनी सोच को बदलें
आपको नींद के बारे में कुछ ऐसा सोचना है कि वह एक ऐसी क्रिया है, जो आपके जीवित रहने के लिए बहुत जरुरी है और इसे ज्यादा कुछ नहीं।

4.प्रतिज्ञा करें कि आप सही समय पर सोयेंगे और जागेंगे
हर रोज सही समय पर जागने और सोने से बढ़िया और क्या हो सकता है। सुबह एक नियमित समय पर जागने की पूरी कोशिश करें, भले ही आप कितने ही बजे क्यों ना सोयें हो....

5. अपनी नींद को सुधारे
अच्छी नींद पाने के लिए आपको कुछ आसान से नियमों का पालन करना होगा, जो आपको कम नींद के साथ ज्यादा ऊर्जा प्रदान करें।
आप कम से कम इन बातों पर ध्यान दें।
a) एक सही दिनचर्या का पालन करें
b) दोपहर में कैफीन का सेवन न करें
c) रात को निकोटीन और शराब से परहेज करें
d) हर रोज कम से कम दो घंटों के लिए अपनी आंखों को धूप लगने दें

6. धीरे-धीरे सोना कम करें
एक सप्ताह में 30-60 मिनट के लिए कम सोना शुरु करें (या दो सप्ताह में)। शुरुआत में थोडी सी मुश्किल होगा। एक नए दिनचर्या में समाने के लिए हमारे शरीर को 7-10 दिनों का समय लगता है, तो थोडा सा रुकें।
लेकिन अधिक ना रुकें। हर रात के लिए अपना लक्ष्य केवल 6-8 घंटों की नींद तक का रखें, और कभी-कभी (20-40 मिनट) के लिए थोडा सा अधिक सोलें।



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